आज की रोजमर्रा जिंदगी के लिए क्यों जरूरी है पैंटी लाइनर, पढ़ें पूरी खबर



आपने कई बार पैंटी लाइनर का नाम सुना होगा, लेकिन शायद इसके बारे में पूरी जानकारी ना ली हो। तो चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में फुल डिटेल

वेब ख़बरिस्तान। महिलाओं के लिए वेजाइनल डिस्चार्ज का होना कोई शर्म की बात नहीं है। लेकिन कई बार ये बहुत ज्यादा होने लगता है और पैंटी को खराब भी कर देता है। अब ऐसे में हमेशा तो पैड लगाकर घूमा नहीं जा सकता और कई बार ये डिस्चार्ज इतना खराब होता है कि आपको हमेशा गीलापन महसूस करवाता है। ऐसे में पैंटी लाइनर की हेल्प ले सकते हैं। आईये जान लेते है कि आखिर ये पैंटी लाइनर किस तरीके से हमारी हेल्प कर सकता है।  

क्या होता है पैंटी लाइनर?

पैंटी लाइनर आपके सैनिटरी पैड की तरह ही होते हैं। लेकिन ये थोड़े  पतले, छोटे और कम सोखने की क्षमता वाले होते हैं। पैंटी लाइनर का इस्तेमाल उन दिनों में किया जाता है, जब आपका पीरियड न हो, जब आपको वेजाइनल डिस्चार्ज और/या स्पॉटिंग हो सकती है। हालांकि, पीरियड के दिनों में हैवी और ज्यादा सोखने की क्षमता वाले पैड्स यूज़ होते हैं। आपको बता दें वेजाइनल डिस्चार्ज पूरी तरह से नेचुरल प्रोसेस  है और आपकी वेजाइना के लिए महत्वपूर्ण है। वहीँ ज़्यादा डिस्चार्ज से आपकी पैंटी पर दाग लग सकता है और आपको गीला और बुरा महसूस करा सकता है। तो ऐसे टाइम पर सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है और तभी पैंटी-लाइनर काम आता है। यह किसी भी तरह की स्पॉटिंग होने से रोक सकता है और आपको साफ-सुथरा और तरोताज़ा महसूस करने में मदद करता है।

पैंटी लाइनर सैनिटरी पैड से होते हैं अलग


आपको बता दें, पैंटी लाइनर का इस्तेमाल सैनिटरी नैपकिन की तरह ही होता है,  लेकिन वे सैनिटरी पैड से बिलकुल अलग होते हैं। पैंटी लाइनर पतले और बहुत कम सोखते हैं। सैनिटरी नैपकिन को इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है कि उनमें इतनी क्षमता होती है कि वे आपके पीरियड के दिनों में बहुत ज़्यादा फ्लो को भी सोख सकते हैं। दूसरी ओर पैंटी लाइनर हल्के वेजाइनल डिस्चार्ज और बहुत हल्के पीरियड ब्लड फ्लो को सोखने के हिसाब से बनाये जाते हैं।

पैंटी लाइनर के बेनेफिट्स

पैंटी लाइनर्स का यूज़ हमें बहुत से फायदें देता है। जैसे की अगर आप मेंस्ट्रुअल साइकिल की स्टेज से गुज़र रही हैं, उसके आधार पर, आप वेजाइनल डिस्चार्ज का अनुभव करती हैं, जिससे लंबे समय तक गीलापन और परेशानी महसूस होती है। तो ऐसे स्थिति में पैंटी लाइनर इस नमी को सोख लेता हैं। वहीँ छींकने, खाँसने, हंसने या भारी कसरत जैसे दौड़ना, रस्सी कूदना या जंपिंग जैक से स्ट्रेस के कारण इन्वॉलंटरी यूरिनेशन हो सकता है, जिसमें ब्लैडर पर अचानक से दबाव पड़ने पर हल्की सी यूरिन अपने आप लीक हो सकती है। स्ट्रेस के कारण इन्वॉलंटरी यूरिनेशन एक बहुत ही सामान्य घटना है और पैंटी लाइनर हल्की पैडिंग के तौर पर काम करते हैं जो इस तरह के हल्के लीकेज को भी सोख लेते हैं। आपके पीरियड के आखिरी कुछ दिनों में जब आपको कम ब्लीडिंग होती है और सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं होती, तो पैंटी लाइनर आपके कम फ्लो को सोखकर स्टेनिंग से बचाता है। वहीँ अगर आपके पीरियड्स अनियमित है, और समय पर नहीं आते हैं। तो ऐसे में अचानक पीरियड्स के आ जाने पर होने वाली परेशानी से बचने के लिए पैंटी लाइनर्स फायदेमंद है। सफर के दौरान पैंटी लाइनर्स साथ रखने से आपको अपने अंडरगारमेंट्स को साफ रखने में मदद मिलेगी, खासकर जब आप उन्हें बार-बार धो नहीं सकती।

पैंटी लाइनर के क्या नुकसान हो सकते हैं?

सैनिटरी नैपकिन और टैम्पॉन की तरह ही,कुछ घंटों में पैंटी लाइनर बदल लेना चाहिए, हर 3-5 घंटे में इन्हें बदलना अच्छा रहता है। यह इंफेक्शन के जोखिम को कम करता है। सोते समय पैंटी लाइनर लगाकर नहीं सोना चाहिए। ऐसा नहीं है कि ये आरामदायक नहीं होते हैं, बल्कि अच्छी क्वालिटी के पैंटी लाइनर तो महसूस भी नहीं होते हैं। लेकिन, यह आपकी त्वचा को ठीक से साँस नहीं लेने देते हैं।

पैंटी लाइनर का इस्तेमाल कैसे करें?

पैंटी लाइनर्स का इस्तेमाल करना सैनिटरी नैपकिन के इस्तेमाल जितना ही आसान है। बस पीछे लगी पट्टी को हटा दें ताकि नीचे वाला चिपकने वाला हिस्सा खुल जाए और फिर पैंटी लाइनर को मज़बूती से चिपका दें। और यह हो गया! आमतौर पर हर 3-5 घंटे में या अगर पैंटी लाइनर गीला महसूस होने लगे तो उसे बदल दें। ध्यान रखें कि इस्तेमाल किए गए पैंटी लाइनर को कूड़ेदान में फेंक दें और उन्हें फ्लश न करें क्योंकि वे टॉयलेट में फंस सकते हैं।

क्या एक ही तरह के आते हैं पैंटी लाइनर?

नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है, पैंटी लाइनर आपकी सुविधा के हिसाब से मिल सकते हैं। आपको अलग-अलग ऑप्शन, शेप, साइज आदि में उपलब्ध हो जाएंगे। ये कॉम्पैक्ट होते हैं और कुछ तो ऐसे भी होते हैं जो थॉन्ग जैसी पैंटी के अंदर फिट हो जाते हैं। वहीँ कुछ डिजाइन्स ऐसे भी होते हैं जिनमें विंग्स लगे होते हैं और अंडरवियर के अंदर फिट होने लायक होते हैं।

इस खबर में दी गयी जानकारी आपको जागरूकता मात्र जके लिए दी गयी है। इसे अमल में लेन से पहले एक बार अपने सम्बंधित डॉक्टर से सलाह जरूर कर लें।

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