यूरोप के 6 देशों में भड़का गुस्सा! फ्रांस में आगजनी-लूटपाट, इटली में छात्रों ने स्कूलों पर किया कब्जा

यूरोप के छह देशों में शिक्षा पर बढ़ते खर्च, बेरोजगारी और आसमान छूते मकानों के किराए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। फ्रांस, इटली, स्पेन और ग्रीस समेत कई देशों में छात्र और युवा सड़कों पर उतरकर सरकारों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं और आम लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराया जाए।

ख़बरिस्तान नेटवर्क : यूरोप के छह देशों में शिक्षा पर बढ़ते खर्च, बेरोजगारी और आसमान छूते मकानों के किराए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। फ्रांस, इटली, स्पेन और ग्रीस समेत कई देशों में छात्र और युवा सड़कों पर उतरकर सरकारों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं और आम लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराया जाए।

कई जगहों पर आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। फ्रांस में दुकानों में लूटपाट और सरकारी इमारतों में आगजनी की घटनाएं सामने आईं। वहीं, इटली में छात्रों ने स्कूलों पर कब्जा किया, जबकि ग्रीस में छात्र संसद के सामने टेंट लगाकर विरोध जता रहे हैं। बेल्जियम और अल्बानिया में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा और गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं।

फ्रांस में 140 शहरों में प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़
फ्रांस में 17 अक्टूबर को स्कूलों की खराब स्थिति, शिक्षकों की कमी और बढ़ती महंगाई के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। करीब 140 शहरों में आयोजित इन प्रदर्शनों में लगभग 8 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। छात्र संगठनों के साथ ट्रेड यूनियनों और विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारियों ने भी आंदोलन में हिस्सा लिया।

पेरिस, मार्सेई और बोर्डो सहित कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं। लीमोज शहर में 143 साल पुराने ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगा दी गई। इसके अलावा कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया।

1,800 गिरफ्तारियों की खबर, 500 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी घायल
18 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के अनुसार, फ्रांस में प्रदर्शन के सिलसिले में करीब 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, 500 से अधिक पुलिसकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों और दमकलकर्मियों के घायल होने की खबर है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा की है। सरकार का कहना है कि कुछ हिंसक समूहों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का फायदा उठाकर तोड़फोड़ और आगजनी की।

इटली में छात्रों का स्कूलों पर कब्जा, 30 अक्टूबर को हड़ताल का ऐलान
इटली में शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों का विरोध लगातार बढ़ रहा है। छात्र शिक्षा पर सरकारी खर्च में कमी, जर्जर स्कूलों और पढ़ाई के बढ़ते खर्च के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। रोम और ट्यूरिन सहित कई शहरों में छात्रों ने स्कूलों पर कब्जा कर लिया है। 16 अक्टूबर को रोम में हजारों छात्र शिक्षा मंत्रालय की ओर मार्च करते हुए पहुंचे।

उन्होंने शिक्षा मंत्री ग्यूसेपे वाल्दितारा के फैसलों के खिलाफ नाराजगी जताई। इससे पहले हुए प्रदर्शनों में पुलिस के साथ झड़प और पथराव की घटनाएं भी सामने आई थीं।अब छात्र संगठन अपने आंदोलन में कर्मचारियों को भी शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने 30 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल करने का ऐलान किया है। उनकी प्रमुख मांगों में शिक्षा का बजट बढ़ाना, स्कूलों की स्थिति सुधारना और छात्रों के लिए सस्ते हॉस्टल उपलब्ध कराना शामिल है।

स्पेन में महंगे मकानों और किराए के खिलाफ आंदोलन तेज
स्पेन में आवास संकट को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। मकानों की बढ़ती कीमतों और महंगे किराए के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन कई शहरों तक फैल चुका है। राजधानी मैड्रिड के सोल चौक पर प्रदर्शनकारी कई दिनों से टेंट लगाकर विरोध कर रहे हैं।

आंदोलन को उस समय और समर्थन मिला, जब सितंबर के आखिर में 87 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला को किराया बढ़ने के कारण घर से निकाल दिया गया। इस घटना के बाद आवास संकट और किरायेदारों के अधिकारों का मुद्दा चर्चा में आ गया।

प्रदर्शनकारी किराए पर नियंत्रण लगाने, लोगों को घरों से बेदखल करने पर रोक लगाने और किफायती सरकारी मकान बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते किराए के कारण आम परिवारों और युवाओं के लिए घर लेना मुश्किल होता जा रहा है।

ग्रीस में संसद के सामने टेंट लगाकर बैठे छात्र
ग्रीस की राजधानी एथेंस में छात्रों ने हॉस्टल की कमी, महंगे किराए और शिक्षा पर बढ़ते खर्च के खिलाफ संसद के सामने टेंट लगाकर प्रदर्शन शुरू किया है। छात्र संगठनों का कहना है कि देश में बहुत कम छात्रों को हॉस्टल की सुविधा मिल पाती है, जिसके कारण उन्हें निजी कमरों के लिए भारी किराया चुकाना पड़ता है।

छात्र संगठनों के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत छात्रों को हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलती। वहीं, पिछले 10 वर्षों में कमरों का किराया तीन गुना हो चुका है। कुछ छोटे कमरों का मासिक किराया 600 यूरो तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी किराए की अधिकतम सीमा तय करने, सरकारी हॉस्टल बनाने, छात्रवृत्ति बढ़ाने और विश्वविद्यालयों का बजट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व छात्र संगठन कर रहे हैं।

बेल्जियम और अल्बानिया में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा
यूरोप में बढ़ती आर्थिक और सामाजिक परेशानियों के खिलाफ आंदोलन केवल फ्रांस, इटली, स्पेन और ग्रीस तक सीमित नहीं है। बेल्जियम और अल्बानिया में भी विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा और गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं। इन प्रदर्शनों के पीछे शिक्षा की बढ़ती लागत, बेरोजगारी, महंगाई और किफायती आवास की कमी जैसे मुद्दे प्रमुख बताए जा रहे हैं। युवाओं की नाराजगी अब सड़कों पर दिखाई देने लगी है और कई देशों में सरकारों पर इन समस्याओं के समाधान के लिए दबाव बढ़ रहा है।

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