ब्रैस्ट फीड से बच्चा होता है हेल्दी



इम्यून सिस्टम के सतब बच्चे का आईक्यु लेवल भी बढ़ाता है

वेब ख़बरिस्तान। ब्रैस्ट फीडिंग कराना एक माँ के लिए बहुत बेहतरीन टाइम और अहसास होता है। लेकिन बहुत बार यह देखा जाता है कि किसी वजह से मां का दूध नहीं बन पाता है और बच्चे को बाहर का दूध यानि फार्मूला मिल्क देना पड़ता है। फार्मूला मिल्क देने के टाइम हर माँ के मन में यह सवाल उठता है कि फार्मूला मिल्क देना सही है या नहीं। आपको बता दें डॉक्टर्स के मुताबिक मदर फीड और फॉर्मूला मिल्‍क दोनों ही बच्‍चों के लिए सही माने जाते हैं। लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि मां का दूध फार्मूला मिल्क से कहीं ज्यादा बेहतर है।

होता है मां बच्चे का भावनात्मक जुड़ाव

बच्चे को जन्म देते ही माँ का दूध आना शुरू हो जाता है। कहते हैं मां अपना दूध जितना बच्चे को पिलाएगी उतना ही अधिक बच्चा स्वस्थ होता जाता है। ब्रेस्ट मिल्क से बच्चे की बॉडी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनने लग जाती है और बच्चा तेज़ी से ग्रो करता है। वहीँ अगर बात करें फार्मूला मिल्क की, वह भी कुछ हद तक बच्चे के लिए ठीक माना जाता है। इसके अलावा मां जब बच्चे को स्तन से लगाती है तो ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन की वजह से स्तनों से दूध आना शुरू हो जाता है जो मां-बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव को DEVELOP करने में बहुत कारगर साबित होता है।

जानें फॉर्मूला मिल्क के बारे में


फॉर्मूला मिल्क एक प्रकार का मिल्क पाउडर होता है जिसमें बहुत से केमिकल तत्व मिलाये जाते हैं। दुनिया में बहुत सी ऐसी माएं हैं जिनका नेचुरल तरीके से मिल्क नहीं बनता। ऐसे में मां को बच्चे के लिए फार्मूला मिल्क की तरफ रुख करना पड़ता है और बच्चे को वोही मिल्क देकर संतुष्टि करवानी पड़ती है। लेकिन आपको बता दें फार्मूला मिल्क बच्चे के शरीर को वो सभी पोषक तत्व नहीं दे पाता जो एक मां के दूध में होते हैं। ऐसी कई सारी मां हैं जिन्हें पर्याप्त मात्रा में ब्रेस्ट मिल्क बन नहीं पाता है। ऐसे में मजबूरी में उन्‍हें फॉर्मूला मिल्क का सहारा लेना पड़ता है।

ब्रेस्ट फीड देने के अन्य बेनिफिट  

अगर एक मां अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीड देती है तो इससे बच्चे की अचानक होने वाली मुत्‍यु सिंड्रोम का खतरा घट जाता है। मां का दूध पीने से बच्चे के शरीर में इम्यून सिस्टम विकसित होता है। इसके अलावा बच्चे को अस्थमा,  डायबिटीज,  हाई कोलेस्ट्रॉल, ल्यूकोमिया, लिम्फोमा जैसी प्रोब्लेम्स होने का खतरा कम रहता है। आपको बता दें जो बच्चा अपनी मां का दूध पीता है वह आगे चलकर जल्‍दी खाने में ठोस पदार्थ को स्‍वीकार कर पाता है। वहीँ स्तनपान करने वाले बच्‍चों का आईक्यू लेवल भी अच्छा होता है।

इस ख़बर में दी गई जानकारी आपको जागरूकता मात्रा के लिए दी गयी है। अगर आप ऊपर बताई हुई बीमारी से ग्रस्त हैं तो एक बार अपने डॉक्टर से जरूर सलाह करें।

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