जीका  वायरस का सही समय पर इलाज, बचा सकता है कई गंभीर बीमारी से



प्रेग्नेंट महिलाएं रखें अपना खास ध्यान

वेब खबरिस्तान।  जीका वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच डॉक्टर्स की ओर से एक राहत की खबर सामने आई है कि इस वायरस को लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। डेंगू,  मलेरिया की तरह यह बीमारी भी सही समय पर सही इलाज मिलने से जल्दी ही ठीक हो जाती है। आपको बतादें अभी तक देश में इस वायरस के संक्रमण के जो भी मामले सामने आये हैं। उसमें से ज्यादातर पेशेंट्स ठीक हो चुके हैं। बहुत से मरीजों में सिर्फ एसिम्टोमैटिक ही पाए गये थे। डब्ल्यूएचओ ने दी जानाकरी 


डब्ल्यूएचओ द्वारा भारत में इसके प्रभावों को लेकर जो जानकारी सामने आयी है उसके मुताबिक देश में अब तक जीका वायरस की वजह से प्रेग्नेंट महिलाओं में माइक्रोसिफेली के कोई भी मामले सामने नहीं आये हैं। बल्कि अभी तक किसी भी मरीज में गुलियन बेरी सिंड्रोम या कंजनाइटल जीका सिंड्रोम की प्रॉब्लम नहीं पाई गयी है।  

कैसे फैलता है जीका वायरस

इस वायरस का संक्रमण मच्छरों द्वारा ही फैलता है। डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाला एडीज मच्छर ही जीका वायरस को भी फ़ैलाने का काम करता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति से सेक्सुअल ट्रांसमिशन के दौरान भी एक से दूसरे शख्स में आसानी से फैल जाता है। आपको बता दें इस वायरस की पहचान युगांडा देश के जीका जंगल में हुई थी। वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड 3 से 14 दिन तक का होता है। जिसके बाद इसके लक्षण दिखने शुरू होते हैं। इसके संक्रमित पेशेंट्स को बुखार, दर्द, जोड़ों में दर्द और सिरदर्द की प्रॉब्लम होनी शुरू हो जाती है।  

किस तरह करें बचाव

इसके बचाव के लिए घरों में पानी जमा न होने दें,  जिन जगहों पर पानी जमा होता है वहां सफाई जरूर करवाएं। जो लोग खुले में सोते हैं वह सोते वक्त मच्छरदानी का इस्तेमाल जरूर करें। इतना ही नहीं इस मौसम में बॉडी को ढक कर रखें यानि पूरी आस्तीन वाले कपडे पहने। साथ ही हल्के रंग वाले कपड़े पहनें। जो महिलाएं प्रेग्नेंट हैं वह मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए खासतौर पर अपना ध्यान रखें। इसके लिए  रिपेलेंट क्रीम का यूज़ कर सकते हैं। लो इम्युनिटी ग्रूप के लोग भी विशेष सावधानी बरतें। वहीं आपको  लगातार 7 दिनों तक बुखार आ रहा है तो मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की बजाय किसी अच्छे फिजीशियन को जुरूर दिखाएं।

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