आजकल क्यों बढ़ रहे मिसकैरेज के मामले, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव



अधिकतर मामलों में भ्रूण में असामान्य क्रोमोजोम्स पाया जाना गर्भपात का कारण होता है

खबरिस्तान नेटवर्क। बॉलीवुड की ड्रामा क्वीन राखी सावंत ने हाल ही में खुलासा किया कि वह प्रेग्नेंट थी, लेकिन उनका दर्दनाक मिसकैरेज हो गया। उन्होंने बिग बॉस मराठी के दौरान अपनी प्रेग्नेंसी का ऐलान किया था। लेकिन उस समय उन्हें किसी ने सीरियसली नहीं लिया। हालांकि, अब राखी सावंत ने मीडिया से बात करते हुए खुलासा किया कि उनका मिसकैरेज हो गया है। ऐसे में सवाल यह है कि मिसकैरेज किन कारणों से होता है, इसके लक्षण क्या है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है? आइए आज हम आपको बताते हैं...

क्या होता है मिसकैरेज

गर्भपात या मिसकैरेज 20 सप्ताह के गर्भ से पहले गर्भावस्था का नुकसान है। अधिकांश गर्भपात प्रेगनेंसी के फर्स्ट ट्राइमेस्टर में होते हैं। साधारण भाषा में समझा जाए, तो जब बच्चा गर्भ में ठहर नहीं पाता है तो इसे मिसकैरेज कहते हैं। नेशनल हेल्थ सर्विस के अनुसार ज्यादातर मामले में भ्रूण में असामान्य क्रोमोजोम्स पाया जाना गर्भपात का कारण होता है। जब भ्रूण में बहुत कम या बहुत ज्यादा क्रोमोजोम्स पाए जाते हैं तो मिसकैरेज के चांसेस सबसे ज्यादा होते हैं। इसके अलावा भ्रूण में खून और पोषक तत्वों की कमी, कमजोर गर्भाशय, इंफेक्शन, सेक्सुअल ट्रांसमिशन डिजीज ,पीसीओएस या कई बार फूड प्वाइजनिंग के कारण भी मिसकैरेज हो सकता है।

ऐज फैक्टर

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मिसकैरेज के मामले सबसे ज्यादा 40 साल से ज्यादा की महिलाओं में देखे जाते हैं। कई बार तो महिलाओं का मिसकैरेज उन्हें प्रेगनेंसी का पता चलने से पहले ही हो जाता है। बढ़ती उम्र महिलाओं के मिसकैरेज का एक कारण हो सकती है। 30 साल की उम्र में 10 में से एक महिला का मिसकैरेज होता है, जबकि 45 साल या उससे ज्यादा की उम्र में 10 से 5 महिलाएं मिसकैरेज का शिकार हो जाती है।

दर्द निवारक दवाइयों का सेवन करना

प्रेगनेंसी के दौरान कई बार दर्द निवारक दवाई जैसे- इबुप्रोफेन या नेप्रोक्सेन आदि का इस्तेमाल करना भी हानिकारक हो सकता है और यह भ्रूण के विकास पर असर डालता है और गर्भपात का कारण बनता है।

हार्मोन की कमी

गर्भ में पल रहे बच्चे की विकास के लिए हार्मोन का बैलेंस होना बहुत ज्यादा जरूरी होता है। कई बार हार्मोन इंबैलेंस हो जाने के कारण गर्भपात हो सकता है। खासकर जो महिलाएं पीसीओडी या पीसीओएस की समस्या से परेशान रहती हैं उन्हें इसका सबसे ज्यादा खतरा रहता है।

नशीले पदार्थ का सेवन करना


प्रेगनेंसी के दौरान अगर जानबूझकर या गलती से महिलाएं धूम्रपान, शराब या किसी भी नशीली चीज का सेवन कर लेती हैं, तो इससे मिसकैरेज होने के चांसेस बढ़ जाते हैं।

गर्भपात होने के लक्षण

मिसकैरेज होने का सबसे पहला लक्षण है ब्लीडिंग। यह कम या ज्यादा हो सकती है। वैसे तो प्रेगनेंसी के 3 महीने में ब्लीडिंग या स्पॉट होना सामान्य बात है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक रहती है तो आपको डॉक्टर से परामर्श लेने की जरूरत है।

पेट के निचले हिस्से में दर्द या ऐंठन महसूस करना और लंबे समय तक इसे बने रहना मिसकैरेज होने का संकेत हो सकता है।

महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से फ्लूड जैसा डिस्चार्ज होना या टिशू का निकलना या खून के थक्के निकलना यह मिसकैरेज होने की वार्निंग हो सकती है।

मिसकैरेज से बचने के लिए यह सावधानी बरतें

अगर आप मिसकैरेज के खतरे से बचना चाहते हैं तो प्रेगनेंसी से पहले आप मेंटली और फिजिकली फिट रहें। यह आपकी हेल्दी प्रेगनेंसी में मददगार होता है।

प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी प्रकार की दवा का सेवन डॉक्टर से पूछे बिना नहीं करें, क्योंकि कई बार अवैध दवाइयों का सेवन करने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

अगर आप पहले से ही किसी बीमारी जैसे- डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, थायराइड से ग्रसित है तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान खास ख्याल रखने की जरूरत है।

डॉक्टर के कहने पर आप प्रेगनेंसी के दौरान विटामिन और फोलिक एसिड की दवाइयां जरूर लें। यह भ्रूण के विकास में मदद करता है, साथ ही आपको ताकत भी देता है।

अगर एक बार आपका मिसकैरेज हो चुका है तो दूसरी बार गर्भधारण करने से पहले अपने गाइनेकोलॉजिस्ट से जरूर संपर्क करें और उसकी सलाह पर कुछ समय के बाद ही दूसरी प्रेगनेंसी का ट्राई करें।

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