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हिमंत बिस्वा ने बताया यह है मां बनने की सबसे सही उम्र

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असम के मुख्यमंत्री बोले 22 से 30 वर्ष मां बनने के लिए सबसे सही उम्र, लंबे समय तक नहीं करनी चाहिए प्रतीक्षा


सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए महिलाओं को खाने चाहिए ये सुपरफूड्स

सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए महिलाओं को खाने चाहिए ये सुपरफूड्स

खबरिस्तान नेटवर्क। सर्वाइकल कैंसर को होने से महिलाएं रोक सकती हैं। इसके लिए उन्हें हेल्दी डाइट लेने की जरूरत हैं। हमारे देश में अभी भी महिलाएं अपनी सेहत पर फोकस नहीं करती हैं। इतना ही नहीं अगर शरीर में कोई समस्या भी होती है तो टेस्ट या डॉक्टर के पास जाने की बजाय उसे इग्नोर करती हैं। जिसकी वजह से मामला और बिगड़ जाता है। तो चलिए बताते हैं कि महिलाएं खुद को कैंसर से कैसे सुरक्षित रख सकती हैं। सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए महिलाओं को अपनी डाइट में कुछ विटामिन्स रखना चाहिए। विटामिन ए, ई, सी, बी से भरपूर फूड्स का सेवन करना चाहिए। यह सर्विक्स को हेल्दी बनाने का काम करते हैं। ग्रीन टी ना सिर्फ वजन को कंट्रोल करता है। बल्कि यह गर्भाश्य को हेल्दी भी रखता है। ग्रीन टी में पॉलीफेनॉल्स पाया जाता है जो प्लांट कम्पाउंड हैं, जो एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो यह गर्भाशय की कोशिकाओं को हेल्दी रखने का काम करते हैं। ब्रोकली के सेवन से सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। डाइट में ब्रोकली को शामिल करके सर्विक्स को हेल्दी रख सकते हैं। इसमें विटामिन बी पाया जाता है। जो फोलेट के रूप में पहचाना जाता है। रिप्रोडक्टिव सिस्टम को बेहतर रखता है और सर्विक्स में शेप में रहता है। शिमला मिर्च भी एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन्स से भरपूर होता है। इसके खाने से भी गर्भाशय स्वस्थ्य रहता है। कैंसर से बचने के लिए आप शिमला मिर्च को सलाद, सूप या सब्जी के रूप में बनाकर ले सकती हैं। पालक को डाइट में महिलाओं को जरूर रखना चाहिए। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और आयरन होता है। इसे खाने से शरीर में आयरन की कमी नहीं होती है और गर्भाशय में हेल्दी रहता है।

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पीरियड में ब्लीडिंग का लेवल बता सकता है, आप थायराइड के हो रहे हैं शिकार

पीरियड में ब्लीडिंग का लेवल बता सकता है, आप थायराइड के हो रहे हैं शिकार

खबरिस्तान नेटवर्क। पीरियड्स या महावारी में ब्लीडिंग से पता लगाया जा सकता है कि थाइराइड हमारा ठीक है या नहीं। थायराइड के असंतुलन से कई तरह के शारीरिक दिक्कतें पैदा हो सकती है। यह पीरियड्स को भी प्रभावित करता है। थायरॉयड ग्रंथि थायराइड हार्मोन का उत्पादन करती है जिसके शरीर में कई काम होते हैं, जिसमें टेम्परेचर और एनर्जी के लेबल को नियंत्रित करना भी शामिल है। जब आपका थायराइड हार्मोन का उत्पादन अपर्याप्त होता है, तो शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी हो जाती हैं। आपको कब्ज, थकान, अवसाद, शुष्क त्वचा, पतले बाल, ठंड असहिष्णुता, मांसपेशियों में ऐंठन, जोड़ों में दर्द, वजन बढ़ना और अनियमित मासिक धर्म हो सकता है। थायराइड का स्तर पीरियड्स से कैसे जुड़ा है हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो थायरॉइड आपके ओवरी को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से सेक्स हार्मोन-बाइंडिंग ग्लोब्युलिन (SHBG) से प्रभावित करता है। चूकि थायराइड ग्रंथि तकनीकी रूप से अंतःस्रावी तंत्र (endocrine system) का सदस्य है, न कि महिला प्रजनन प्रणाली का। लेकिन थायरॉयड ग्रंथि के हार्मोन महिला प्रजनन प्रणाली के समुचित कार्य में योगदान करते हैं। जब थायराइड ग्रंथि बहुत कम या ज्यादा थायराइड हार्मोन का उत्पादन करती हैं तो इससे कई दिक्कत होती है। जैसे पीरियड्स अनियमित हो जाता है। कभी बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने लगती है तो कभी बहुत ही कम। इससे एमेनोरिया (Amenorrhea) भी हो सकता है।बिना प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के किसी महिला को लगातार 3 महीने तक पीरियड्स नहीं आते हैं तो इसका कारण एमेनोरिया बताया जाता है। इसके साथ ही 40 से पहले मेनोपॉज भी थाइराइड हार्मोन के बिगड़ने की वजह से हो सकती है। पीरियड्स देता है थायराइड के बीमारी का संकेत पीरियड्स बताता है कि आपका थायराइड ग्रंथि ठीक से काम कर रहा है या नहीं। यदि आप पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग का अनुभव कर रहे हैं। यानी हर दो घंटे से पहले पैड बदलना पड़ रहा है। बहुत बार क्लॉट पास होते हैं तो यह हाइपोथायरायडिज्म के कारण हो सकता है यानी आपकी थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं करती है। इसके साथ ही अगर महीने में कई बार मासिक धर्म का अनुभव कर रहे हैं या फिर यह लंबे वक्त तक रह रहा है तो यह भी हाइपोथायरायडिज्म के कारण हो सकता है। यदि आप अपने वास्तविक मासिक धर्म चक्र के शुरू होने से कुछ दिन पहले प्रीमेंस्ट्रुअल स्पॉटिंग यानी पीरियड के दाग का अनुभव करती हैं, तो यह एक अंडरएक्टिव थायरॉयड ग्रंथि यानी हाइपोथायरायडिज्म का संकेत हो सकता है। यदि आपके मासिक धर्म अनियमित हैं या अक्सर आपके पीरियड्स मिस होते हैं, तो यह हाइपोथायरायडिज्म कारण हो सकता है। थायरॉयड ग्रंथि के बहुत कम या बहुत अधिक थायराइड हार्मोन का उत्पादन करने के कारण हो सकता है। यदि आपके मासिक धर्म बिल्कुल नहीं आते हैं यानी मासिक धर्म चक्र अनुपस्थित हैं तो यह हाइपोथायरायडिज्म कारण भी हो सकता है। थायराइड का ट्रीटमेंट क्यों जरूरी हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो हेल्थ से जुड़ी प्रॉब्लमस से बचने के लिए हाइपोथायरायडिज्म का इलाज करना जरूरी होता है। हाइपोथायरायडिज्म को शुरुआत में ही पहचान कर ट्रीटमेंट करने पर स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या से बचा जा सकता है। थायराइड ग्रंथि के ठीक से नहीं काम करने पर ये दिक्कतें हो सकती हैं बांझपन, दिल के रोग, नस की क्षति, घेंघा रोग, जन्म दोष, मानसिक बीमारी। यदि हाइपरथायरायडिज्म का इलाज नहीं किया जाता है तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं दिल की धड़कन तेज हो सकती है, शऱीर को झटका लग सकता है, बाल और हड्डियों में भंगुरता आ सकती है, डबल विजन हो सकता है, प्रकाश देखने में दिक्कत हो सकती है, नींद की समस्या, घबराहट हो सकती है, स्वाभाव में चिड़चिड़ापन आ सकता है ट्रीटमेंट क्या है लक्षण दिखने के बाद डॉक्टर के पास जाए। वो थायराइड लेबल का टेस्ट करेगा। फिर दवाएं देगा, जिससे इसे कंट्रोल किया जा सकता है। जिससे हेल्थ से जुड़ी समस्या दूर हो जाती है

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आजकल क्यों बढ़ रहे मिसकैरेज के मामले, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव

आजकल क्यों बढ़ रहे मिसकैरेज के मामले, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव

खबरिस्तान नेटवर्क। बॉलीवुड की ड्रामा क्वीन राखी सावंत ने हाल ही में खुलासा किया कि वह प्रेग्नेंट थी, लेकिन उनका दर्दनाक मिसकैरेज हो गया। उन्होंने बिग बॉस मराठी के दौरान अपनी प्रेग्नेंसी का ऐलान किया था। लेकिन उस समय उन्हें किसी ने सीरियसली नहीं लिया। हालांकि, अब राखी सावंत ने मीडिया से बात करते हुए खुलासा किया कि उनका मिसकैरेज हो गया है। ऐसे में सवाल यह है कि मिसकैरेज किन कारणों से होता है, इसके लक्षण क्या है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है? आइए आज हम आपको बताते हैं... क्या होता है मिसकैरेज गर्भपात या मिसकैरेज 20 सप्ताह के गर्भ से पहले गर्भावस्था का नुकसान है। अधिकांश गर्भपात प्रेगनेंसी के फर्स्ट ट्राइमेस्टर में होते हैं। साधारण भाषा में समझा जाए, तो जब बच्चा गर्भ में ठहर नहीं पाता है तो इसे मिसकैरेज कहते हैं। नेशनल हेल्थ सर्विस के अनुसार ज्यादातर मामले में भ्रूण में असामान्य क्रोमोजोम्स पाया जाना गर्भपात का कारण होता है। जब भ्रूण में बहुत कम या बहुत ज्यादा क्रोमोजोम्स पाए जाते हैं तो मिसकैरेज के चांसेस सबसे ज्यादा होते हैं। इसके अलावा भ्रूण में खून और पोषक तत्वों की कमी, कमजोर गर्भाशय, इंफेक्शन, सेक्सुअल ट्रांसमिशन डिजीज ,पीसीओएस या कई बार फूड प्वाइजनिंग के कारण भी मिसकैरेज हो सकता है। ऐज फैक्टर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मिसकैरेज के मामले सबसे ज्यादा 40 साल से ज्यादा की महिलाओं में देखे जाते हैं। कई बार तो महिलाओं का मिसकैरेज उन्हें प्रेगनेंसी का पता चलने से पहले ही हो जाता है। बढ़ती उम्र महिलाओं के मिसकैरेज का एक कारण हो सकती है। 30 साल की उम्र में 10 में से एक महिला का मिसकैरेज होता है, जबकि 45 साल या उससे ज्यादा की उम्र में 10 से 5 महिलाएं मिसकैरेज का शिकार हो जाती है। दर्द निवारक दवाइयों का सेवन करना प्रेगनेंसी के दौरान कई बार दर्द निवारक दवाई जैसे- इबुप्रोफेन या नेप्रोक्सेन आदि का इस्तेमाल करना भी हानिकारक हो सकता है और यह भ्रूण के विकास पर असर डालता है और गर्भपात का कारण बनता है। हार्मोन की कमी गर्भ में पल रहे बच्चे की विकास के लिए हार्मोन का बैलेंस होना बहुत ज्यादा जरूरी होता है। कई बार हार्मोन इंबैलेंस हो जाने के कारण गर्भपात हो सकता है। खासकर जो महिलाएं पीसीओडी या पीसीओएस की समस्या से परेशान रहती हैं उन्हें इसका सबसे ज्यादा खतरा रहता है। नशीले पदार्थ का सेवन करना प्रेगनेंसी के दौरान अगर जानबूझकर या गलती से महिलाएं धूम्रपान, शराब या किसी भी नशीली चीज का सेवन कर लेती हैं, तो इससे मिसकैरेज होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। गर्भपात होने के लक्षण मिसकैरेज होने का सबसे पहला लक्षण है ब्लीडिंग। यह कम या ज्यादा हो सकती है। वैसे तो प्रेगनेंसी के 3 महीने में ब्लीडिंग या स्पॉट होना सामान्य बात है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक रहती है तो आपको डॉक्टर से परामर्श लेने की जरूरत है। पेट के निचले हिस्से में दर्द या ऐंठन महसूस करना और लंबे समय तक इसे बने रहना मिसकैरेज होने का संकेत हो सकता है। महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से फ्लूड जैसा डिस्चार्ज होना या टिशू का निकलना या खून के थक्के निकलना यह मिसकैरेज होने की वार्निंग हो सकती है। मिसकैरेज से बचने के लिए यह सावधानी बरतें अगर आप मिसकैरेज के खतरे से बचना चाहते हैं तो प्रेगनेंसी से पहले आप मेंटली और फिजिकली फिट रहें। यह आपकी हेल्दी प्रेगनेंसी में मददगार होता है। प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी प्रकार की दवा का सेवन डॉक्टर से पूछे बिना नहीं करें, क्योंकि कई बार अवैध दवाइयों का सेवन करने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप पहले से ही किसी बीमारी जैसे- डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, थायराइड से ग्रसित है तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान खास ख्याल रखने की जरूरत है। डॉक्टर के कहने पर आप प्रेगनेंसी के दौरान विटामिन और फोलिक एसिड की दवाइयां जरूर लें। यह भ्रूण के विकास में मदद करता है, साथ ही आपको ताकत भी देता है। अगर एक बार आपका मिसकैरेज हो चुका है तो दूसरी बार गर्भधारण करने से पहले अपने गाइनेकोलॉजिस्ट से जरूर संपर्क करें और उसकी सलाह पर कुछ समय के बाद ही दूसरी प्रेगनेंसी का ट्राई करें।

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1500 रुपये और एक साइकिल से शुरू किया बिजनेस, अब करोड़ों की मालकिन

1500 रुपये और एक साइकिल से शुरू किया बिजनेस, अब करोड़ों की मालकिन

खबरिस्तान नेटवर्क। इंसान के अंदर इतनी क्षमता होती है कि वो असंभव दिखने वाले काम को भी संभव कर सकता है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की एक महिला ने भी कुछ ऐसा ही किया है। इस महिला ने पंद्रह सौ रुपए और एक साइकिल की मदद से मात्र 3 साल में अपने व्यापार को करोड़ों तक पहुंचा दिया है। उनके इस जज्बे को सलाम करते हुए प्रदेश की सरकार ने उन्हें गोरखपुर रत्न से सम्मानित किया है। चलिए जानते हैं कि कैसे इस महिला ने बेहद कम संसाधनों में शुरू किए अपने छोटे से व्यापार को करोड़ों तक पहुंचाया और अपने जैसी अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गईं। कौन हैं संगीता पांडेय? ये संघर्ष और सफलता की कहानी है गोरखपुर के झरणाटोला की रहने वाली संगीता पांडेय की। संगीता उन्हीं हालातों में जी रही थीं, जिन हालातों में देश की लाखों महिलाएं जीती आई हैं। लेकिन उन्होंने आम महिलाओं की सोच से ऊपर उठकर कुछ करने की ठानी। उन्होंने अपने लक्ष्य को पाने के लिए केवल सपने ही नहीं देखे बल्कि उसके लिए खूब संघर्ष भी किया। पढ़ाई पूरी करते ही हो गई शादी गोरखपुर के पादरी बाजार स्थित शिवपुर सहबाजगंज में मिठाई की दुकानों में इस्तेमाल किए जाने वाले फैंसी और पैकेजिंग डब्बे बनाने वाला एक कारखाना चलाने वाली संगीता पांडेय सैनिकों के परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता और दोनों भाई सेना में हैं। वह हमेशा से बहुत महत्वाकांक्षी रही हैं। अपनी प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से प्राप्त करने के बाद उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई पूरी होने के बाद ही उनकी शादी कर दी गई। विवाह के बाद उन्हें लगा कि उनकी इच्छाओं को दबाया जा रहा है। कुछ अलग करने की ठानी इसके बाद संगीता इस विषय में सोचने लगीं कि उन्हें कुछ करना चाहिए, जिससे कि वो खुद को साबित कर सकें। लेकिन सवाल ये था कि आखिर वो करे क्या? उनको अपने इस सवाल का जवाब तब मिला जब उन्होंने एक दिन मिठाई की दुकानों में इस्तेमाल होने वाले डब्बे को देखा। यहीं से उन्हें इन डिब्बों का कारोबार करने का आइडिया आया। ऐसे मिला पहला ऑर्डर हालांकि संगीता के लिए ये रास्ता आसान नहीं था लेकिन उनको खुद पर पूरा भरोसा था। इसी भरोसे के दम पर वह गोलघर की सबसे प्रतिष्ठित दुकान में पहली बार आर्डर के लिए पहुंची। इस दौरान लोगों को ये आश्चर्य हुआ कि एक औरत ये काम कैसे कर पाएगी। उन्हें लगा कि एक महिला इस कारोबार के लिए वो मेहनत नहीं कर पाएगी जो एक पुरुष कर सकता है। इसके बावजूद वो अपनी साइकिल पर ऑर्डर की तलाश करती रहीं। एक दिन दुकान के मालिक ने उनसे कहा कि आप इतनी मेहनत कर रही है इसलिए मैं आपको एक ऑर्डर देता हूं। संगीता ने इस काम को बहुत ही शिद्दत से किया और इस काम को चुनौती की तरह लेते हुए पहली बार 20 डिब्बे लेकर उनकी दुकान पर पहुंची। उन्हें वह डिब्बे पसंद आए और तब से लेकर आज तक संगीता वहां डिब्बे सप्लाई कर रही हैं। संगीता अपने साथ लगभग डेढ़ सौ महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं। संगीता के अनुसार उन्होंने अपने बटुए में रखे 1500 रुपए और साइकिल से अपनी मंजिल को पाने के लिए कारोबार की शुरुआत की। शुरुआत में उन्होंने अपने ससुराल पक्ष से कोई सहयोग नहीं मिला। उनके सिपाही पति और सासुरवाले इस काम में उनके साथ नहीं थे। समाज में भी लोग उन्हें ताने मार रहे थे लेकिन संगीता ने अपने जुनून के आगे किसी की नहीं सुनी। वह अपने संघर्ष पथ पर बढ़ती रही। आज संगीता करोड़ों रुपए के कारोबार की मालकिन हैं।

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पिता कूड़ा उठाते हैं, मां झाड़ू लगाती है, बेटी Miss Universe के स्टेज पर पहुंच माता-पिता को दिया ट्रिब्यूट

पिता कूड़ा उठाते हैं, मां झाड़ू लगाती है, बेटी Miss Universe के स्टेज पर पहुंच माता-पिता को दिया ट्रिब्यूट

खबरिस्तान नेटवर्क। माता-पिता हमें एक बेहतर ज़िन्दगी देने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। उनके पास भले ही आय के सीमित संसाधन हो लेकिन बच्चों को कोई कमी नहीं होने देते। हम चाहे ज़िन्दगी में कितना भी आगे बढ़ जाएं लेकिन हमें ये कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारी शुरुआत कहां से हुई थी। हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारे माता-पिता ने कितने दुख सहकर हमें सफ़लता के मकाम तक पहुंचने में मदद की। मिस यूनिवर्स 2022 में थाईलैंड का प्रतिनिधित्व कर रही एना सुएंगम इयाम (Anna Suengam Iam) ने कुछ ऐसा ही किया। विश्व स्टेज पर पहुंचकर उन्होंने कचरे से बनी अपसाइकल्ड ड्रेस पहनी और अपने माता-पिता को अनोखा ट्रिब्यूट दिया। पिता कचरा उठाते हैं, मां झाड़ू लगाती है एना सुएंगम की ज़िन्दगी आसान नहीं थी। उनके पिता कूड़ा उठाते हैं और मां सड़कों पर झाड़ू लगाती हैं। Angelopedia के लेख के अनुसार, एना के पिता को कूड़े में जो टूटे-फूटे खिलौने मिलते थे एना उनसे खेलते हुए बड़ी हुई। एना ने इन मुसीबतों को अपने सपनों के रास्ते में नहीं आने दिया। 30 जुलाई, 2022 को उन्होंने मिस थाईलैंड का खिताब जीता। सोडा कैन पुल टैब से बनी ड्रेस पहनी मिस यूनिवर्स 2022 के प्रीलिमिनरी कम्पीटिशन में दुनियाभर की ब्यूटी क्वीन्स ने एक से बढ़कर एक ड्रेस पहनी। एना ने इस मौके पर किसी बड़े डिज़ाइनर और कीमती फ़ैब्रिक से बनी ड्रेस के बजाए सोडा कैन पुल टैब से बनी अपसाइकल्ड ड्रेस पहनी। एना ने अपने ऑफ़िशियल इंस्टाग्राम पेज के ज़रिए दुनिया को बताया कि उन्होंने अनोखा गाउन क्यों पहना। इंस्टाग्राम कैप्शन के अनुसार, 'ये गाउन मेरे परिवार से प्रेरित है। मेरे माता-पिता कूड़ा उठाने का काम करते थे। मेरा बचपन कूड़े के ढेर और रिसाइक्लेबल चीज़ों के इर्द-गिर्द बीता। ये यूनिक गाउन, 'Can Tab' कूड़े और रिसाइकल्ड मटेरियल्स से बना है। ये दुनिया को बताने के लिए है कि जिन चीज़ों को बहुत से लोग बेकार समझते हैं उनकी भी कीमत और खूबसूरती होती है।' थाई फ़ैशन ब्रांड ने डिज़ाइन किया गाउन एना को बहुत से लोग, 'द गारबेज ब्यूटी क्वीन' भी कहते हैं। एना का मानना है कि आप जहां पैदा होते हैं बस वहां रुक कर रह जाना ठीक नहीं है, आपको खुद पर यकिन होना चाहिए कि आप अपनी ज़िन्दगी बेहतर बना सकते हैं। एना का अपसाइकल्ड गाउन सोडा ड्रिंक कैन्स के पुल-टैब्स और Swarovski से बनाया गया था। थाई फ़ैशन ब्रैंड Manirat ने इसे डिज़ाइन किया था।

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102 साल की हैं ये सुपर दादी, अभी भी करती हैं काम

102 साल की हैं ये सुपर दादी, अभी भी करती हैं काम

खबरिस्तान नेटवर्क। अंदरूनी शक्ति आपको किसी भी उम्र में कुछ भी कर जाने का हौसला देती है। तभी तो बुज़ुर्गों ने उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंचकर कई कीर्तिमान स्थापित किए। किसी ने PhD हासिल की तो किसी ने मैराथॉन दौड़ा। आज की पीढ़ी भले ही आराम और काम को बैलेंस कर के चलने में विश्वास करती है लेकिन बहुत से लोगों के लिए घर पर बैठे रहना असंभव हो जाता है। लक्ष्मीबाला देवी भी उन्हीं में से एक हैं। लक्ष्मीबाला 102 साल की उम्र में भी सब्ज़ी बेचती है और आत्मनिर्भर बनने की नई परिभाषा लिख रही हैं। दुनिया को सीखा रही हैं आत्मनिर्भर का सही अर्थ कोलाघाट, पश्चिम बंगाल के बागडिहा नामक गांव में 1920 में लक्ष्मीबाला का जन्म हुआ था। मात्र 13 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। घर की हालत ठीक नहीं थी और पितृसत्तामक सोच से लड़ते हुए उन्होंने काम करना शुरू किया। उस दिन के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लक्ष्मीबाला ने भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया था। लक्ष्मीबाला के पति का सालों पहले निधन हो गया। तब उनका बेटा सिर्फ़ 7 साल का था। पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी लक्ष्मीबाला के कंधों पर आ गई। उन्होंने अपने सभी बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया। लेकिन आत्मनिर्भर बनने की जो धुन उनके सिर पर सवार हो चुकी थी वो आज तक नहीं उतरी है। बेटा काम करने से रोकता है लेकिन वो नहीं सुनतीं लक्ष्मीबाला का इकलौता बेटा उन्हें मेहनत-मज़दूरी करने से रोकता है लेकिन वो नहीं सुनती हैं। मीडियाकर्मियों से बात-चीत के दौरान लक्ष्मीबाला ने बताया, 'मेरा बेटा मुझे रोकता है, कहता है इतनी मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है। मैं भागकर यहां आ जाती हूं।' कोलाघाट के न्यू बाज़ार में लक्ष्मीबाला सोमवार से शुक्रवार सब्ज़ी बेचती हैं। वो स्थानीय किसानों से सब्ज़ी खरीदती हैं और सुबह से लेकर दोपहर तक बाज़ार में सब्ज़ियां बेचती हैं। खरीददार भी उनके काम करने की लगन के कायल हैं। लक्ष्मीबाला देवी हम सभी के लिए प्रेरणा हैं।

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यूट्यूब की मदद से ये महिला बनी किसान, अब ड्रैगन फ्रूट की खेती कर कमा रही लाखों रुपये

यूट्यूब की मदद से ये महिला बनी किसान, अब ड्रैगन फ्रूट की खेती कर कमा रही लाखों रुपये

खबरिस्तान नेटवर्क। मिर्जापुर की महिला किसान वंदना सिंह अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन कर उभरी हैं। उन्होंने यूट्यूब और गूगल से वीडियो देखकर ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की थी और आज वो इस खेती से लाखों रुपये का मुनाफा कमा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने इस खेती से इस साल 5 लाख रुपये का मुनाफा कमाया है। ड्रैगन फ्रूट की खेती से लाखों का मुनाफा यह कहानी है मिर्जापुर जिले के इमिलियाचट्टी की रहने वाली महिला किसान वंदना सिंह की। वंदना बालुवा बजाहूर गांव में आधे एकड़ जमीन में ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी की खेती कर रही हैं। एक साधारण गृहणी वंदना सिंह के लिए ऐसा कुछ सोचना और इसे करने की हिम्मत दिखाना आसान नहीं था। लेकिन वो कहते हैं न कि जब आपकी किस्मत चमकने वाली हो तो नियति आपका हाथ पकड़ कर आपसे काम करवाती है। गांव की गृहिणी वंदना सिंह के साथ भी नियति ने ऐसा ही कुछ किया। यूट्यूब से वीडियो देख कर सीखी खेती वंदना सिंह ने अपने स्मार्टफोन पर एक दिन देखा ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में यूट्यूब पर एक वीडियो देखा। इस वीडियो ने वंदना के मन में ड्रैगन फ्रूट की खेती के प्रति दिलचस्पी जगाई। इसके बाद उन्होंने गूगल की मदद से इसकी खेती करने के बारे में जानकारी जुटाई और फिर उद्यान विभाग से सहयोग लिया। सहयोग मिलने के बाद वंदना सिंह की सोच को आधा एकड़ जमीन मिली, जहां उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर दी। इस खेती से उन्हें इस साल पांच लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। वह अपने खेत में ड्रैगन फ्रूट के साथ स्ट्राबेरी की भी खेती भी कर रही हैं और इससे भी उन्हें मुनाफा हो रहा है। ड्रैगन फ्रूट की खेती में फायदा मिलने के बाद वंदना ने एक एकड़ जमीन पर इसकी खेती करने का मन बनाया है। इसके लिए उन्होंने खुद ही ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी लगाई है, जिसे तैयार होने के बाद पौध को खेत में लगाया जाएगा। इस अनोखे फल की खेती करने के लिए क्रंकीट पिलर, लोहे की रिंग टायर और गोबर की खाद की जरूरत होती है। इस खेती में धैर्य रखना पड़ता है क्योंकि पहले और दूसरे साल इसमें कम मुनाफा होता है। लेकिन तीसरे साल से मेहनत का फल मिलना शुरू हो जाता है और मुनाफा लाखों में होता है। इस संबंध में वंदना ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट का एक पौध 50 रुपये में बिकता है। तैयार होने के बाद ड्रैगन फ्रूट को सीधे खेत से ही वाराणसी ले जाया जाता है। जहां पर यह फल 400 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है।

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अरुणा मिलर ने रचा इतिहास, मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बनीं

अरुणा मिलर ने रचा इतिहास, मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बनीं

खबरिस्तान नेटवर्क। हैदराबाद में जन्मी अरूणा मिलर ने इतिहास रच दिया है. उन्होंने अमेरिकी राज्य मैरीलैंड के लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में निर्वाचित होने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी राजनीतिज्ञ बनकर एक इतिहास रच दिया है। मिलर ने बुधवार को राज्य के 10वें लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में शपथ ली। मिलर की उम्र 58 साल है। उन्होंने एक उद्घाटन भाषण में अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया, जो भारत से संयुक्त राज्य अमेरिका में आकर बस गए थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता मैकेनिकल इंजीनियर है और वह 1960 के दशक के अंत में छात्र के रूप में अमेरिका आने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने बताया कि वह 1972 में 7 साल की उम्र में देश आईं थी। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उसके पिता आईबीएम के एक इंजीनियर थे. वह एक ऐतिहासिक डेमोक्रेटिक टिकट का हिस्सा थीं, जो पिछले साल नवंबर में जीत के लिए रवाना हुई थी। मिलर ने 2010 से 2018 तक मैरीलैंड हाउस ऑफ डेलिगेट्स में दो बार सेवा की है। अपने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भावुक मिलर ने भारत से अपने आगमन की कहानी शेयर की और अपने स्कूल के पहले दिन के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि उनमें से कोई भी मेरे जैसा नहीं दिखता था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे इंग्लिश का एक शब्द बोलना नहीं आता था, लेकिन मैं फिट होना चाहता था। भारत में दादी के पास जाना है वापस मिलर ने बताया कि जब वह स्कूल के कैफेटेरिया गईं तो वो भी वही सब करने लगीं जो सब कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार अमेरिकी खाना खाया. इसके साथ ही उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ठंडा दूध पिया। मिलर ने बताया कि वह बहुत अच्छा महसूस कर रहीं थीं। उन्होंने बताया कि वह सोच रहीं थी कि सब कुछ ठीक है, लेकिन जब वह और उनके दोस्त क्लास में वापस आईं तब उन्होंने डेस्क पर उल्टी कर दी, जिसके बाद उन्हें बहुत बुरा लग रहा था। मिलर ने कहा कि उनकी टीचर ने उनकी मां को बुलाया जो उन्हें लेने गईं थीय़ वह मां से जिद करने लगीं कि उन्हें भारत में परवरिश करने वाली दादी के पास वापस जाना है। 2000 में किया अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मतदान भगवत गीता की शपथ लेने वाली हाल ही में शपथ लेने वाली उपराज्यपाल ने कहा कि रंग की एक महिला के रूप में उन्होंने अपना अधिकांश जीवन एक ऐसी जगह में फिट होने की कोशिश में बिताया, जो एक अप्रवासी या एक महिला के रूप में उनके दिमाग में नहीं थी. मिलर ने कहा कि मैं 30 के दशक में अमेरिकी नागरिक बन गई थी. पद की शपथ लेने के बाद मिलर ने अपने माता-पिता और भाई-बहनों का भी शुक्रिया अदा किया. मिलर की जीत मैरीलैंड राज्य में भारतीय अमेरिकियों के बीच उनकी लोकप्रियता के कारण भी है। उन्होंने कई रिपब्लिकन, समर्थक-ट्रम्प समर्थन में आगे आए. मिलर ने जनता की सुरक्षा में सुधार करने और समान परिवहन पहुंच बनाने के लिए मोंटगोमरी काउंटी, मैरीलैंड में स्थानीय परिवहन विभाग में काम करते हुए 25 साल बिताए. 2010 से 2018 तक, उन्होंने मैरीलैंड हाउस ऑफ डेलिगेट्स में डिस्ट्रिक्ट 15 का प्रतिनिधित्व किया। 2000 में देश की नागरिक बनने के बाद उन्होंने पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मतदान किया. इसके बाद वह धीरे-धीरे, वह मैरीलैंड राज्य और देश की राजनीति की ओर खींची गईं गया।

https://webkhabristan.com/womania/aruna-miller-becomes-first-indian-american-to-be-elected-lieutenant-governor-18532