ख़बरिस्तान नेटवर्क : पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर सियासी हलचल के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) को झटका लगा है। खत्री रोड़ा वेलफेयर बोर्ड के जिला चेयरमैन वरिंदर सहदेव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत अपने सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने अपने फैसले के पीछे पंजाब के मौजूदा हालात, नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की है।
झोटे की हत्या से गहरा दुख पहुंचा
वरिंदर सहदेव ने कहा कि मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परमिंदर सिंह झोटा की हत्या की घटना से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की उनकी कोई योजना नहीं है और वह अपने कारोबार पर ध्यान देंगे।
झोटा हत्याकांड से आहत होकर लिया इस्तीफे का फैसला
वरिंदर सहदेव ने कहा कि परमिंदर सिंह झोटा की हत्या की घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। नशे के खिलाफ आवाज उठाता था और उसकी हत्या के बाद पंजाब के हालात को लेकर उनकी चिंता और बढ़ गई है। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद झोटा का अंतिम संस्कार नहीं हुआ था। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने सरकार और पार्टी से जुड़े अपने पदों को छोड़ने का फैसला किया है।
पंजाब की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर उठाए सवाल
वरिंदर सहदेव ने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में आम लोगों के साथ-साथ पुलिस कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि गोलीबारी और हत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं तथा नशे की समस्या पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने की जरूरत है। पंजाब के लोग नशे से मुक्ति और सुरक्षित माहौल की उम्मीद करते हैं। उनके मुताबिक, इन मुद्दों पर गंभीरता से काम किया जाना चाहिए।
12 जुलाई 2021 को AAP में हुए थे शामिल
वरिंदर सहदेव ने बताया कि उन्होंने 12 जुलाई 2021 को आम आदमी पार्टी का दामन थामा था। अब मौजूदा हालात से नाराज होकर उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने सभी पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया है। उनका कहना है कि इस समय वह किसी दूसरी पार्टी के बारे में विचार करने की स्थिति में नहीं हैं और आने वाले दिनों में अपने कारोबार पर ध्यान देंगे।
बोले- सभी पार्टियां एक-दूसरे पर लगा रही हैं आरोप
सहदेव ने पंजाब के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त हैं, जबकि राज्य के वास्तविक मुद्दों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। फिलहाल उन्हें किसी भी राजनीतिक पार्टी में पंजाब के जरूरी मुद्दों को लेकर अपेक्षित गंभीरता नजर नहीं आ रही है। हालांकि, भविष्य में वह किसी दूसरी पार्टी से जुड़ेंगे या नहीं, इस बारे में उन्होंने कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया है।









