पंजाब की वित्तीय स्थिति को लेकर एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में पेश की गई ‘स्टेट फाइनेंस: ए स्टडी ऑफ बजट्स 2025-26’ रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब पर इस समय कुल 4.13 लाख करोड़ रुपए का कर्ज हो चुका है। यह कर्ज राज्य के अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 45 प्रतिशत है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा दबाव संकेत करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब का कर्ज लगातार बढ़ रहा है। पड़ोसी राज्यों की तुलना में पंजाब पर कर्ज का बोझ काफी अधिक है। पंजाब पर हिमाचल प्रदेश की तुलना में करीब 3.7 गुना ज्यादा कर्ज है।
हरियाणा पर 2025-26 में 4.02 लाख करोड़ रुपए का कर्ज रहने का अनुमान है। कुल कर्ज के मामले में पंजाब और हरियाणा लगभग बराबरी पर हैं, लेकिन बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण हरियाणा की कर्ज चुकाने की क्षमता पंजाब से बेहतर है।
भारत में सबसे अधिक कर्ज वाला राज्य तमिलनाडु (10.43 लाख करोड़ रुपए) है, जबकि सबसे कम कर्ज वाले राज्यों की सूची में मिजोरम शामिल है।
रिपोर्ट में दोनों राज्यों की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) के आंकड़े भी जारी किए गए हैं:
पंजाब (2024-25 अनुमान): 2,16,592 रुपए
हिमाचल प्रदेश (2024-25 अनुमान): 2,58,196 रुपए
इस प्रकार, हिमाचल प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय पंजाब की तुलना में 41,604 रुपए अधिक है।
मनमर्जी से कर्ज नहीं ले सकती राज्य सरकारें
राज्यसभा में चर्चा के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत कोई भी राज्य अपनी मर्जी से नया कर्ज नहीं ले सकता। यदि किसी राज्य पर केंद्र सरकार का पुराना कर्ज बकाया है या केंद्र की गारंटी लागू है, तो उसे नया कर्ज लेने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है।








