पंजाब में सरकारी बसों का चक्का जाम! जालंधर के 300 कर्मचारी हड़ताल पर, 2 घंटे बसों का इंतजार करते रहे यात्री

पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब की ओर से 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने के ऐलान के बाद बुधवार को जालंधर समेत राज्य के विभिन्न बस स्टैंड पर कर्मचारियों ने रोष प्रदर्शन किया। हड़ताल के कारण सरकारी बसों का संचालन प्रभावित हुआ, जिसके चलते यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ा।

ख़बरिस्तान नेटवर्क : पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब की ओर से 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने के ऐलान के बाद बुधवार को जालंधर समेत राज्य के विभिन्न बस स्टैंड पर कर्मचारियों ने रोष प्रदर्शन किया। हड़ताल के कारण सरकारी बसों का संचालन प्रभावित हुआ, जिसके चलते यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ा।

जालंधर के दोनों डिपो के 300 कर्मचारी हड़ताल पर
कर्मचारियों की हड़ताल का असर जालंधर में सरकारी बस सेवाओं पर देखने को मिला। डिपो-1 और डिपो-2 के करीब 300 कर्मचारियों के काम बंद रखने से बसों के संचालन में बाधा आई। बस स्टैंड पर पहुंचे यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ी।

यात्रियों का कहना था कि सरकारी बसें आम लोगों के लिए परिवहन का महत्वपूर्ण साधन हैं। नौकरी, कारोबार और अन्य जरूरी कामों के लिए रोजाना इन बसों में सफर करने वाले लोगों को हड़ताल के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की मांगों का जल्द समाधान करने की अपील की, ताकि बस सेवाएं सामान्य हो सकें।

ट्रांसपोर्ट मंत्री हरपाल चीमा के साथ बैठक पर टिकी नजरें
कर्मचारी यूनियन की ओर से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी गई है। जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह 11 बजे यूनियन नेताओं की बैठक ट्रांसपोर्ट मंत्री हरपाल चीमा के साथ निर्धारित की गई थी। इस बैठक से कर्मचारियों की मांगों पर समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही थी। अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जा सकता है।

ठेकेदारी सिस्टम खत्म करने समेत तीन प्रमुख मांगें
यूनियन प्रधान के मुताबिक, कर्मचारियों का संघर्ष मुख्य रूप से तीन मांगों को लेकर चल रहा है। इनमें ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त कर आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे कॉन्ट्रैक्ट पर रखने, विभिन्न आंदोलनों के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज किए गए मामलों को रद्द करने और पनबस में सर्विस रूल बनाकर कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग शामिल है। कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से मांगें उठाने के बावजूद उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिला है।

पंजाब में 7000 कर्मचारी, ड्राइवर-कंडक्टर से लेकर क्लेरिकल स्टाफ तक शामिल
यूनियन के मुताबिक, पंजाब रोडवेज और पनबस से जुड़ी संबंधित श्रेणियों में राज्यभर में करीब 7,000 कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें ड्राइवर, कंडक्टर, वर्कशॉप स्टाफ, डाटा ऑपरेटर, क्लेरिकल स्टाफ और एडवांस बुकिंग कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों ने किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को बढ़ावा दिए जाने पर भी सवाल उठाए।

उनका आरोप है कि इस व्यवस्था से सरकारी परिवहन प्रणाली को नुकसान पहुंच रहा है। यूनियन ने सरकार से सरकारी बस सेवा और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीति बनाने की मांग की है।

हड़ताल से आम जनता परेशान, समाधान का इंतजार
सरकारी बसों की सेवाएं प्रभावित होने से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की दिनचर्या पर असर पड़ा है। बस स्टैंड पर कई लोग लंबे समय तक बसों का इंतजार करते रहे, जबकि कुछ को प्राइवेट बसों में अधिक खर्च करके यात्रा करनी पड़ी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *