ख़बरिस्तान नेटवर्क : संसार का स्वभाव उथल-पुथल भरा है, लेकिन हमारी आत्मा का मूल स्वभाव शांति है। जब शरीर, मन और आत्मा एक साथ समरसता में होते हैं, तब व्यक्ति अपने भीतर सच्ची शांति का अनुभव करता है। अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के अनुसार शांति का अर्थ जीवन से भागना या परिस्थितियों को चुपचाप …










