पंजाब की राजनीति में रविवार को बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रामिंदर सिंह आवला ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया। चंडीगढ़ में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
पार्टी में शामिल होने के बाद आंवला ने कहा कि उन्हें गर्व है कि सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब की जनता की सेवा के लिए उन पर भरोसा जताया है। उनके अकाली दल में शामिल होने से फिरोजपुर जिले की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
रामिंदर सिंह आवला का यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अक्टूबर 2019 में जलालाबाद विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इस सीट को अकाली दल का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। वह 16 अक्टूबर 2019 से 10 मार्च 2022 तक विधायक रहे। इसके अलावा, गुरुहरसहाय में नगर कौंसिल चुनावों के दौरान भी उन्होंने कांग्रेस को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।
वही अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आवला का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि रामिंदर सिंह आवला जलालाबाद के साथ-साथ पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल की जीत सुनिश्चित करने के लिए आंवला से योगदान देने की उम्मीद जताई।
रामिंदर सिंह आवला ने पार्टी बदलने पर क्या कहा?
रिपोर्ट के मुताबिक, आंवला ने कहा कि पंजाब का दर्द शिरोमणि अकाली दल ही समझता है और पंजाब के मुद्दों का हल भी यही पार्टी निकाल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने साथियों को अपने फैसले के बारे में बता दिया था।
इस पर भी उनका बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जलालाबाद से उन्हें टिकट देना है या किसी दूसरे उम्मीदवार को चुनाव लड़ाना है, इसका फैसला सुखबीर सिंह बादल करेंगे। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि उन्हें जलालाबाद से टिकट मिलना तय है।
सुखबीर बादल ने एक और संकेत दिया
रिपोर्ट के अनुसार, सुखबीर बादल ने कहा कि अकाली दल से जुड़ने वाले पंजाब से प्यार करने वाले नेताओं की संख्या बढ़ रही है और आने वाले दिनों में पार्टी में कुछ और बड़े नेता शामिल हो सकते हैं।









