ख़बरिस्तान नेटवर्क : पंजाब में नशे की समस्या को लेकर पंजाब विधानसभा की पंजाब हेल्थ सिस्टम की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में नशे की चपेट में आने वाले कुल लोगों में से 65% लोग 18 से 35 साल की उम्र के बीच के हैं। एक तरफ जहां युवा नशा छोड़ना चाह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में इसके इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं और बुनियादी ढांचा नदारद है। कई सरकारी अस्पतालों की इमारतें भी जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं।
250 मरीजों के लिए महज 15 बेड
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके मुकाबले सुविधाएं बेहद सीमित हैं। उदाहरण के तौर पर, लुधियाना सिविल अस्पताल में नशा छुड़ाने के लिए प्रतिदिन 250 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि वहां नशा मुक्ति वार्ड में केवल 15 बेड ही उपलब्ध हैं।
इसके अलावा, जेलों के अंदर स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 4 सालों में OOAT क्लीनिक में 40,830 कैदी इलाज के लिए पहुंचे हैं, जो यह दर्शाता है कि युवा इस दलदल से बाहर निकलना चाहते हैं।
दवा की खरीद पर उठे सवाल
विधानसभा समिति ने नशा छुड़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाली बुप्रेनॉरफिन (Buprenorphine) दवा की खरीद पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस दवा की खरीद 2022 में 7 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025 में 11 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। हालांकि, समिति ने चिंता जताई है कि इतने बड़े बजट के बावजूद लंबे समय से दवा लेने वाले मरीजों की वास्तविक नशामुक्ति (Recovery Rate) का कोई पुख्ता आकलन नहीं किया जा रहा है।









