ख़बरिस्तान नेटवर्क : पंजाब में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। सोमवार दोपहर किसान संगठनों ने जालंधर में कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत के घर के पास स्थित पार्क में धरना शुरू कर दिया। किसान संगठनों ने 14 से 18 सितंबर तक पंजाब के मंत्रियों के घरों के बाहर पक्का मोर्चा लगाने का ऐलान किया है।
किसान नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर 18 सितंबर तक उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके तहत रेल यातायात और राष्ट्रीय राजमार्गों को रोकने जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी गई है।
शंभू-खनौरी बॉर्डर पर सामान वापस करने की मांग
धरने के दौरान किसान नेताओं ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान सामान चोरी होने का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि आंदोलन के दौरान पंजाब पुलिस की ओर से किसानों की ट्रॉलियों, एसी और अन्य सामान कथित तौर पर ले लिया गया था। किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि किसानों का सामान जल्द से जल्द वापस करवाया जाए।
अमेरिका के साथ ट्रेड समझौते का भी विरोध
किसान नेताओं ने हाल ही में अमेरिका के साथ हुए ट्रेड समझौते को लेकर भी विरोध जताया। उनका कहना है कि इस समझौते का आने वाले समय में भारतीय किसानों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। किसानों ने सरकार से इस समझौते को रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही पंजाब के किसानों पर चढ़े कर्ज को केंद्र और पंजाब सरकार द्वारा मिलकर माफ करने की मांग भी उठाई गई।
डिजिटल बिजली मीटरों को लेकर किसानों में नाराजगी
धरने के दौरान किसानों ने घरों में लगाए जा रहे डिजिटल यानी चिप वाले बिजली मीटरों का भी विरोध किया। किसान नेताओं का आरोप है कि इन मीटरों की वजह से बिजली की खपत के मुकाबले अधिक बिल आ रहे हैं। किसानों ने सरकार से ऐसे मीटरों को बंद करने और बिजली बिलों से जुड़ी समस्या का समाधान करने की मांग की।
लंबे बिजली कटों पर भी सरकार को घेरा
पंजाब में लगातार लग रहे लंबे बिजली कटों को लेकर भी किसान नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बिजली कट नहीं लगाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कई इलाकों में लोगों को कई-कई घंटे बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। सिंचाई के समय बिजली उपलब्ध नहीं होने से खेती प्रभावित हो रही है। इससे किसान और आम लोग दोनों परेशान हैं।
18 सितंबर के बाद आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि अगर 18 सितंबर तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा। किसानों की जल्द ही राज्य स्तरीय बैठक होने की बात कही गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर रेल यातायात रोकने के साथ नेशनल हाईवे पर धरना देकर रास्ते जाम किए जा सकते हैं।









