कोरोना की दूसरी लहर में हैप्पी हाईपोक्सिया ले रहा है युवाओं की जान, गिर जाता है ऑक्सीजन लेवल



पेशेंट में नहीं दिखाई देते किसी भी तरह के लक्षण

वेब खब्रिस्तान:देश में covid-19 की दूसरी लहर में लोगों में सर्दी, बुखार, जुकाम, गले में खराश के साथ ही ऑक्सीजन लेवल का गिरना सामने आ रहा है। इसके अलावा कई केस ऐसे हैं, जहां पेशेंट में किसी तरह के कोई लक्षण नहीं, फिर भी अचानक ऑक्सीजन का लेवल घट जाता है और सेचुरेटेड ऑक्सीजन का लेवल 50% तक पहुंच जाता है। ऐसा होने का एक ही कारण माना जा रहा है और वो है हैप्पी हाइपोक्सिया। तो आईये जान लेते हैं इससे जुडी कुछ बातें।

क्या है हाईपोक्सिया?

ब्लड में ऑक्सीजन के लेवल का कम हो जाना हाईपोक्सिया कहलाता है। यहाँ आपको बता दें कि एक हेल्दी पर्सन के खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन 95% या इससे अधिक है, लेकिन इनदिनों कोरोना पेशेंट में ऑक्सीजन सेचुरेशन घटकर 50% तक पहुंच रहा है। इसके कारण किडनी, ब्रेन, हार्ट और अन्य इम्पोर्टेन्ट बॉडी पार्ट्स काम करना बंद कर सकते हैं। कोरोना पेशेंट्स में शुरू में कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है , वह ठीक और हैप्पी ही नजर आता है।

क्या होता है हैप्पी हाईपोक्सिया


ज्यादातर मेडिकल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि लंग्स में खून की नसों में थक्के जम जाते हैं और इसे ही हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण माना जा रहा है। इन्फेक्शन होने पर बॉडी में सूजन बढ़ती जाती है। इससे सेलुलर प्रोटीन रिएक्शन तेज हो जाती है। तब खून के थक्के बनने शुरू हो जाते हैं। इससे लंग्स को प्रॉपर मात्रा में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं होती पाती और ब्लड में ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होना शुरू हो जाता है। दो दिन पहले तक सामान्य नजर आ रहा मरीज एकाएक वेंटिलेटर पर पहुंच जाता है।

हैप्पी हाईपोक्सिया पर कैसे रखें नजर

इस पर नजर रखने के लिए covid पेशेंट को टाइम टाइम पर पल्स  ओक्सिमीटर के जरिए ऑक्सीजन सेचुरेशन को देखने की जरुरत है। इसके अलावा लिप्स का रंग बदलने लग जाता है यानी होंठ हल्के नीले होने लगते हैं। स्किन रंग भी लाल या बैंगनी होने लगता है। अगर गर्मी न हो तो भी लगातार पसीना आना शुरू हो जाता है। अगर पेशेंट का ऑक्सीजन लेवल गिरता दिखाई दें , तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाने

युवाओं में ज्यादा हो रहा हैप्पी हाईपोक्सिया का असर

ऐसा इसलिए, युवाओं की इम्युनिटी ज्यादा स्ट्रोंग होती है उनकी एनर्जी  अन्य लोगों के मुकाबले ज्यादा होती है। वहीँ ऐज अधिक है तो ऑक्सीजन सेचुरेशन का 94% से 90% होना भी महसूस होता है लेकिन  युवाओं को 80% ऑक्सीजन सेचुरेशन पर भी कोरोना के लक्षण महसूस नहीं हो पाते हैं और वह हाइपोक्सिया को सहन कर लेते हैं। उन्हें पता ही नहीं चलता कि ऑक्सीजन का स्तर घट रहा है।

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