ख़बरिस्तान नेटवर्क : प्रत्येक व्यक्ति प्रकाश का एक स्रोत है। जब तक हर मनुष्य अपने भीतर छिपे इस प्रकाश को नहीं पा लेता, तब तक समाज का अंधकार कभी दूर नहीं हो सकता। हमें अपने चारों ओर जागरूकता, ज्ञान और उत्सव का वातावरण निर्मित करना है, विशेषकर तब, जब लोग चिंतित या उदास होकर स्वयं को भीतर समेट चुके हों। यह इस शाश्वत ज्ञान में आनंदित होने का उपयुक्त समय है कि हमारी आत्मा अजेय है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम हर हृदय में ज्ञान और प्रेम का दीप जलाएंगे तथा हर चेहरे पर उज्ज्वल मुस्कान लाएंगे।
धनतेरस और दीपावली वह समय है जब आप संपन्नता का अनुभव करते हैं। यह परंपरा है कि हम अपनी अर्जित संपत्ति सामने रखकर उसकी प्रचुरता का अनुभव करें। जब हम अपना ध्यान प्रचुरता पर केंद्रित करते हैं, तो वह स्वतः बढ़ती है। हर किसी को संतुष्टि और संपन्नता का अनुभव करना चाहिए।
हमें इस भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए कि हमें जिस भी वस्तु की आवश्यकता है, वह पहले से ही हमारे पास है। हम जो कुछ भी चाहते हैं, वह हम तक पहुंचता रहेगा। हमें स्वयं को याद दिलाना चाहिए कि हम समृद्ध हैं। अन्यथा, यदि हम केवल अभाव के बारे में सोचेंगे, तो जीवन में अभाव ही बढ़ेगा। यह एक ऐसा उत्सव है जहां आप सबसे पहले अपनी चेतना में यह बीज बोते हैं कि ‘आप समृद्ध हैं और आपके पास प्रचुरता है।’ एक विचार के रूप में आपके भीतर की यह संपन्नता, भौतिक जीवन में भी संपन्नता बनकर प्रकट होगी।
संपन्नता का तात्पर्य सर्वांगीण संपन्नता से है। इसका अर्थ केवल भौतिक धन नहीं, बल्कि भौतिक सुख-सुविधाओं, उत्तम स्वास्थ्य, सफलता, साहस, मैत्रीपूर्ण व्यवहार, कौशल, गरिमा और अपने मूल स्रोत की स्मृति के रूप में प्राप्त होने वाला धन भी है।
यह वह पवित्र समय भी है जब हम भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं, जिन्होंने विश्व को आयुर्वेद का उपहार दिया। मानवीय चेतना के उत्थान के लिए समग्र कल्याण आवश्यक है। चिकित्सा की प्राचीन प्रणाली, आयुर्वेद हमें समग्र रूप से स्वस्थ रहने में सहायता करती है। अपने स्वास्थ्य को पुष्ट और रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। आयुर्वेद हमें स्वयं को सबल बनाए रखने के लिए जड़ी-बूटियों, रसायनों और शरीर की शुद्धि का ज्ञान प्रदान करता है।
एक शांतिपूर्ण और सुखी समाज के लिए सर्वांगीण कल्याण अनिवार्य है। वास्तव में, प्रसन्नता स्वास्थ्य का ही अंग है। जब तक लोग प्रसन्न नहीं हैं, तब तक उन्हें स्वस्थ नहीं माना जा सकता। समग्र स्वास्थ्य का अर्थ है मुस्कुराते हुए चेहरे, करुणा और अपनेपन की भावना। अपने आस-पास के सभी लोगों के साथ जुड़ाव महसूस करना। ये गुण हमारी चेतना में अंतर्निहित हैं। दीपावली वह समय है जब हम इसे पहचानते हैं और सकारात्मकता के बीज बोते हैं।
स्वयं के लिए प्रकाश बनें। योग सूत्रों में महर्षि पतंजलि कहते हैं, “मूर्धज्योतिषि सिद्धदर्शनम्।” इसका अर्थ है कि अपने भीतर के प्रकाश को पहचानते ही हम पूर्णता प्राप्त कर लेंगे। आप स्वयं एक प्रकाश हैं: इसे पहचानना, अनुभव करना और स्मरण रखना ही दीपावली का उत्सव है। इसका वास्तविक सार ज्ञान की आभा से चमकना है, ताकि हम कई अन्य लोगों के मार्ग को भी आलोकित कर सकें।
इस दीपावली हम अपने भीतर ज्ञान का दीप जलाएं, प्रसन्न व संतुष्ट रहें और इस प्रसन्नता को अपने आस-पास फैलाएं। अतीत की नकारात्मकता को विस्मृत कर, अपने आस-पास के सभी लोगों के साथ सामंजस्य स्थापित करें।









