पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के 12 दिन बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। परिवार और एक्शन कमेटी मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के डीजीपी के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं, आज भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत सहित अलग अलग राज्यों के किसान नेता मानसा पहुंचेंगे। वे झोटा के परिवार से मुलाकात करेंगे और आगे के संघर्ष की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
इस मामले में SIT में शामिल IAS अधिकारी अपनीत रियात ने बताया कि परिवार और एक्शन कमेटी की 11 मांगें मान ली गई हैं। इन मांगों को लेकर लिखित पत्र भी सौंपा गया है। हालांकि, एक्शन कमेटी का कहना है कि मांगें मानने के बावजूद उन्हें लागू करने के लिए अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
इस्तीफे के बिना बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल: एक्शन कमेटी
झोटा हत्याकांड को लेकर एक्शन कमेटी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना रुख स्पष्ट किया। कमेटी के सदस्य मानिक गोयल ने कहा कि परिवार की पहली दो मांगें मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी के इस्तीफे से जुड़ी हैं। जब तक दोनों इस्तीफा नहीं देते, तब तक सरकार के साथ बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकती।
उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार की ओर से गठित विशेष जांच टीम (SIT) के साथ बैठक हुई थी। इस दौरान सरकार ने कई मांगों पर सहमति जताई, लेकिन कमेटी के मुताबिक, उन्हें लागू करने की दिशा में अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ट्रॉमा सेंटर के बजट और नोटिफिकेशन पर उठाए सवाल
मानिक गोयल ने बताया कि बैठक के दौरान मानसा में परविंदर सिंह झोटा के नाम पर ट्रॉमा सेंटर बनाने की मांग भी रखी गई थी। सरकार ने इस पर सहमति जताई, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि निर्माण कार्य कब शुरू होगा और इसके लिए कितना बजट निर्धारित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ट्रॉमा सेंटर को लेकर अब तक कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी नहीं हुआ है। एक्शन कमेटी का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे की मांग SIT के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, तो सरकार मंत्रियों की एक कमेटी गठित करके बातचीत के लिए भेजे।अब सभी की नजरें मानसा पहुंचने वाले किसान नेताओं की बैठक और परिवार व एक्शन कमेटी की अगली रणनीति पर टिकी हैं।









