प्रेगनेंसी में खुजली होने के अलग अलग कारण हैं, जानें किस तरह पा सकते हैं आराम



प्रेग्नेंसी के दौरान स्किन में कई तरह के बदलाव दिखते हैं। ये सभी बदलाव हमारी स्किन को ज्यादा इरिटेटिंग और खुजली वाला बना देते हैं।

खब्रिस्तान नेटवर्क। प्रेगनेंसी हर महिला के जीवन में बहुत से  बदलावों को जन्म देता है। इसके साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान शरीर के सभी हिस्सों में बदलाव का अनुभव महिलाएं करती हैं। ऐसा ही एक बदलाव त्‍वचा पर खुजली होना है। यह स्किन के लिए असामान्य नहीं है, खासतौर पर प्रेग्‍नेंसी के दौरान पेट के आसपास खुजली होना। कभी-कभी हाथ और पैर में भी खुजली होती है खुजली किसी व्यक्ति को कम तो किसी को ज्यादा हो सकती है। कभी-कभी खुजली इतनी गंभीर हो सकती है कि नींद भी खराब होने लगती है

प्रेग्‍नेंसी के दौरान स्किन पर खुजली के क्या है कारण

इस समय शरीर पर बहुत से बदलाव होते हैं, जो बहुत बार महिलाओं को चिडचिडा भी बना देते हैं. आइये जानते हैं कारण

हार्मोनल बदलाव

प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोन्स में काफी उतार-चढ़ाव होते हैं जिसको टाला नहीं जा सकता है। हार्मोन्स के स्तर में तुरंत बदलाव होने से प्रेग्नेंसी के दौरान स्किन में परेशानियां उत्पन्न होती हैं जिनका नतीजा जलन और खुजली है। इसी के साथ, ये हार्मोनल एक्शन्स इम्यून सिस्टम को स्किन इरिटेशन के लिए प्रतिक्रिया देने के लिए एक्टिव करता है और फिर खुजली होनी शुरू हो जाती है।  

पेट पर स्‍ट्रेचिंग

बढ़ता हुआ फीटस पेट के आस-पास की स्किन को स्ट्रेच कर देता है। स्किन में इस बदलाव की वजह से भी खुजली होना शुरू हो जाता है

सेंसिटिव नर्व्स


आपकी नर्व्स हार्मोनल एक्शन के कारण सेंसिटिव हो जाती हैं। छोटे से छोटा बदलाव भी किसी तरह के रिएक्शन को ट्रिगर कर सकता है जिससे नर्व्स सेंसिटिव हो जाएं।

कोलेस्टेसिस

जब प्रेग्‍नेंसी के दौरान पित्त रस का फ्लो बाधित होता है तो पित्त एसिड शरीर के भीतर बनाना शुरू करता है। बढ़ा हुआ पित्त लीवर एंजाइमों को खुजली का कारण बनाता है। बढ़ा हुआ पित्त लिवर के एन्जाइम्स को भी बदलता है जिससे खुजली होती है। हालांकि, ये खुजली अन्य तरह की खुजली से अलग होती है। कोलेस्टेसिस असल में एक तरह का लिवर डैमेज है जो प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में बच्चे पर भी असर डाल सकता है। जितना पित्त जमा हो गया है उसी हिसाब से खुजली की तीव्रता भी बढ़ जाती है। इस वजह से डिलीवरी का खतरा भी बढ़ जाता है।

स्किन की कंडीशन

अगर खुजली किसी दाने या रैश के साथ होती है तो यह स्किन की कंडीशन्‍स के कारण हो सकती है जो विशिष्ट रूप से प्रेग्‍नेंसी में होती हैं।

इसके इलाज के लिए क्या करें  

आमतौर पर खुजली को कुछ कंजर्वेटिव मैनेजमेंट तरीकों से मैनेज किया जाता है, लेकिन अगर कोलेस्टेसिस है तो ऐसा नहीं होगा। खुजली को कम करने के लिए इन टिप्स को आजमाएं- 

स्किन को स्‍मूथ और कोमल रखने के लिए रेगुरल मॉइश्चराइज करें। ड्राईनेस के कारण स्किन के रूखेपन को रोकने के लिए खुद को हाइड्रेटेड रखें। इसके लिए पानी का सेवन समय से करते रहें पैरों और हाथों की मसाज भी करनी चाहिए इससे खुजली को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही अपने हाथों और पैरों पर दिन में कई बार आइस पैक लगाएं। यह खुजली को कम करने में मदद करता है। कैलामाइन लोशन जैसी ओवर द काउंटर दवा कुछ हद तक खुजली को कम करने में हेल्प करती हैं। वहीँ अगर आपकी खुजली कंजर्वेटिव मैनेजमेंट से नहीं रुक रही है तो किसी ट्रेन्‍ड मेडिकल प्रोफेशनल से मेडिकल सलाह लें। प्रेग्‍नेंसी के दौरान कभी भी नॉन-प्रिसक्राइब दवा लेने से बचें

यूं तो प्रेग्‍नेंसी के दौरान खुजली बहुत आम है। ज्‍यादातर मामलों में इसका इलाज कंजर्वेटिव मैनेजमेंट के साथ किया जा सकता है। हालांकि किसी भी जटिलता को रोकने के लिए खुजली का सही कारण जानना आवश्यक होता है।

ये जानकारी आपको जागरूकता मात्र के लिए दी गयी है, अगर आपको ऊपर बताई हुई जानकारी से आराम नहीं आ रहा है, तो अपने डॉक्टर से जरुर कंसल्ट करें   

 

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