राजस्थान के कोटा की रहने वाली तन्वी महज दो साल की उम्र में बेहतर इलाज और नई जिंदगी की उम्मीद लेकर 10 अक्टूबर 2012 को दिल्ली AIIMS पहुंची थी। लेकिन परिवार के मुताबिक, इसके बाद शुरू हुआ इलाज का लंबा इंतजार उसकी मौत के साथ खत्म हुआ।
तन्वी को जन्म से ही VSD यानी दिल में छेद और पल्मोनरी एट्रेसिया की समस्या थी। परिवार का आरोप है कि शुरुआती दौर में सर्जरी की जरूरत बताई गई थी, लेकिन वर्षों तक ऑपरेशन टलता रहा।
2012 में शुरू हुआ इलाज का सफर
तन्वी के पिता मुकेश कुमार के मुताबिक, 10 अक्टूबर 2012 को पहली बार AIIMS की OPD में बच्ची को दिखाया गया। जांच के बाद उसे कार्डियोलॉजी से कार्डियक सर्जरी विभाग में रेफर किया गया।
2013 में बच्ची के कई टेस्ट हुए। इसके बाद 2014 में परिवार ने करीब 1 लाख 25 हजार रुपये जमा किए और चार यूनिट ब्लड की व्यवस्था भी की। परिवार को उम्मीद थी कि अब बेटी की सर्जरी हो जाएगी।
2015 में मिली सर्जरी की तारीख, लेकिन ऑपरेशन नहीं हुआ
परिवार के अनुसार, 2 सितंबर 2015 को सर्जरी की तारीख दी गई थी। लेकिन बाद में ऑपरेशन टाल दिया गया। पिता का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर बच्ची के दांत में कीड़ा होने की बात कहकर सर्जरी आगे बढ़ा दी गई और जनवरी 2016 में दोबारा बुलाया गया।
इसके बाद भी परिवार लगातार AIIMS के चक्कर लगाता रहा। पिता के मुताबिक उन्होंने डॉक्टरों से लेकर अधिकारियों और यहां तक कि PMO में भी शिकायत की, लेकिन सर्जरी नहीं हो सकी।
परिवार का आरोप है कि शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल बुलाया गया, लेकिन शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। 2017 और 2018 में भी परिवार अस्पताल पहुंचा, लेकिन ऑपरेशन नहीं हुआ।
2018 के बाद AIIMS ने क्या कहा?
यहीं पर मामले का दूसरा पक्ष सामने आता है। AIIMS के कार्डिएक सर्जरी विभाग के HOD डॉ. के मुताबिक, 2012 की जांच में तन्वी को VSD के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया की समस्या मिली थी।
AIIMS प्रशासन का कहना है कि 2018 में दोबारा जांच के बाद सर्जरी संभव नहीं मानी गई, इसलिए दवाओं से इलाज यानी मेडिकल मैनेजमेंट का फैसला लिया गया और परिवार को नियमित फॉलोअप की सलाह दी गई। AIIMS के अनुसार, पिछले साल दूसरी राय लेने पर भी बच्ची के लिए मेडिकल मैनेजमेंट की ही सलाह दी गई थी।
फिर 2026 में बिगड़ी तबीयत
AIIMS के मुताबिक, तन्वी की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे 24 अगस्त 2026 को संभावित हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती किया गया था। सोमवार को उसकी एंडोस्कोपी हुई। इसके बाद मंगलवार तड़के उसे हाइपॉक्सिक स्पेल आया, जिसके बाद कार्डियक अरेस्ट हुआ। डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सुबह 5:06 बजे तन्वी की मौत हो गई।
परिवार ने किस पर लगाए आरोप?
बेटी की मौत के बाद पिता मुकेश कुमार ने AIIMS के हार्ट सर्जरी विभाग के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि अगर 2015 के आसपास सर्जरी कर दी जाती तो शायद उनकी बेटी की जान बच सकती थी। परिवार का आरोप है कि सालों तक सिर्फ जांच और तारीखों का सिलसिला चलता रहा, लेकिन ऑपरेशन नहीं हुआ।परिवार अब मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
आखिर गलती किसकी?
फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि तन्वी की मौत के लिए AIIMS या किसी डॉक्टर की गलती साबित हो चुकी है। परिवार ने इलाज में देरी और लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि AIIMS का कहना है कि बाद की मेडिकल जांचों में सर्जरी संभव नहीं थी और बच्ची का मेडिकल मैनेजमेंट किया जा रहा था।
यानी इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2015 में सर्जरी की तारीख दिए जाने के बाद ऑपरेशन क्यों नहीं हुआ और 2018 में सर्जरी को अनुपयुक्त क्यों माना गया? इसका स्पष्ट जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
इसी विवाद को देखते हुए AIIMS प्रशासन ने मामले की समीक्षा और इलाज में हुई कथित देरी की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है।
फिलहाल परिवार इंसाफ की मांग कर रहा है और AIIMS की जांच समिति की रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इलाज में वास्तव में लापरवाही हुई थी या तन्वी की गंभीर हृदय संबंधी बीमारी के कारण सर्जरी संभव नहीं थी।









