ख़बरिस्तान नेटवर्क : पंजाब में किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर किसान-मजदूर मोर्चा ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। संगठन ने सरकार को किसानों और मजदूरों की मांगों पर कार्रवाई के लिए 17 सितंबर दोपहर 12 बजे तक का समय दिया है। मोर्चे के नेताओं के मुताबिक, अगर तय समय सीमा तक सरकार की ओर से कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया तो पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में ‘रेल रोको’ आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अमृतसर से संगरूर तक कई जगहों पर रेल रोकने की तैयारी
किसान-मजदूर मोर्चा के अनुसार, आंदोलन के पहले चरण में अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, मोगा, संगरूर और सुनाम समेत कई स्थानों पर रेलवे ट्रैक पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह कदम सरकार पर किसानों और मजदूरों की मांगों को लेकर बातचीत और कार्रवाई के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया जाएगा।
पटियाला में मंत्री के आवास के बाहर तीसरे दिन भी धरना
किसान नेताओं के मुताबिक, पटियाला में एक मंत्री के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का तीसरा दिन है। नेताओं का कहना है कि करीब एक महीने पहले पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांगों का ज्ञापन दिया गया था। इसके बाद 31 तारीख को डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों के बाहर भी धरना दिया गया, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से किसानों के साथ बातचीत नहीं हुई है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सवाल
किसान नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। इसके साथ ही बीज अधिनियम और बिजली संशोधन कानून से जुड़े मुद्दों पर भी संगठन सरकार से स्पष्टीकरण और कार्रवाई की मांग कर रहा है। मोर्चे की मांगों में फसलों की MSP पर खरीद सुनिश्चित करना, किसानों और खेत मजदूरों की कर्जमाफी, किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेना और अन्य कृषि एवं ग्रामीण मुद्दों पर सरकार की नीति स्पष्ट करना भी शामिल है।
शंभू-खनौरी आंदोलन के नुकसान के मुआवजे की मांग
किसान-मजदूर मोर्चा शंभू-खनौरी आंदोलन के दौरान हुए नुकसान को लेकर भी मुआवजे की मांग कर रहा है। संगठन के अनुसार, आंदोलन के दौरान करीब 3.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और बड़ी संख्या में किसान घायल हुए। मोर्चा इन मामलों में प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग सरकार के सामने उठा रहा है।
सरकार के फैसले पर टिकी आंदोलन की अगली रणनीति
किसान-मजदूर मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि 17 सितंबर दोपहर 12 बजे तक सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जाएगा। ऐसे में अब सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत होती है या नहीं, इस पर आंदोलन की आगे की रणनीति निर्भर करेगी।









