ख़बरिस्तान नेटवर्क : फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2030 को बुधवार सुबह जयपुर डायवर्ट कर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। बताया जा रहा है कि विमान से अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को हाईजैक का सिग्नल मिला था। इसके बाद यह सूचना जयपुर ATC के साथ साझा की गई और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। शुरुआती जांच में सिस्टम की गड़बड़ी के कारण सिग्नल जनरेट होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, मामले में विस्तृत जांच के निष्कर्षों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
हाईजैक सिग्नल मिलने के बाद जयपुर डायवर्ट हुआ विमान
जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट AI-2030 को अहमदाबाद ATC की ओर से हाईजैक सिग्नल मिलने की सूचना जयपुर ATC तक पहुंचाई गई। इसके करीब 45 मिनट बाद विमान को जयपुर एयरपोर्ट पर उतारा गया। विमान के जयपुर पहुंचने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति का जायजा लिया और जांच शुरू की।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, हाईजैक का सिग्नल किसी तकनीकी या सिस्टम संबंधी गलती के कारण जनरेट हुआ हो सकता है। फिलहाल इस पहलू की जांच की जा रही है।
13 अक्टूबर की रात फ्रैंकफर्ट से भरी थी उड़ान
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के मुताबिक, विमान ने 13 अक्टूबर की रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से उड़ान भरी थी। इसे 14 अक्टूबर की सुबह 10:40 बजे दिल्ली पहुंचना था। हालांकि, हाईजैक सिग्नल की सूचना के बाद विमान को निर्धारित गंतव्य के बजाय जयपुर डायवर्ट कर दिया गया।
क्या होता है हाईजैक सिग्नल कोड 7500?
विमानन क्षेत्र में ट्रांसपोंडर कोड 7500 का इस्तेमाल विमान के अपहरण या गैरकानूनी कब्जे की स्थिति का संकेत देने के लिए किया जाता है। ऐसे सिग्नल मिलने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो जाती हैं और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार कार्रवाई करती हैं।
हालांकि, किसी विमान से हाईजैक सिग्नल मिलने का अर्थ अपने आप यह नहीं होता कि विमान का वास्तव में अपहरण हो गया है। ऐसे मामलों में परिस्थितियों और तकनीकी जानकारी की जांच जरूरी होती है।
30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान से भी मिला था हाईजैक सिग्नल
30 सितंबर को इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की एक उड़ान से भी हाईजैक सिग्नल कोड 7500 भेजे जाने का मामला सामने आया था। उस घटना में भारतीय को-पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका का जिक्र किया गया था, जिन्होंने कथित तौर पर विमान को हाईजैक करने और क्रैश कराने की कोशिश को रोकने में मदद की थी।









