देश की पहली महिला जिसने दिल्ली में AIIMS बनाने में अपना योगदान दिया था, जाने उस पहली महिला स्वास्थ्य मंत्री के बारे में



आजादी की जंग के दौरान जेल में रहते हुए भी अंग्रजों के खिलाफ लड़ी, AIIMS को बनाने के लिए भरपूर योगदान दिया

खबरिस्तान नेटवर्क: यूं देश में महिलाओं ने लगभग हर फील्ड में अपना परचम लहराया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे ही देश कि एक ऐसी महिला थी जिन्होंने भारत के दिल्ली जैसे शहर में एक बहुत बड़े हॉस्पिटल का निर्माण करवाया था। जिनका नाम राजकुमारी अमृत कौर है। बता दें कि देश की आजादी के बाद पहली बार लोकसभा चुनाव कराने के बारे में साल 1951 में एक बहुत बड़ा फैसला लिया गया। उस समय मंत्री मंडल के मेम्बेर्स में राजकुमारी अमृत कौर का नाम भी शामिल था। जो आगे चल कर भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनी जिन्होंने AIIMS जैसे बड़े अस्पताल का निर्माण करवाया। तो आज उन्ही के बारे में कुछ खास बातें जानते हैं।

राज घराने में हुआ था इस स्वास्थ्य मंत्री का जन्म

जिस समय अमृत हेल्थ minister बनी उस वक्त राजनीति में ज्यादातर राजघरानों की महिलाएं ही नजर आती थी और वे ही इसमें भाग लिया करती थीं। बता दें कि 2 फरवरी 1889(नवासी) को पंजाबी राजघराने में उनका जन्म हुआ था। राजकुमारी के पिता हरमन सिंह कपूरथला, पंजाब के जाने माने राजा थे। हालांकि बाद में अमृत के पिता ने किसी कारण ईसाई धर्म अपना लिया था, इसके बावजूद भी उनके परिवार का रहन-सहन पंजाबियों वाला ही था।

अमृत आजादी की जंग में भी भागीदार बनी थी


बता दें कि जिस समय अमृत इंग्लैंड में पढ़ाई कर रही थी, उस समय उनके साथ एक हादसा हुआ। दरअसल इंग्लैंड की एक पार्टी में एक अंग्रेज ने राजकुमारी को डांस करने के लिए ऑफर किया। तो अमृत के मना  करने पर वे अंग्रेज गुस्से में आ गया और भारतीयों के खिलाफ बोलने लगा। यह देखकर राजकुमारी को बहुत ठेस पहुंची। जिसके बाद उन्होंने देश की आजादी की जंग में भागीदार बनने का फैसला लिया।

अमृत ने अपने कार्यों के बल पर नेहरू कैबिनेट में जगह बनाई

अमृत को आजादी की जंग के दौरान 3 साल जेल की सजा हुई तो उन्होंने जेल में रहते हुए भी अंग्रेजों का बढ़ चढ़कर विरोध किया। उस समय देश आजाद ही हुआ था। तभी नेहरू की नजर अमृत पर पड़ी और उन्होंने उसे अपनी कैबिनेट में सदस्य बनाया, जो देश की पहली महिला कैबिनेट सदय बनी थी। इसके बाद अमृत को कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री की जगह मिली।

AIIMS को बनवाने में अहम सदस्य थी अमृत

जब राजकुमारी अमृत कौर ने स्वास्थ्य मंत्री का पद संभाला, तब AIIMS की स्थापना हुई। बता दें AIIMS की स्थापना के वक्त भारत के पास इतना बजट नहीं था, उस वक्त अमृत कौर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर AIIMS की स्थापना के लिए रकम इकट्ठा करने में अहम भूमिका निभाई। अमृत के इस योगदान के कारण ही  AIIMS  अस्पताल बन कर तैयार हुआ। जो आज भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है।

राजकुमारी अमृत कौर वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन की अध्यक्ष भी बनीं

जब अमृत हेल्थ मिनिस्टर बनी, उसके बाद से तो मानों उनकी चर्चा देश विदेश में आये दिन होने लगी। उन्होंने  अपने कार्यकाल के दौरान ट्यूबरक्लोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया और हिंद कुष्ठ निवारण संघ की अध्यक्षता भी की। बता दें कि साल 1955 में जब भारत में मलेरिया(मलेरिया के लक्षण) की बीमारी चरम सीमा पर थी। तब बडे़ स्तर पर अमृत कौर ने मलेरिया के खिलाफ अभियान चलाया। उस दौरान टाइम्स पत्रिका में राजकुमारी को सदी की सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में जगह दी गयी थी। लेकिन फिर 6 फरवरी 1964 के दिन राजकुमारी ने इस दुनिया को अलविदा कहा। लेकिन आज भी भारतीय इतिहास में उनका नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज मिलता है।

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