ख़बरिस्तान नेटवर्क : मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में इंसाफ की मांग को लेकर चल रहा धरना एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब गांव भम्मे कलां के रहने वाले दलजीत की मौत के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई है। परिवार ने दलजीत की मौत को नशे के ओवरडोज से जोड़ते हुए उसका शव झोटा के इंसाफ के लिए लगाए गए धरने में पहुंचा दिया। इस दौरान पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई।
दलजीत की मौत के बाद धरनास्थल पर पहुंचा परिवार
जानकारी के मुताबिक, दलजीत की 27 अक्टूबर को मानसा के गांव भम्मे कलां में मौत हो गई थी। परिवार का आरोप है कि उसकी मौत नशे के ओवरडोज के कारण हुई। इसके बाद परिजन दलजीत का शव लेकर परविंदर सिंह झोटा के इंसाफ के लिए चल रहे धरने में पहुंच गए। यहां शव को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों में झड़प की स्थिति बन गई।
परिवार का आरोप, पोस्टमॉर्टम के लिए बनाया जा रहा दबाव
दलजीत के परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस उन पर जबरदस्ती पोस्टमॉर्टम करवाने का दबाव बना रही है। फिलहाल दलजीत का शव बठिंडा स्थित एम्स में रखा गया है। परिवार के आरोपों और पोस्टमॉर्टम को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच मामले ने तूल पकड़ लिया है।
14 दिन बाद भी परविंदर झोटा का पोस्टमॉर्टम नहीं
दूसरी ओर, परविंदर सिंह झोटा की मौत के मामले में भी पोस्टमॉर्टम का इंतजार जारी है। घटना को 14 दिन बीत जाने के बावजूद उनका पोस्टमॉर्टम नहीं हो पाया है। झोटा के परिवार और इंसाफ कमेटी की ओर से लगातार न्याय की मांग की जा रही है। दलजीत की मौत के बाद इस मामले को लेकर चल रहे धरने पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
पिता भीम सिंह की लोगों से धरने में पहुंचने की अपील
परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में मानसा पहुंचकर इंसाफ कमेटी के धरने में शामिल हों। परिवार की मांग है कि झोटा को न्याय मिले। वहीं, दलजीत की मौत और उसके शव को लेकर हुए विवाद ने मानसा में नशे के मुद्दे तथा पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।









