बेटियों ने निभाया बेटे होने का फर्ज, दी मां की चिता को आग



भाइयों के मना करने पर, मां की अर्थी तैयार करने से लेकर कंधे पर उठाकर 4 किमी दूर शमशान घाट तक ले गई बेटियां

वेब ख़बरिस्तान। यूं तो बेटियां हर फील्ड में अपना परचम लहरा रही हैं। वह किसी भी काम को करने में पीछे नहीं हैं। लेकिन एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जायेंगे। आपको बता दें ओडिशा के पुरी से चार बेटियों ने अपनी मां को न केवल कंधा इया है बल्कि उसका अंतिम संस्कार भी किया है।

बेटियों ने किया अंतिम संस्कार


रिपोर्ट के मुताबिक, पुरी की रहने वाली जाति नायक के देहांत के बाद पड़ोसियों ने उसके बेटों से संपर्क किया था। अपनी मां की मौत की खबर सुनकर भी उसके बेटों पर कोई दुख नहीं दिखाई दिया और उन्होंने मां के अंतिम संस्कार करने की बात पर भी कुछ जवाब नहीं दिया। वहीं जब जाति की बेटियों को उनकी मां के मरने की ख़बर मिली तो उन्हें इससे काफी दुख पहुंचा और तुरंत मां के घर आई। बता दें कि जब बहनों को पता चला कि उसके भाई मां के अंतिम संस्कार में नहीं आएंगे तो बहनों ने खुद से अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। इसके बाद विधी के अनुसार उन लोगों ने अपनी मां की चिता को शमशान घाट तक पहुँचाने के बाद उसका अंतिम संस्कार भी किया।

आखिर क्यों भाईयों ने मां का अंतिम संस्कार नही किया

बहनों के मुताबिक, उसके भाई उसकी मां को पसंद नहीं करते थे। वे उसका हाल तक कभी नहीं पूछते थे। बहनों का यह भी कहना था उसके भाई मां को पिछले 10 साल से नजरअंदाज कर रहे थे और उसको साथ में भी नहीं रखते थे। बेटियों का यह भी आरोप है कि मां के देहांत से पहले जब वे बीमार पड़ी थी तब भी उसके भाईयों ने उनकी कोई खैर ख़बर नहीं ली। उन लोगों ने यह भी बताया कि पिता के मौत के बाद उसकी मां ने फेरीवाले का काम करके उन लोगों को पाला था।

चार किलोमीटर श्मशान घाट ले गई बेटियां 

जब भाईयों ने अपने फर्ज अदा करने से इंकार कर दिया तो बेटियों ने मां के अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। उन लोगों ने पड़ोसियों के साथ मिलकर पुरे रीति रिवाज के साथ अपनी मां को अंतिम बिदाई दी। बेटियों ने पहले मां के शव को घर के बाहर रखा, जिसमें कुछ और पड़ोसियों ने उनकी मदद भी की। इसके बाद उन्होंने अर्थी तैयार की और उसे अपने कंधे पर रखकर अंतिम संस्कार के लिए चार किलोमीटर श्मशान घाट तक ले गईं।

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