श्री श्री रविशंकर को न्यू जर्सी में सम्मान, 45 वर्षों की शांति और मानवसेवा यात्रा की सराहना

श्री श्री रविशंकर को शांति-निर्माण और मानवीय सेवा के क्षेत्र में 45 वर्षों के योगदान के लिए न्यू जर्सी राज्य विधानमंडल के साथ-साथ एडिसन और फ्रैंकलिन टाउनशिप के स्थानीय निकायों ने सम्मानित किया।

ख़बरिस्तान नेटवर्क : श्री श्री रविशंकर को शांति-निर्माण और मानवीय सेवा के क्षेत्र में 45 वर्षों के योगदान के लिए न्यू जर्सी राज्य विधानमंडल के साथ-साथ एडिसन और फ्रैंकलिन टाउनशिप के स्थानीय निकायों ने सम्मानित किया। उनकी हालिया न्यू जर्सी यात्रा के दौरान दिए गए इन सम्मानों में विभिन्न समुदायों और संस्कृतियों के बीच शांति, मानवीय मूल्यों और आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों को रेखांकित किया गया।

45 वर्षों की मानवसेवा यात्रा को मिला सम्मान
श्री श्री रविशंकर पिछले साढ़े चार दशकों से शांति, मानवीय मूल्यों और समाज सेवा से जुड़े विभिन्न अभियानों के जरिए लोगों को जोड़ने का काम कर रहे हैं। न्यू जर्सी में मिले सम्मान को उनकी इसी लंबी यात्रा और सामाजिक योगदान की सार्वजनिक स्वीकृति के तौर पर देखा गया। इन सम्मानों के साथ उत्तरी अमेरिका में गुरुदेव को मिले नागरिक सम्मानों की श्रृंखला भी आगे बढ़ी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और कनाडा के 54 शहर अब तक उनके सम्मान में ‘श्री श्री रविशंकर दिवस’ घोषित कर चुके हैं।

न्यूयॉर्क में बोले- अकेलापन सिर्फ लोगों की अनुपस्थिति नहीं
23 सितंबर को न्यूयॉर्क स्थित सेंट जॉन द डिवाइन कैथेड्रल में आयोजित कार्यक्रम में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने बड़ी संख्या में मौजूद लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अकेलेपन और आत्मीय जुड़ाव पर बात करते हुए कहा, “एकाकीपन लोगों की अनुपस्थिति नहीं है; यह उस आत्मीय उपस्थिति के अनुभव का अभाव है, जिसे हृदय महसूस कर सके।” उन्होंने अपने संबोधन में लोगों के बीच भावनात्मक और मानवीय जुड़ाव को भी महत्वपूर्ण बताया।

आंतरिक शक्ति को बताया वास्तविक सामर्थ्य का आधार
गुरुदेव ने आंतरिक शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि वास्तविक सामर्थ्य व्यक्ति के भीतर से विकसित होता है। परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, अपने भीतर संतुलन और स्थिरता बनाए रखने की क्षमता व्यक्ति की ताकत को दर्शाती है। न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी में हुए सार्वजनिक संवादों के दौरान उन्होंने व्यक्तिगत और सामूहिक कल्याण के बीच संबंध पर भी बात की। उनका संदेश रहा कि व्यक्ति का आंतरिक संतुलन उसके परिवार और समाज के वातावरण को प्रभावित करता है।

शांत व्यक्ति से शांत परिवार और समुदाय की ओर
गुरुदेव ने कहा कि आंतरिक कल्याण को सामूहिक कल्याण से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, एक शांत और संतुलित व्यक्ति शांत परिवार की नींव रखता है और शांत परिवारों से शांतिपूर्ण समुदाय का निर्माण होता है। उन्होंने इस विचार को व्यापक स्तर पर रखते हुए कहा कि आंतरिक शांति और मानवीय संवेदना मिलकर अधिक शांतिपूर्ण समाज और दुनिया के निर्माण में भूमिका निभा सकती हैं।

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