ख़बरिस्तान नेटवर्क : अमेरिका ने अपने नागरिकों को अफगानिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने वहां यात्रा ना करने की सख्त सलाह दी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अफगानिस्तान में आतंकवाद, अपहरण, मनमानी गिरफ्तारियां और मानवाधिकार उल्लंघन के खतरे लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। अफगानिस्तान के साथ साथ मंत्रालय ने और 20 देशों के लिए भी एडवाइजरी जारी की है। यह चेतावनी उन देशों के लिए दी गई, जहां यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है।
यात्रा न करने के उपदेश
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने लेवल-4 "यात्रा न करें" (Do Not Travel) उपदेश जारी करे हैं। यह लेवल-4 एडवाइजरी यात्रा की चेतावनियों में सबसे अहम मानी जाती हैं। इससे पता चलता है कि संबंधित देशों के हालात यात्रियों के लिए खतरनाक हैं। अफगानिस्तान के लिए यह चेतावनी 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद उनकी बिगड़ी हुई सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए दी गई है।
अफगानिस्तान छोड़ने की सलाह
विदेश मंत्रालय ने आगे चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिकी नागरिकों को इन सभी देशों की यात्रा करने से बचना चाहिए क्योंकि वहां आतंकवाद, नागरिक अशांति और युद्ध जैसी समस्याएं हैं। इन देशों में एम्बेसी से मदद मिलना भी बहुत मुश्किल हो जाता है। अफगानिस्तान और अन्य देशों में मौजूदा नागरिकों को तुरंत सुरक्षित तरीके से देश छोड़ने की सलाह दी गई है।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव
ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने नागरिकों से अफगानिस्तान की यात्रा न करने का अनुरोध किया है। उन्होंने बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों का हवाला देते हुए वहां से निकलने की सलाह दी है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI भी ISIS-K के हमलों में मदद कर रही है। हालाँकि तालिबान प्रशासन अब तक इन आतंकी हमलों को रोकने में नाकाम रहा है। जिस कारण अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों में भी तनाव मौजूद है।
तालिबान शासन में महिलाओं पर संकट
तालिबान शासन के अंदर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अफगानिस्तान इस समय युद्ध, मानवीय समस्या, आर्थिक तंगी और सुरक्षा के खतरों से घिरा हुआ है। लेवल-4 सूची में अफगानिस्तान के अलावा यूक्रेन, हैती, ईरान, रूस और यमन जैसे देश भी शामिल हैं। जिनमें युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा प्रमुख है। इन देशों की चेतावनी में मानवाधिकारों पर चोट और महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों का भी ज़िक्र किया है। तालिबान शासन में महिलाओं की आज़ादी पर घंभीर संकट अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक ज़रूरी विषय बन गया है।