इस साल नहीं पड़ेगी ठंड? अल नीनो ने बढ़ाई टेंशन, किसान से कारोबारी तक चिंता!

Milder winter ahead? El Niño raises concerns—worry grips everyone from farmers to business owners!

भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। तेज गर्मी, भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के बीच अब अल नीनो के संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति मजबूत होती है, तो इसका असर भारत के तापमान, बारिश और सर्दियों के मौसम पर पड़ सकता है। वही अगर इस बार सर्दियों में ठंड कम पड़ी और तापमान सामान्य से ज्यादा रहा, तो इसका सीधा असर विंटर कपड़ों के कारोबार पर पड़ सकता है।खासकर लुधियाना की होजरी इंडस्ट्री में इस बात को लेकर टेंशन बढ़ सकती है।

आखिर सर्दी कमजोर रहने की चिंता क्यों बढ़ी ?

इसके पीछे बड़ी वजह है अल नीनो।WMO यानी विश्व मौसम विज्ञान संगठन की 3 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक अल नीनो बन चुका है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है।अल नीनो की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है।

इसका असर किसानों पर भी पड़ सकता है। गेहूं, सरसों और दालों जैसी रबी फसलों के लिए सही तापमान और मिट्टी में पर्याप्त नमी बेहद जरूरी होती है। वहीं, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों के लिए भी सर्दी काफी अहम है। जरूरी ठंड यानी चिलिंग आवर्स कम मिलने से कुछ सेब की किस्मों में फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

अल नीनो क्या होता है?

अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है।समुद्र के तापमान में इस बदलाव का असर हवाओं, बारिश और तापमान के वैश्विक पैटर्न पर पड़ता है। इसका प्रभाव भारत के मानसून और सर्दियों पर भी देखने को मिल सकता है।

‘गॉडजिला अल नीनो’ क्या है?

‘गॉडजिला अल नीनो’ कोई आधिकारिक वैज्ञानिक नाम नहीं है। यह शब्द बेहद मजबूत अल नीनो की स्थिति को बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।कुछ रिपोर्ट्स में प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह और गहरे पानी में असामान्य गर्मी का जिक्र किया गया है। इसी वजह से एक मजबूत अल नीनो की आशंका पर चर्चा बढ़ी है।

इस साल सर्दी पर क्या असर होगा?

अगर अल नीनो मजबूत रहता है, तो उत्तर और मध्य भारत में सर्दी सामान्य से कमजोर रह सकती है।दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के दिन कम हो सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे भारत में सर्दी खत्म हो जाएगी। मौसम का वास्तविक असर आने वाले पूर्वानुमानों पर निर्भर करेगा।

पानी की कमी का खतरा

कम बारिश और बढ़ते तापमान के कारण जलाशयों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।इससे आगे चलकर सिंचाई और पीने के पानी की समस्या बढ़ने की आशंका हो सकती है।

दुनिया में कहीं सूखा, कहीं बाढ़

मजबूत अल नीनो का असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग हो सकता है।कहीं सूखा और जंगलों में आग का खतरा बढ़ सकता है, तो कहीं भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा गर्मी भी देखने को मिल सकती है।

ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ सकता है असर

अल नीनो प्राकृतिक घटना है, लेकिन पहले से बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण इसके प्रभाव ज्यादा गंभीर महसूस हो सकते हैं।

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता

भारत के लिए मुख्य चिंता चार चीजों को लेकर है—

बारिश, खेती, पानी और तापमान।

अगर अल नीनो मजबूत हुआ तो मानसून प्रभावित हो सकता है, फसलों पर दबाव बढ़ सकता है, पानी की उपलब्धता घट सकती है और सर्दियों में तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है।

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