युवाओं और छात्रों में यौन स्वास्थ्य, सुरक्षित संबंधों और अनचाहे गर्भ से बचाव को लेकर जागरूकता की जरूरत पर एक महिला डॉक्टर ने चिंता जताई थी। वही इसके बाद डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि हाल ही में यूनिवर्सिटी के संदर्भ में दिए गए एक बयान पर उठते सवालों के बीच, संबंधित डॉक्टर ने स्पष्ट किया है कि उनका मकसद किसी भी शैक्षणिक संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज और युवाओं को जागरूक करना है।
डॉक्टर ने कहा कि जालंधर के किसी भी डॉक्टर से बात करने पर पता चलेगा कि अनचाहे गर्भ से जुड़े मामले किसी एक संस्थान या जगह तक सीमित नहीं हैं। बड़ी संख्या में युवा छात्र अलग-अलग संस्थानों में पढ़ते हैं, इसलिए उदाहरण के तौर पर एक बड़े शैक्षणिक संस्थान का संदर्भ दिया गया था।
24 हफ्ते की प्रेगनेंसी का मामला
डॉक्टर ने एक बेहद संवेदनशील मामला साझा करते हुए बताया कि एक विदेशी छात्रा को लंबे समय तक अपनी प्रेगनेंसी का पता नहीं चला। करीब 24 हफ्ते यानी 6 महीने की प्रेगनेंसी के बाद वह गर्भपात के लिए कई डॉक्टरों और सेंटरों के चक्कर लगा रही थी।
डॉक्टर के मुताबिक, इतनी देर से सामने आने वाले मामलों में कानूनी और मेडिकल सीमाएं लागू होती हैं। ऐसे में योग्य डॉक्टरों से मदद न मिलने पर मरीजों के झोलाछाप या गैर-योग्य लोगों के पास जाने का खतरा बढ़ सकता है, जो महिला की जान और स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
अनचाहा गर्भ सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक असर भी डालता है
डॉक्टर ने अपने क्लिनिक का एक और भावुक मामला साझा किया। उन्होंने बताया कि विदेश से आई एक छात्रा अनचाहे गर्भ को लेकर उनके पास पहुंची थी। जरूरी सहमति और चिकित्सीय प्रक्रिया के बाद उसका इलाज किया गया।
एक सप्ताह बाद फॉलो-अप के दौरान डॉक्टर ने उसकी फाइल में अपने अजन्मे बच्चे के नाम लिखी एक भावुक चिट्ठी देखी। डॉक्टर के मुताबिक, यह मामला दिखाता है कि अनचाहा गर्भ केवल शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि इसका गहरा मानसिक और भावनात्मक असर भी हो सकता है।
गर्भनिरोधक उपायों को लेकर जागरूकता जरूरी
डॉक्टर ने युवाओं में गर्भनिरोधक उपायों को लेकर मौजूद भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कपल्स को अपनी स्थिति के अनुसार कंडोम जैसे बैरियर मेथड्स या डॉक्टर की सलाह से गर्भनिरोधक विकल्पों का इस्तेमाल करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि 21 दिनों वाली ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स को लेकर समाज में कई मिथक हैं। इनका इस्तेमाल हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता, इसलिए सही विकल्प और उपयोग के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बिना सलाह के गर्भपात किट लेना खतरनाक
डॉक्टर ने चेतावनी दी कि बिना चिकित्सकीय सलाह के गर्भपात की दवाइयां या किट लेना गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। गलत इस्तेमाल से भारी रक्तस्राव, अधूरा गर्भपात और संक्रमण जैसी Complications हो सकती हैं।
डॉक्टर ने युवाओं से अपील की कि अनचाहे गर्भ की स्थिति आने का इंतजार करने के बजाय पहले से सुरक्षित और जिम्मेदार कदम उठाएं।
कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज से अपील
डॉक्टर ने सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज से अपील की है कि छात्रों के लिए यौन स्वास्थ्य, सुरक्षित संबंध, गर्भनिरोधक उपायों और अनचाहे गर्भ से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
उन्होंने कहा कि युवाओं को सही जानकारी समय पर मिलना बेहद जरूरी है, ताकि वे गलत जानकारी, झोलाछाप इलाज और असुरक्षित तरीकों का सहारा लेने से बच सकें। युवाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए परिवार, समाज और शिक्षण संस्थानों सभी को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।









