नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के करीब दो हफ्ते बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू टीमें अलग-अलग 7 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं। पहाड़ी इलाकों में टूटे रास्तों, भारी मलबे और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव अभियान में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
अब तक 13 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, लेकिन 4,894 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 587 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
नेपाल में 1,356 लोगों की मौत
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में अब तक 1,356 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, तिब्बत में 43 लोगों की मौत हुई है और 519 लोग अभी भी लापता हैं।
7 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में तलाश
रेस्क्यू टीमें कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट: सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट: नेपाली और भारतीय सेना की टीम करीब 115 मीटर अंदर तक पहुंच चुकी है।
अपर त्रिशूली-1: सुरंग में करीब 400 मीटर तक तलाशी ली गई, लेकिन अभी कोई सुराग नहीं मिला।
मेलुंग खोला: करीब 1 किलोमीटर क्षेत्र में ड्रोन से सर्च किया गया।
त्रिशूली-3A: सुरंग और पावर हाउस में तलाश जारी है।
त्रिशूली-3B: ड्रोन और थर्मल कैमरों की मदद से ऑफिस और रिहायशी इलाकों में तलाशी चल रही है।
लापता भारतीयों के परिजनों से DNA सैंपल मांगे
नेपाल-तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन के बाद कुछ भारतीय नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने लापता भारतीयों के परिजनों से DNA सैंपल जमा करने को कहा है, ताकि बरामद शवों की पहचान की जा सके।
नेपाल ने मांगा 2 करोड़ डॉलर का मुआवजा
नेपाल ने बाढ़ से हुए भारी नुकसान के लिए करीब 2 करोड़ डॉलर यानी लगभग 189 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। नेपाल का कहना है कि जलवायु परिवर्तन में उसका योगदान बेहद कम है, लेकिन इसके बावजूद देश को जलवायु परिवर्तन का गंभीर असर झेलना पड़ रहा है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 30 वर्षों में नेपाल के पहाड़ों ने करीब एक-तिहाई बर्फ खो दी है।









