ख़बरिस्तान नेटवर्क : स्पीड रिकॉर्ड के मालिक दिनेश औलख के बेटे दिवित औलख का मंगलवार को जालंधर के मॉडल टाउन श्मशानघाट में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पिता दिनेश औलख ने बेटे को मुखाग्नि दी। दिवित को अंतिम विदाई देने के लिए पंजाबी म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री की कई हस्तियां श्मशानघाट पहुंचीं। गायक यो यो हनी सिंह समेत कई कलाकारों ने दिवित के पार्थिव शरीर को कंधा देकर विदाई दी। इस दौरान हर किसी की आंखें नम थीं।
गायकों ने कंधा देकर दी अंतिम विदाई
दिवित के अंतिम संस्कार में पहुंचे कलाकारों ने परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। गायक यो यो हनी सिंह भी अपने भतीजे दिवित को अंतिम विदाई देने पहुंचे। वहीं, लैंबर हुसैनपुरी, गुरप्रीत घुग्गी, सरबजीत सिंह चीमा, बब्बू मान, मंगी माहल और बूटा मोहम्मद समेत कई कलाकारों ने परिवार के साथ दुख साझा किया।
सिस्टम पर बात करने का यह समय नहीं- बब्बू मान
गायक बब्बू मान ने बताया कि करीब चार महीने पहले उनकी दिनेश औलख से मुलाकात हुई थी। उस समय भी दिनेश अपने बच्चे को लेकर बातें कर रहे थे। फिलहाल परिवार जिस दुख से गुजर रहा है, उसमें सिस्टम पर सवाल उठाने का समय नहीं है। इस वक्त परिवार के सामने सिर्फ दुख और अंधेरा है। व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बाद में बात की जा सकती है।
लैंबर हुसैनपुरी ने याद किए पुराने पल, सिस्टम पर उठाए सवाल
गायक लैंबर हुसैनपुरी ने दिवित और उसके परिवार से जुड़ी पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि जब बच्चे काफी छोटे थे, उस समय वह इंग्लैंड दौरे पर गए हुए थे। दिनेश औलख ने फोन करके बच्चों के लिए सामान मंगवाया था। इसके बाद वह करीब 25 किलो का बैग भरकर बच्चों के लिए सामान लेकर आए थे। जिस ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर नहीं होने के कारण यह हादसा हुआ, ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। सरकार को सड़क सुरक्षा के नियमों में सुधार करना चाहिए, ताकि किसी दूसरे परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े।
फूलों जैसे बच्चों को कंधों पर विदा करना सबसे बड़ा दुख- घुग्गी
अभिनेता और कॉमेडियन गुरप्रीत घुग्गी इस दौरान भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि फूलों जैसे बेटे-बेटियों को गंगा में प्रवाहित करना आसान नहीं होता। बच्चे खेलते-कूदते अच्छे लगते हैं, लेकिन उन्हें कंधों पर उठाकर अंतिम विदाई देना माता-पिता के लिए सबसे बड़ा दुख है। कार्यक्रम के बाद सभी लोग अपने घर लौट जाएंगे, लेकिन जिस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है, उसकी तकलीफ वही समझ सकता है।
माता-पिता के लिए इस दुख को सहना मुश्किल-सरबजीत चीमा
गायक सरबजीत सिंह चीमा ने कहा कि इतना बड़ा दुख कोई भी परिवार आसानी से सहन नहीं कर सकता। माता-पिता अपने जवान बेटे को बड़े लाड-प्यार से पालते हैं और कभी कल्पना भी नहीं करते कि उन्हें इस तरह अपने बच्चे को दुनिया से विदा करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए अब जिंदगी का हर पल गुजारना बेहद मुश्किल होगा।
मंगी माहल भावुक होकर रो पड़े
गायक मंगी माहल ने कहा कि जवान बेटे का शव पिता के कंधों पर जाना बेहद दुखद है। जिस बच्चे को माता-पिता अपने हाथों से पालते हैं, जिसके बचपन और लोहड़ी जैसे त्योहारों की यादें परिवार के साथ जुड़ी होती हैं, उसे इस तरह अंतिम विदाई देना असहनीय है। दिवित को याद करते हुए मंगी माहल खुद को संभाल नहीं पाए और भावुक होकर रोने लगे।
बच्चों के जाने से परिवार जीते जी मर जाता है- बूटा मोहम्मद
गायक बूटा मोहम्मद ने कहा कि बच्चे के जाने से परिवार को जो खालीपन महसूस होता है, उसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। बच्चों के साथ परिवार की जिंदगी आगे बढ़ती है, लेकिन उनके जाने से माता-पिता के जीवन में ऐसा दुख आ जाता है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने अरदास की कि परमात्मा दिवित को अपने चरणों में स्थान दें और परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।









