ख़बरिस्तान नेटवर्क : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर घुम्मन को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने घुम्मन की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले पर कोई भी अंतरिम राहत देने से साफ मना कर दिया है। कोर्ट ने आगे की कार्रवाई और निर्देशों के लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजने का आदेश दिया है।
जानें क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की जांच से जुड़ा है। ED ने जुलाई और अगस्त 2026 में पंजाब के DGP को तीन पत्र भेजकर मामले में FIR दर्ज करने की मांग की थी। ED का आरोप था कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ लोग ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी मंजूरियों, टेंडर और नीतिगत फैसलों में कथित तौर पर प्रभाव डाल रहे थे।
जांच के दौरान WhatsApp चैट और अन्य डिजिटल सबूत मिलने का भी दावा किया गया। ED ने यह भी दावा किया था कि नितिन गोहल से जुड़े ठिकानों की तलाशी के दौरान 20.98 लाख रुपये नकद और डिजिटल सामग्री बरामद हुई।
हाईकोर्ट ने CBI जांच के दिए आदेश
ED की शिकायत के बाद पंजाब पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा। 5 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने राजबीर घुम्मन के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया।कोर्ट ने ED की ओर से पेश की गई जानकारी को गंभीर मानते हुए CBI को जांच कर दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
हाईकोर्ट के आदेश के अगले ही दिन पंजाब सरकार ने CBI जांच के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सरकार ने मामले की अर्जेंट सुनवाई की मांग की, लेकिन 6 अक्टूबर को यह मांग खारिज कर दी गई। इसके बाद उसी दिन CBI ने FIR दर्ज कर चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर समेत 8 ठिकानों पर छापेमारी की।
गुरदासपुर में मुख्यमंत्री कार्यालय के पूर्व OSD डॉ. रोमी राजा महाजन के घर भी CBI टीम पहुंची। वहीं मोहाली के फेज-11 में OSD राजबीर घुम्मन के करीबी रिश्तेदार बताए जा रहे डॉ. गुरकीरपाल सिंह थिंद के घर भी तलाशी ली गई। इसके बाद CBI ने मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन समेत 6 नामजद लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है।









