ख़बरिस्तान नेटवर्क : लोकसभा में आज वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया गया। इस बिल के माध्यम से सरकार ने मुस्लिम समुदाय को बड़ा तोहफा दिया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने क्वेशन आवर के बाद इस पर सदन में चर्चा की। इस बिल में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं और आज रात 8 बजे इस पर वोटिंग होगी।
सबसे ज्यादा याचिकाओं में शामिल WAQF
वक्फ संशोधन विधेयक पेश करते हुए किरेन रिजिजू ने बताया कि अब तक इस पर 9,72,772 याचिकाएं आईं हैं, जो किसी भी अन्य विधेयक के मुकाबले सबसे अधिक हैं। इसके अलावा, 284 डेलिगेशन ने विभिन्न संसदीय समितियों के सामने अपनी राय दी है। रिजिजू ने कहा, "जो लोग इस बिल के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण से विरोध कर रहे हैं, वे भी इसे समर्थन देंगे।"
वक्फ बिल में मुस्लिम समुदाय को मिले 5 तोहफे
मस्जिदों पर कोई कार्रवाई नहीं: इस बिल में मस्जिदों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। यह केवल संपत्ति से संबंधित मामला है और धार्मिक संस्थानों से इसका कोई संबंध नहीं है।
धार्मिक स्थलों में हस्तक्षेप नहीं: बिल में किसी भी धार्मिक स्थल या मस्जिद की आंतरिक व्यवस्था में हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है।
धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं: धार्मिक गतिविधियों में कोई दखल नहीं: वक्फ संशोधन बिल में धार्मिक गतिविधियों को प्रभावित करने का कोई प्रावधान नहीं है। सरकार मस्जिदों के संचालन में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
सरकारी जमीन के विवादों का समाधान: अब कलेक्टर से ऊपर के अधिकारी सरकारी और विवादित वक्फ संपत्तियों से संबंधित मामलों को देखेंगे। इसके अलावा, वक्फ संपत्ति आदिवासी क्षेत्रों में नहीं बनाई जा सकेगी।
वक्फ काउंसिल में सीमित गैर-मुस्लिम सदस्य: 22 सदस्यीय वक्फ काउंसिल में अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं। इसमें पूर्व अधिकारी और संसद के 3 सदस्य भी शामिल होंगे, जिनका धर्म कोई भी हो सकता है।
वक्फ क्या है?
‘वक्फ’ शब्द अरबी के ‘वकुफा’ से आया है, जिसका अर्थ होता है ठहरना या रोकना। सरल शब्दों में, इस्लाम धर्म में जब कोई व्यक्ति धार्मिक उद्देश्य से या ईश्वर के नाम पर अपनी संपत्ति दान करता है, तो उसे ‘वक्फ करना’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि वह संपत्ति स्थायी रूप से दान की जाती है। यह संपत्ति चाहे धन हो, मकान हो, जमीन हो या कोई अन्य मूल्यवान वस्तु हो सकती है।
वक्फ की गई संपत्तियों को ‘अल्लाह की संपत्ति’ माना जाता है, और जो व्यक्ति इसे दान करता है, उसे ‘वकिफा’ कहा जाता है। इन संपत्तियों को बेचा नहीं जा सकता और इन्हें केवल धार्मिक कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है।
ऐसा कहा जाता है कि पैगंबर मोहम्मद के समय में सबसे पहली वक्फ संपत्ति 600 खजूर के पेड़ों का बाग था, जिसे दान किया गया था, और इससे प्राप्त आय का उपयोग मदीना के गरीबों की मदद के लिए किया जाता था।