कहीं ट्रैक्टर तो कहीं ड्रैगन पर सवार रावण, जालंधर में अनोखे पुतले बने आकर्षण का केंद्र

दशहरे के अवसर पर जालंधर में 50 से अधिक स्थानों पर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाएगा। वहीं, भार्गव कैंप में बच्चों और युवाओं ने इस बार रावण के अनोखे पुतले तैयार किए हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। किसी पुतले में रावण ट्रैक्टर पर बैठा नजर आ रहा है, तो कहीं उसे घोड़े और कार पर सवार दिखाया गया है। इसके अलावा, नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए ड्रैगन की थीम पर भी रावण का पुतला बनाया गया है।

एक महीने की मेहनत से तैयार किया अनोखा रावण

भार्गव कैंप में इन पुतलों को तैयार करने वाले युवाओं ने बताया कि हर साल कुछ नया करने की कोशिश की जाती है। मानव ने बताया कि लोगों में दशहरे को लेकर उत्साह बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने अनोखा पुतला तैयार किया है। इसे बनाने में करीब एक महीने का समय लगा और 6 से 7 युवाओं ने मिलकर काम किया, जिनमें तीन वरिष्ठ युवा भी शामिल थे।

मानव के मुताबिक, इस पुतले को तैयार करने में करीब 10 से 15 हजार रुपये खर्च हुए हैं। पुतले में आकर्षण बढ़ाने के लिए लाइटें भी लगाई गई हैं। वह पेशे से इलेक्ट्रीशियन हैं और इससे पहले टैंक, चेतक स्कूटर तथा जीप की थीम पर भी पुतले तैयार कर चुके हैं। उनका कहना है कि इन अनोखे पुतलों के जरिए लोगों को बुराई से दूर रहने का संदेश देना ही मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि इस पुतले का दहन दशहरे के दिन के बजाय 21 अक्टूबर को किया जाएगा।

ड्रैगन रावण के जरिए नशे के खिलाफ संदेश

वहीं, सुमित ने बताया कि इस बार कुछ अलग करने के विचार से ड्रैगन की थीम पर रावण का पुतला तैयार किया गया है। इससे पहले वह आधे घोड़े और आधे रावण की आकृति वाला पुतला बना चुके हैं। इसके अलावा गाड़ी और जहाज की थीम पर भी पुतले तैयार किए जा चुके हैं।

सुमित के अनुसार, ड्रैगन रावण को बनाने में करीब 20 से 25 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इसमें लगभग 20 हजार रुपये के पटाखे लगाए गए हैं और पांच युवाओं ने मिलकर इसे तैयार किया है। इस बार पुतले के माध्यम से लोगों को नशे से दूर रहने और पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए जागरूक करने का प्रयास किया गया है।

दशहरे के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश

भार्गव कैंप में अलग-अलग थीम पर तैयार किए गए रावण के पुतले बच्चों की रचनात्मकता और युवाओं की मेहनत को दर्शा रहे हैं। इन पुतलों के जरिए दशहरे के पारंपरिक उत्सव को एक सामाजिक संदेश से भी जोड़ा गया है। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरे पर युवाओं की यह पहल लोगों को नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का प्रयास है।

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