दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद नगर निगम यानी MCD ने बड़ा कदम उठाया है। MCD ने पूरी दिल्ली में इमारतों की जांच के आदेश जारी किए हैं। सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को अपने-अपने क्षेत्रों में इमारतों का निरीक्षण कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, सत्य निकेतन में रविवार को हुए इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। हादसे के बाद करीब 28 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। NDRF की टीमों ने मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला, जिनमें 3 घायलों की हालत गंभीर बताई गई।
हादसे में 3 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने बिल्डिंग हादसे के मामले में प्रॉपर्टी मालिक उर्मिला गुप्ता, उनके पति हरिराम गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, प्रॉपर्टी उर्मिला गुप्ता के नाम पर दर्ज थी, जबकि इसका संचालन उनके पति और बेटे के जिम्मे था।
तीनों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने हरिराम और उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, जबकि महेश गुप्ता को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस अब PG संचालकों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर की भूमिका की भी जांच कर रही है।
MCD के 5 अधिकारी सस्पेंड
हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार समेत 5 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। चार इंजीनियरिंग अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई पूरी होने तक निलंबन की कार्रवाई की गई है।वहीं, IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
हाईकोर्ट में दाखिल होगा हलफनामा
MCD की ओर से इमारतों के निरीक्षण के दौरान जुटाई गई जानकारी को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में शामिल किया जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
MCD के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में करीब 27 लाख 84 हजार 286 इमारतों का सर्वे किया गया था। इनमें से सिर्फ 19 इमारतों को खतरनाक पाया गया था।
सत्य निकेतन में करीब 300 मकान, 170 में PG
सत्य निकेतन इलाके में करीब 300 मकान हैं, जिनमें लगभग 170 मकानों में PG संचालित होने की बात सामने आई है। यह इलाका मूल रूप से 1965 से 1970 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसाया गया था। बाद में साउथ कैंपस और आसपास के कॉलेजों के विस्तार के साथ यहां छात्रों की संख्या बढ़ती गई और बड़ी संख्या में मकानों को PG में बदल दिया गया।
अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट के मुताबिक, दिल्ली की कई पुरानी इमारतें अतिरिक्त मंजिलों का भार उठाने के हिसाब से तैयार नहीं की गई थीं। ऐसे में सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली की पुरानी और अनधिकृत इमारतों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।









