‘जज साहब, मुझे बख्श दो… मेरे भी दो बच्चे हैं’ दिलरोज हत्याकांड में नीलम की फांसी पर हाईकोर्ट का फैसला

लुधियाना के बहुचर्चित दिलरोज हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी नीलम (38) की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है।

ख़बरिस्तान नेटवर्क : लुधियाना के बहुचर्चित दिलरोज हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी नीलम (38) की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। शिमलापुरी में ढाई साल की मासूम दिलरोज कौर को गड्ढे में जिंदा दफन करने के मामले में सेशन कोर्ट ने करीब 2 साल पहले नीलम को फांसी की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक नीलम को कम से कम 30 साल जेल में रहना होगा। इस अवधि के दौरान उसे किसी तरह की कानूनी छूट या पैरोल का लाभ नहीं मिलेगा।

बच्चों के खिलौनों और तोहफों को लेकर पैदा हुई थी रंजिश
मामले के मुताबिक, शिमलापुरी इलाके में पंजाब पुलिस के हेड कांस्टेबल हरप्रीत सिंह अपनी पत्नी और ढाई साल की बेटी दिलरोज कौर के साथ रहते थे। उनके पड़ोस में 38 वर्षीय तलाकशुदा नीलम अपने दो बेटों के साथ रहती थी। बच्चों को लेकर दोनों परिवारों के बीच अक्सर छोटी-मोटी कहासुनी होती थी।

हरप्रीत सिंह अपनी बेटी और बच्चों के लिए नए कपड़े, खिलौने और अन्य सामान लेकर आते थे। नीलम के बच्चे भी ऐसी चीजों की मांग करते थे, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण वह उनकी मांगें पूरी नहीं कर पाती थी। अभियोजन के मुताबिक, इसी वजह से उसके मन में पड़ोसी परिवार के प्रति रंजिश पैदा हुई।

बच्ची को एक्टिवा पर बैठाकर सुनसान प्लॉट में ले गई
वारदात 28 नवंबर 2021 की है। उस दिन दिलरोज घर के बाहर खेल रही थी। आरोप है कि नीलम ने उसे अपने साथ लिया और एक्टिवा पर आगे बैठाकर एल्डिको के पास एक सुनसान प्लॉट में ले गई। पुलिस जांच में सामने आया कि वहां पहले से एक गड्ढा खोदा गया था। नीलम ने बच्ची के मुंह में मिट्टी भर दी और उसे गड्ढे में डालकर ऊपर से मिट्टी डाल दी। जिंदा दफन होने के कारण बच्ची की मौत हो गई।

बच्ची की तलाश का करती रही नाटक, CCTV से खुला राज
वारदात के बाद नीलम अपने घर लौट आई। जब परिवार ने दिलरोज की तलाश शुरू की तो वह भी उनके साथ बच्ची को खोजने का दिखावा करने लगी। इसी दौरान पुलिस ने इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में नीलम बच्ची को एक्टिवा पर बैठाकर ले जाती हुई दिखाई दी।

पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद उसने बच्ची को दफनाने की बात कबूल की। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने गड्ढा खोदकर बच्ची को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले में पुलिस ने हत्या, अपहरण और साक्ष्य मिटाने से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।

सेशन कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा
मामले की सुनवाई के दौरान सेशन कोर्ट ने उपलब्ध गवाहियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर नीलम को दोषी करार दिया था। करीब दो साल पहले अदालत ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई थी।

फैसला सुनाए जाने के बाद नीलम अदालत में रो पड़ी थी और जज से रहम की गुहार लगाते हुए कहा था, “जज साहब, प्लीज मुझे बख्श दो, मेरे भी दो छोटे बच्चे हैं।” इसके बाद उसने सेशन कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है।

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