कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला जूडो खिलाड़ी सुशीला देवी ने सिल्वर मेडल किया अपने नाम, जाने कौन है



सुशीला ने हार न मानते हुए 2018 और 2019 में हॉन्गकॉन्ग ओपन में लगातार 2 सिल्वर मेडल अपने नाम किये

खबरिस्तान नेटवर्क: भारत की सुशीला देवी (Sushila Devi) ने इतिहास रच भारत का नाम रोशन कर दिय है इस महिला जूडो खिलाड़ी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में (Commonwealth Games 2022) 48 किग्रा वेट कैटेगरी में सिल्वर मेडल अपने नाम किया हैफाइनल में सुशीला दक्षिण अफ्रीका की मिचेला व्हाइटबोई से हार गयी। बता दें भारत को मौजूदा गेम्स में अब तक 8 मेडल मिल चुके हैं इसमें 3 गोल्ड मेडल भी शामिल हैं इसके अलावा 3 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल भी मिला है इससे पहले सभी 6 मेडल वेटलिफ्टिंग से आए थे अब 2 मेडल जूडो से भी आ गये हैं

पहले भी जीत चुकी हैं मेडल

27 साल की सुशीला ने 2014 में ग्लास्गो कॉमनेवल्थ गेम्स में भी सिल्वर मेडल अपने नाम किया था यानी यह उनका ओवरऑल दूसरा मेडल है। बता दें सुशीला चोट के कारण लंबे समय तक परेशानी रहीं और उन्होंने 2018 में खेल छोड़ने तक का मन बना लिया था 2018 में हैमस्ट्रिंग की चोट की वजह से वे लगभग 7 महीने तक खेल से बाहर रही थीं इतना ही नहीं वे एशियन गेम्स के ट्रायल में भी हार गयी थीं तब उन्होंने कहा था कि मैं टूट गई थी मुझे लगा कि मेरा जूडो करियर खत्म हो चूका है एशियन खेलों के माध्यम से मैं ओलंपिक की तैयारी करना चाहती थी हार के बाद मेरा दिल टूट गया था और 3 महीने के लिए ब्रेक के लिए घर वापस चली गई

हार न मान मेडल किये अपने नाम


सुशीला ने हार न मानते हुए 2018 और 2019 में हॉन्गकॉन्ग ओपन में लगातार 2 सिल्वर मेडल अपने नाम किये ओलंपिक की तैयारी के लिए उन्हें कठिनाईयों से गुजरना पड़ा टूर्नामेंट के खर्चों को पूरा करने के उन्हें अपनी कार तक को बेचना पड़ गया था तब उन्होंने कहा था कि मैंने जूडो के लिए सबकुछ दांव पर लगा दिया है मेरे पास कुछ नहीं बचा है इसके बाद वे टोक्यो ओलंपिक में क्वालिफाई करने में सफल रही थीं हालांकि वे मेडल नहीं जीत सकी थीं

खून में ही है जूडो

सुशीला देवी का परिवार पहले से जूडो से जुड़ा रहा है वे दिग्गज बॉक्सर एमसी मैरीकॉम को अपना आदर्श मानती आई हैं उनके अंकल डिनिक सिंह इंटरनेशनल जूडो खिलाड़ी रह चुके हैं बाद में वे रेफरी बन कर सामने आयेउन्हें देखकर सुशीला के भाई शिलाक्षी सिंह खेल में आए भाई को देखा कर सुशीला कहां रूकने वाली थीं बाद में अपने खेल के दम पर वे साई सेंटर के बाद पटियाला तक पहुंचीं उन्होंने 2019 में साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल से अपने परिवार की शान बड़ाई

 

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