यूके शिक्षा विभाग रिपोर्ट: मास्क पहनने की वजह से स्कूल के बच्चों को सुनने और बोलने की समझ में पड़ रहा प्रभाव



विडियो के माध्यम से देखा गया मास्क का असर

खबरिस्तान नेटवर्क: जब से कोरोना काल शुरू हुआ है तब हर किसी को हिदायत दी जाती है कि भीडभाड वाले इलाके में जाने से पहले या फिर घर से निकलने से पहले मस्क पहन कर ही निकलें। ये हमारी सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है। वहीँ  मास्क न पहनने पर जुर्माने का प्रावधान भी है। जबकि कई देशों में लोगों को मास्क से छुटकारा मिल गया है। हालांकि यही मास्क बच्चों के सुनने और बोलने की समझ पर भी प्रभाव डाल रहा है, ये खुलासा यूके शिक्षा विभाग की नई रिपोर्ट से किया गया है। तो आईए आपको बताते हैं कि किस तरह से ये मास्क बच्चों के जीवन पर प्रभाव डाल रहा है।

किस तरह की स्टडी


बता दें अब कई सार्वजनिक जगहों पर मास्क की जरूरत नहीं है। हालांकि कोरोना संक्रमण अभी दुनिया से पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है इसलिए सुरक्षा के लिहाज से लोग मास्क लगाते हैं। खास कर लंबे अरसे के बाद स्कूल जाने वाले बच्चों को अब भी मास्क लगाना अनिवार्य है। स्कूलों में जारी की गई गाइडलाइन के मुताबिक मास्क कोविड संक्रमण फैलने से बचने के लिए है लेकिन ये मास्क कैसे बच्चों के बोलने और समझने के तरीकों को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। ये जानने की कोशिश के लिए कुछ बच्चों और उम्र में उनसे बड़े लोगों को एक साथ क्लास में बिठाया गया। इनमें सभी बच्चे ढंग से सुन सकते थे और बोलने में भी कोई दिक्कत नहीं थी। अब इन बच्चों और बाकि लोगों को कुछ वीडियो दिखाई गई। वीडियो में स्पीकर मास्क पहन कर बोल रहा था। वीडियो में बोले गए आखिरी शब्दों और लाइनों को बच्चों को दोहराने के लिए कहा गया। जैसे ही बच्चों ने जवाब दिया तो सब कुछ साफ हो गया। क्लास में मौजूद बाकि लोगों से भी ऐसा ही करने के लिए कहा गया था।

फिर सबको एक और वीडियो दिखाई गई जिसमें स्पीकर ने मास्क नहीं पहना हुआ था। हालांकि इसमें जो स्पीकर की आवाज थी वो उसी वीडियो से निकाली गई थी जिसमें उसने मास्क पहना था। इससे ये पता लग गया कि बच्चों को मास्क पहने हुए स्पीकर की बातें कम समझ आई जबकि बिना मास्क वाले स्पीकर की वीडियो जो भी आवाज आई वो बच्चों ने सही तरीके से सुनी।

मास्क के प्रभाव को देखा गया  

रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक बच्चों ने बिना मास्क के स्पीच देने वाले स्पीकर की स्पीच को सही तरीके से सुना जबकि मास्क पहने हुए स्पीकर की स्पीच को सही तरीके से नहीं सुना। क्लास में मौजूद बाकि लोगों के साथ भी यही हुआ। बच्चों के अलावा बाकी लोगों को फिर भी स्पीच सुनने में आसानी हुई लेकिन मास्क वाले स्पीकर की और बिना मास्क वाले स्पीकर की स्पीच को समझने की स्पीड फिर भी कम रही। ये अंतर साफ तौर पर बताता है कि मास्क स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सीखने की स्पीड को कम कर रहा है।

मास्क के कारण बच्चों को सुनने और समझने में दिक्कत

रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि मास्क का प्रभाव न के बराबर होगा अगर किसी को पता है कि स्पीकर क्या बोलने वाला है। हालांकि बच्चे ये बड़ों के मुकाबले ज्यादा नहीं समझ पाते कि सामने वाला व्यक्ति क्या बोलने वाला है इसलिए मास्क उनके जीवन पर और उनकी समझने की शक्ति पर ज्यादा असर डाल रहा है।

 

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