Norton Bike को लॉन्च करेगी TVS Motors, चार बाइक्स कराया ट्रेडमार्क

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नॉर्टन मोटरसाइकिल को बर्मिंघम, यूके में 1898 में किया गया था स्थापित



मिलिए सआदत हसन मंटो से

अजीब आदमी था वो। उर्दू में कमज़ोर था इंट्रेंस में कई बार फेल हुआ। दोस्तों संग मिलकर ड्रामा क्लब बनाया, मगर पिता ने सब तोड़ दिया। जी हां ये थे साहित्य प्रेमियों के हरमन प्यारे सआदत हसन मंटो।

उनकी कहानियां सच दिखातीं थी

वो कहते था- 'अगर आपको मेरी कहानियां अश्लील या गंदी लग रही हैं तो जिस समाज में आप रह रहे हैं वो अश्लील और गंदा है। मेरी कहानियां समाज का सच दिखाती हैं।

पंजाब के समराला में हुआ था जन्म

मंटो का जन्म 11 मई 1912 को पुश्तैनी बैरिस्टरों के परिवार में समराला में हुआ था| उनके वालिद खुद एक नामी बैरिस्टर और सेशंस जज थे और मां गृहणी। मंटो के पिता बहुत सख्त मिजाज थे।

रूसी साहित्य ने प्रभावित किया

रूसी साहित्य ने मंटो को प्रभावित किया। रूसी साहित्य के उर्दू रुपांतरण करते-करते मंटो कब लेखक बन गए उन्हें भी पता नहीं चला। रेडियो के लिए काम किया। कहानियां लिखीं। फिल्म लिखी। और तो और पत्रकारिता भी की।

लिखने को मिले 19 साल

बयालीस साल, आठ महीने और सात दिन की ज़िंदगी में मंटो को लिखने के लिए सिर्फ़ 19 साल मिले और इन 19 सालों में उन्होंने 230 कहानियां, 67 रेडियो नाटक, 22 ख़ाके (शब्द चित्र) और 70 लेख लिखे।

उधर इंतकाल हुआ, यहां फिल्म सुपरहिट हुई

यह एक इत्तेफ़ाक ही है कि 18 जनवरी 1955 को जब लाहौर में मंटो का इंतकाल हुआ, तो उनकी लिखी हुई फ़िल्म मिर्ज़ा ग़ालिबदिल्ली में हाउसफुल जा रही थी।

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