तंदरुस्ताये नमः

कोरोना की दूसरी लहर में हैप्पी हाईपोक्सिया ले रहा है युवाओं की जान,  गिर जाता है ऑक्सीजन लेवल

कोरोना की दूसरी लहर में हैप्पी हाईपोक्सिया ले रहा है युवाओं की जान, गिर जाता है ऑक्सीजन लेवल

वेब खब्रिस्तान:देश में covid-19 की दूसरी लहर में लोगों में सर्दी, बुखार, जुकाम, गले में खराश के साथ ही ऑक्सीजन लेवल का गिरना सामने आ रहा है। इसके अलावा कई केस ऐसे हैं, जहां पेशेंट में किसी तरह के कोई लक्षण नहीं, फिर भी अचानक ऑक्सीजन का लेवल घट जाता है और सेचुरेटेड ऑक्सीजन का लेवल 50% तक पहुंच जाता है। ऐसा होने का एक ही कारण माना जा रहा है और वो है हैप्पी हाइपोक्सिया। तो आईये जान लेते हैं इससे जुडी कुछ बातें। क्या है हाईपोक्सिया?ब्लड में ऑक्सीजन के लेवल का कम हो जाना हाईपोक्सिया कहलाता है। यहाँ आपको बता दें कि एक हेल्दी पर्सन के खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन 95% या इससे अधिक है, लेकिन इनदिनों कोरोना पेशेंट में ऑक्सीजन सेचुरेशन घटकर 50% तक पहुंच रहा है। इसके कारण किडनी, ब्रेन, हार्ट और अन्य इम्पोर्टेन्ट बॉडी पार्ट्स काम करना बंद कर सकते हैं। कोरोना पेशेंट्स में शुरू में कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है , वह ठीक और हैप्पी ही नजर आता है। क्या होता है हैप्पी हाईपोक्सियाज्यादातर मेडिकल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि लंग्स में खून की नसों में थक्के जम जाते हैं और इसे ही हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण माना जा रहा है। इन्फेक्शन होने पर बॉडी में सूजन बढ़ती जाती है। इससे सेलुलर प्रोटीन रिएक्शन तेज हो जाती है। तब खून के थक्के बनने शुरू हो जाते हैं। इससे लंग्स को प्रॉपर मात्रा में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं होती पाती और ब्लड में ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होना शुरू हो जाता है। दो दिन पहले तक सामान्य नजर आ रहा मरीज एकाएक वेंटिलेटर पर पहुंच जाता है। हैप्पी हाईपोक्सिया पर कैसे रखें नजरइस पर नजर रखने के लिए covid पेशेंट को टाइम टाइम पर पल्स ओक्सिमीटर के जरिए ऑक्सीजन सेचुरेशन को देखने की जरुरत है। इसके अलावा लिप्स का रंग बदलने लग जाता है यानी होंठ हल्के नीले होने लगते हैं। स्किन रंग भी लाल या बैंगनी होने लगता है। अगर गर्मी न हो तो भी लगातार पसीना आना शुरू हो जाता है। अगर पेशेंट का ऑक्सीजन लेवल गिरता दिखाई दें , तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाने युवाओं में ज्यादा हो रहा हैप्पी हाईपोक्सिया का असर ऐसा इसलिए, युवाओं की इम्युनिटी ज्यादा स्ट्रोंग होती है। उनकी एनर्जी अन्य लोगों के मुकाबले ज्यादा होती है। वहीँ ऐज अधिक है तो ऑक्सीजन सेचुरेशन का 94% से 90% होना भी महसूस होता है लेकिन युवाओं को 80% ऑक्सीजन सेचुरेशन पर भी कोरोना के लक्षण महसूस नहीं हो पाते हैं और वह हाइपोक्सिया को सहन कर लेते हैं। उन्हें पता ही नहीं चलता कि ऑक्सीजन का स्तर घट रहा है।

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वर्ल्ड थैलेसीमियां डे आज, शादी से पहले हर महिला-पुरूष जरूर करवाएं ब्लड टेस्ट

वर्ल्ड थैलेसीमियां डे आज, शादी से पहले हर महिला-पुरूष जरूर करवाएं ब्लड टेस्ट

वेब खब्रिस्तान: आज के इस दौर में जहाँ एक तरफ सारी दुनिया कोरोना का कहर झेल रही हैं । वहीँ दूसरी तरफ कुछ ऐसे बच्चे हैं। जिनकी उम्र खेलने कूदने की हैं लेकिन बचपन से ही एक ऐसी बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं जिसके इलाज के लिए उन्हें बार बार ब्लड बैंक के चक्कर लगाने पड़ते हैं। हम बात कर रहे हैं थैलेसीमियां बीमारी की। इस बीमारी के लक्षण जानने के बाद भी खुद को बचा पाना बेहद मुश्किल है। सोशल वर्कर त्रिशला ने क्या कहा इस बारे में सोशल वर्कर त्रिशला जो थेलेसिमियां के बच्चों के लिए ब्लड ARRANGE करती हैं, का कहना है की यह बीमारी ऐसी है की इसमें बच्चे को बार बार ब्लड चढ़ाने की जरूरत होती है। त्रिशला ने कहा की अगर बात जालंधर की करें तो अकेले जालंधर में 400 -500 बच्चे हैं जिनको महीने में 2 -3 बार ब्लड चढ़ाना पड़ता है। इसके अलावा उन्होंने बताया की शादी से पहले मेल- फीमेल को अपना हीमोग्लोबिन टेस्ट जरूर करवा लेना चाहिये। यह एक HEREDITARY डिजीज है 8 मई यानि आज के दिन वर्ल्ड थैलेसिमिया डे पूरे वर्ल्ड में मनाया जा रहा हैं। इस दिन मोटीव लोगों को इसके प्रति जागरूक करना हैं। दुनिया में बहुत से बच्चे ऐसे हैं जो इस बीमारी से जूझ रहें हैं। वहीँ आपको बता दें, थैलेसीमिया बच्चों को उनके माको मनाने काता-पिता से मिलने वाला HEREDITARY BLOOD DISEASE है। क्या होता है थैलेसीमियां यह एक HEREDITARY बीमारी है जो जनरेशन टू जनरेशन चलती रहती हैं। इसमें रेड ब्लड सेल्स की संख्या बहुत तेज़ी से गिरती है और नए रेड ब्लड सेल्स नहीं बनते या फिर बहुत देरी से बनते हैं। ऐसे में पेशेंट की बॉडी में ब्लड नहीं बनता और खून की कमी होनी शुरू हो जाती है। फिर इसके लिए पेशेंट को बार बार बाहरी खून चढ़ाने की जरूरत होती है। क्या है इसके लक्षण अगर किसी बच्चे को बार बार कोई बीमारी हो रही है। साथ ही बॉडी में कमजोरी और सर्दी जुकाम रहता है। इसके अलावा ऐज के ACCORDING बॉडी का विकास नहीं हो रहा हो, तो यह थेलेसिमियांके लक्षण हो सकते हैं। बचाव के लिए क्या करें इसके बचाव के लिए शादी से पहले हर महिला और पुरूष को अपना ब्लड टेस्ट जरूर करवा लेना चाहिये। इसके अलावा जो लेडीज प्रेग्नेंट है वह अपना टेस्ट जरूर करवाएं। हो सके तो पेशेंट का हीमोग्लोबिन 11 -12 बनाये रखने की कोशिश करें।

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World Asthama Day आज, कोरोना की दूसरी लहर के चलते अस्थमा पेशेंट्स को ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत

World Asthama Day आज, कोरोना की दूसरी लहर के चलते अस्थमा पेशेंट्स को ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत

वेब खब्रिस्तान: कोरोना की दूसरी लहर के चलते देश की जनता को बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इन सब के बीच अस्थमा पेशेंट्स को इसकी मार ज्यादा झेलनी पड़ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि अस्थमा पेशेंट्स को सांस लेने में दिक्कत होती है। वहीँ इनदिनों कोरोना और अस्थमा बीमारी के लक्षण भी कॉमन माने जा रहे हैं। आज वर्ल्ड अस्थमा डे है और पूरे विश्व में इस दिन को मनाया जा रहा है। अस्थमा लंग्स से संबंधित बीमारी है, इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 4 मई को अस्थमा दिवस मनाया जाता है। क्या है अस्थमा बीमारी? अस्थमा लंग्स की बीमारी है। जिसमें सांस की नली में सूजन आने के कारण खून सप्लाई करने वाली नलियों में खून जमने लगता है। जिसमे अस्थमा पेशेंट्स के पास से सांस लेते टाइम आवाज आती है और खांसी की भी प्रॉब्लम शुरू हो जाती है। नेचुरल तरीके से करें अस्थमा की केयर इस दौर में अस्थमा पेशेंट्स को सबसे ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। इसके लिए नेचुरल तरीके से यानि हर घर में मिलने वाली कलौंजी को इस्तेमाल कर इलाज किया जा सकता है। कलौंजी में एक बढ़िया एंटीऑक्सीडेंट गुण होता है, यह सांस की नली की मसल्‍स को ढीला करती है, इम्‍यूनिटी मजबूत करती है और खांसी, दमा, ब्रोंकाइटिस आदि को ठीक करती है। इसके अलावा कलौंजी में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हेल्‍थी फैट जैसे पोषक तत्‍व भी शामिल हैं। कलौंजी यूज़ करने का तरीका डॉक्टर परविंदर बजाज के अनुसार कलौंजी का पाउडर बना लें। फिर आधा चम्मच कलौंजी और आधा चम्मच शहद के साथ मिक्स करके खाने से अस्थमा में राहत मलेगी। इसके अलावा आप चाहे तो इसका ऑयल भी ले सकते हैं। इसके लिए आपको 5 से 10 ड्रॉप्‍स गुनगुने पानी से लेने हैं। रखें कुछ खास बातों का ध्यान अस्थमा और कोरोना वायरस दोनों ही बीमारियाँ पेशेंट के लंग्स पर असर डालती है। इसलिए अगर किसी अस्थमा पेशेंट का अस्थमा बढ़ा हुआ है, तो कोरोना होने का खतरा अधिक रहता है। इसके लिए तुरंत डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है। वहीँ अगर अस्थमा पेशेंट को मास्क लगाने में इक्कत होती है, तो घर से बाहर कम निकलें। इसके अलावा अस्थमा पेशेंट को covid इन्फेक्शन हो जाता है तो covid वैक्सीन तब तक न लें। जब तक वह पूरी तरह से रिकवर न हो जाये।

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हर रोज खाली पेट नीम की पत्तियां खायेंगे, तो होंगे बहुत से फायदें

हर रोज खाली पेट नीम की पत्तियां खायेंगे, तो होंगे बहुत से फायदें

वेब डेस्क@wk :नीम की पत्तियां खाने में थोड़ी कड़वी जरूर होती है, लेकिन यह हमारी हेल्थ को बहुत से बेनेफिट्स देती है। इनदिनों अगर कोरोना से बचने की बात की जाये तो उसके लिए नीम रामबाण का काम कर सकती है। नीम की पत्तियां इम्यून सिस्टम को स्ट्रोंग बनाने से लेकर हार्ट और लीवर को हेल्दी रखने में हेल्प करती है, मगर इसके कड़वे स्वाद की वजह से हम इसको खाना अवॉयड करते हैं। आपको बता दें, आयुर्वेद के अनुसार रोज सुबह खाली पेट नीम की पत्तियां खाने से बॉडी का इम्यून सिस्टम स्ट्रोंग होता है साथ ही यह फिजिकल डिसऑर्डर को ठीक करने में हेल्प करता है। इम्युनिटी पॉवर को करती है स्ट्रोंगयदि आप भी अपनी इम्युनिटी को बूस्ट करना चाहते हैं, तो उसके लिए आप नीम की पत्तियों का सेवन जरूर करें। नीम में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है। जो इम्युनिटी को स्ट्रोंग करने में बहुत पावरफुल है। दांतों के बहुत ही लाभदायकएक शोध के मुताबिक नीम दांतों के लिए मेडिसिन का काम करता है। दांतों में अगर दर्द हो, तो नीम की दातुन करने से आराम मिलता है। वहीँ दांतों में कीड़ा लगना बहुत ही आम प्रॉब्लम है। इस प्रॉब्लम से निजात पाने के लिए नीम की दातुन करने से कीड़ा निकल जाता है। नीम दातों के लिए माउथ फ्रेशनर का काम भी करती है। पेट को दुरूस्त बनाता हैअगर आपका digestive सिस्टम ठीक नहीं रहता है। हर समय पेट में जलन, कब्ज और गैस की प्रॉब्लम होती है, तो उसके लिए आज रोज सुबह खाली पेट नीम की पत्तियों का सेवन शुरू कर दें। नीम पेट के toxins को बाहर निकाल कर पेट को दुरूस्त करता है। स्किन प्रोब्लेम्स को ठीक करता हैटीनएज में आने के बाद लड़कियों के फेस पर काले धब्बे और मुहासें निकलने लग जाते है। जिसके कारण फेस dull लगना शुरू हो जाता है। लेकिन अगर आप नीम की पत्तियों का पेस्ट बना कर फेस पर लगायेंगे, तो बहुत जल्दी आराम मिलेगा। नीम में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेटरी गुण होता है, जो स्किन को एजिंग और मुहांसों की समस्या से निजात दिलाता है। चैत्र के मौसम में जरूर खाएं नीम की पत्तियांसालों से आयुर्वेद में नीम को एक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। आपको बता दें, नीम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल चैत्र के मौसम में किया जाता है, क्योंकि इस मौसम में बैक्टीरियल इन्फेक्शन होने का खतरा ज्यादा होता है। यदि आप नीम की पत्तियां डायरेक्टली नहीं खा पाते हैं, तो आप नीम की पत्तियों की चटनी बना कर खाने के साथ ले सकते हैं। चटनी कैसे बनाये नीम की 10 पत्तियां लेकर पीस लें। इसमें 2 बड़े चम्मच गुड़ ऐड करें। फ्राइंग पैन में थोडा सा घी डाल कर उसको गरम कर लें फिर चुटकी भर जीरा डालें। अब नीम और गुड़ के पेस्ट को इसमें ऐड कर दें और 10 मिनट के लिए पकने दें। चटनी बन कर तैयार हैं।

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स्वाद कड़वा पर असरदार बहुत है करेला

स्वाद कड़वा पर असरदार बहुत है करेला

पैरों में जलन पर करेले के पत्तों का रस निकालकर मालिश करने से लाभ होता है वेब डेस्क@wkचौथाई कप पानी और करेले का रस तथा स्वादानुसार नमक मिलाकर बार- बार पीने से हैजा रोग में लाभ होता है। उल्टी और दस्त भी रुक जाते हैं। उदर कृमि की शिकायत होने पर चौथाई कप करेले का रस सेवन करना लाभदायक है। करेला वृक्क व मूत्राशय की पथरी को टुकड़े-टुकड़े कर पेशाब के साथ बाहर लाता है। करेले की सब्जी और दो करेलों का रस प्रात:काल सेवन करें। वेब खबरिस्तान के साथ पढ़िए करेला खाने के तरीके और उसके फायदे। रक्त की शुद्धि करता है 50 ग्राम करेले का रस नित्य कुछ दिनों तक सेवन करते रहने से शरीर का दूषित रक्त साफ होता है। 3 से 9 वर्ष तक के बच्चों को आधा चम्मच करेले का रस प्रातः काल पिलाने से यकृत ठीक होता है। यह पेट को साफ रखता है। यकृत बढ़ने और जलोदर होने पर 50 ग्राम करेले का रस पानी में घोलकर पिलाने से लाभ होता है। पीलिया रोग में एक करेला पानी में पीसकर सुबह-शाम दिन में दो बार सेवन करने से लाभ होता है। जोड़ों के दर्द में करेलों के पत्तों के रस की मालिश करने से लाभ होता है। 25 ग्राम करेले का रस पानी में मिलाकर प्रातः काल तीन बार सेवन करने से बढ़ी हुई तिल्ली (स्पलीन) कट जाती है। मधुमेह रोगी को 100 ग्राम पानी में 15 ग्राम करेले का रस मिलाकर प्रातः काल चार बार तीन महीने तक सेवन करायें। भोजन में करेले की सब्जी दें।

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स्वाद मत जाइए गुण देखिए, बहुत काम का है ये पेड़

स्वाद मत जाइए गुण देखिए, बहुत काम का है ये पेड़

घर में लगाने से कई बिमारियों का इलाज मिल जाएगा वेब डेस्क@wk प्रात:काल 25 ग्राम नीम की पत्तियों का रस पीने से दाद, खाज, बल्ड प्रैशर में लाभ होता है। दाद में नीम के 10 ग्राम पत्तों का रस प्रातःकाल सेवन करना चाहिए। नीम की ताजा पत्तियाँ प्रात:काल प्रतिदिन 15 दिनों तक सेवन करने से रक्तदोष दूर होकर फोड़े, फुन्सियाँ और खुजली दूर हो जाती है। अप्रैल महीने के पहले सात दिनों में नीम की कोपलें घोटकर खाने से रक्त के रोग और वात, पित्त और कफ का शमन होता है। 30 ग्राम नीम की कोपलें पीसकर पानी में मिलाकर प्रात:काल पीने से लाभ होता है। दाग दूर करती है नीम नीम की 30 पत्तियों को पीससकर 1 कप पानी में मिलाकर पिलाने से हैजा दूर हो जाता फोड़ों से मवाद बहने पर नीम के पत्ते पीसकर शहद में मिलाकर लगाने से लाभ होता है। 50 ग्राम नीम के पत्तों को दही में पीसकर लगाने से दाद-खाज मिट जाता है। नीम की पत्तियाँ, फूल, निबौली सूखे हुए समान मात्रा में ले कर, पीसकर, 1 चम्मच दिन में 1 बार सेवन करें। मावली बापची पीसकर सुबह-शाम ठंडे पानी से सेवन करने पर सफेद दाग दूर हो जाते हैं। नीम की निबौली पीसकर सिर पर लगाने से बालों का झड़ना रुक जाता है और जुएँ भी मर जाती हैं। पानी में नीम के पत्ते उबालकर प्रातःकाल स्नान करें। 20 पत्ते 1 कप पानी में उबालकर पानी छानकर प्रात:काल खाली पेट 21 दिन तक पीने से चर्म रोग दूर होते हैं।पेट के कीड़े मरते हैं 5 बूंद तकनीम का तेल पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। नासूर रोग मेंनीम की पत्तियों की पुल्टिश बनाकर बांधने से लाभ होता है। बालों को नीम और बेर के पत्तों को पानी में उबालकर धोने से बालों का गिरना बंद हो जाता है। बाल लंबे और घने होते हैं। जुएँ भी मर जाती हैं। पानी के साथ नीम के पत्तों को पीसकर लेप करने से फोड़े दब जाते हैं। नीम के पत्ते शहद के साथ पीसकर लेप करने से फोड़े पककर फूट जाते हैं। घी के साथ नीम के पत्तों को पीसकर आँच पर गर्म करके लेप करने से फोड़ों से बने घाव भर जाते हैं। पत्तों उबालकर घावों को धोने से लाभ होता है। उबालकर नीम के पत्तों कोसेवन करने से चेचक में लाभ होता है।

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एसिडिटी से हैं परेशान? आपके किचन में छिपे हैं 15 उपचार

एसिडिटी से हैं परेशान? आपके किचन में छिपे हैं 15 उपचार

किचन में मौजूद बहुत सी चीजें आपकी समस्या दूर करने में कारगर वेब डेस्क@wkचाय-कॉफी ज्यादा और पानी कम पीने वाले सबसे ज्यादा एसिडिटी की समस्या से जूझते रहते हैं। गलत जीवनशैली और खानपान के चलते भी एसिडिटी की समस्या होती ही है। ज्यादा खट्टी या मसालेदार चीजें खाने के अलावा नशे की लत, तनाव में रहते पूरी नींद नहीं ले पाने वाले लोगों को इससे बचना आसान नहीं है। एसिडिटी की समस्या के इलाज को लोग मैडीसन का इस्तेमाल करते हैं, जोकि अन्य समस्याओं में घिर जाते हैं। लेकिन इसका कारगर इलाज हमारे घर के किचन में ही है। हम बताते हैं कि किचन में मौजूद बहुत सी चीजें आपकी इस समस्या को दूर करने में कारगर हैं। बताते हैं कि क्या करना है। एसिडिटी के लक्षण जी मिचलाना, सीने में जलन, खट्टी डकारें पेट में दर्द, कभी-कभी डकार के साथ उल्टी भी आना।इन तरीकों से दूर हो सकती है एसिडिटी 1-कम चीनी वाला ठंडा दूध एसिडिटी को खत्म करने में सहायक है।2-एसिडिटी को दूर करने के लिए चार या पांच काली मुनक्का रात भर भिगोएं और सुबह एक गिलास पानी के साथ अच्छे से चबाकर खाएं। इससे एसिडिटी से राहत मिलती है।3-गुलकंद भी एसिडिटी से राहत पहुंचा सकता है। ऐसे में गुलकंद को एक गिलास पानी में घोलें। अब थोड़े-थोड़े समय पर एक-एक घूंट इस घोल को पीने से एसिडिटी दूर हो जाती है।4-पपीता भी एसिडिटी को दूर करने के लिए अच्छा विकल्प है। ऐसे में आप नियमित रूप से पपीते का जूस पीते हैं तो पेट के रोग भी दूर हो जाते हैं।5-अगर आप चाहते हैं कि एसिडिटी ना बने तो उसके लिए दोपहर के खाने से पहले सौंफ का पानी नियमित रूप से पिएं।6-पुदीने से इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है। ऐसे में पुदीने की पत्तियों के रस में काला नमक और नींबू का रस को मिलाकर पीने से एसिडिटी की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा एक्सपर्ट खाने में पुदीना, अदरक, नींबू की चटनी आदि को जोड़ने की सलाह देते हैं। 7-अनानास का जूस भी एसिडिटी को दूर करने में बेहद असरदार है। ऐसे में आप आधा गिलास अनानास का जूस खाने के बाद नियमित रूप से पिएं।8-तुलसी के पत्तों से एसिडिटी को दूर किया जा सकता है। इसके लिए आप तुलसी के पत्ते उबालकर उन्हें ठंडा करके एक गिलास में छानकर पिएं।9-लौकी और सफेद कद्दू का जूस पीने से एसिडिटी दूर हो जाती है।10- केले में पोटेशियम पाया जाता है जो शरीर में अतिरिक्त एसिड को बनने से रोकता है इसीलिए रोज एक पका केला खाने से एसिडिटी नहीं होती है।11-अगर आप सच में भुना जीरा अदरक और कड़ी पत्ता डालकर नियमित रूप से पिएं तो इससे ना केवल हाजमा सही होता है बल्कि ये एसिडिटी को बनने से रोकता है। 12-शहद की मदद से भी एसिडिटी को बनने से रोका जा सकता है। 2 टीस्पून शहर 2 टीस्पून नींबू 1 टीस्पून अदरक को मिलाएं और एक साथ में पी जाएं एसिडिटी से तुरंत राहत मिलेगी।13-खाने के बाद अगर थोड़ा सा जीरा फांका जाए तब भी यह समस्या दूर हो जाती है।14-अदरक और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर खाने से एसिडिटी की समस्या दूर हो जाती है। नोट- एसिडिटी की समस्या के ज्यादा बढ़ने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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आयोडीन की कम या ज्यादा मात्रा से हो सकता है थायराइड

आयोडीन की कम या ज्यादा मात्रा से हो सकता है थायराइड

वेब डेस्क @wkआयोडीन की कमी या ज्यादा मात्रा होने से थायराइड की समस्या पैदा हो जाती है। जिसे हाइपरथायरायडिज्म या हाइपरथायडिज्म हो सकता है। इस बीमारी थायराइड में व्यक्ति का वजन बहुत बढ़ जाता है या वजन बहुत घट जाता है। क्योंकि यह समस्या अब आम हो चुकी है। थायराइड अब कई लोगों की समस्या बन चुका है। आयोडीन के अलावा थायराइड के कई कारण संभव है। इनमें पिट्यूटरी रोग, थायराइडल रिसाव, आॅटोइम्यून डिसआॅर्डल शामिल है। हाइपरथायिडज्म से बचने के लिए यह बहुत आवश्यक है। आपको किस प्रकार का थायरायड है। इसकी जांच अवश्य कराएं और समय-समय पर इसकी जांच करवाते रहें।हाइपरथायडिज्म को नियंत्रित करने के लिए Þडाइट को प्लान करना जरूरी है। इससे बीमारी को काबू किया जा सकता है। साथ ही साथ आप योग एवं व्यायाम करें। डॉक्टर की सलाह जरु र लेते रहें, यह बहुत आवश्यक है। आप अपने सोने एवं उठने का समय निर्धारित करें एवं समय पर सोयें एवं समय पर जागें। थायराइड दो प्रकार के होते हैं: 1.हाइपरथायडिज्म2.हाइपोथायरायडिज्म हाइपरथायिडज्म क्या है? थायरायड ग्रंथि व्यक्ति के गले के बीच में पाई जाती है, जो आपके शरीर को ऊर्जा के उपयोग को विनियमति करने के लिए हार्मोन जारी करता है। हाइपरथायिडज्म के दौरान व्यक्ति की थायरायड ग्रंथि ठीक प्रकार से थायरायड हार्मोन बनाने में सक्षम नहीं होती हैं और अधिक मात्रा में इन हार्मोन का उत्पादन होता है। यह रोग महिलाओं में अधिक देखने को मिलता है। इसे नियंत्रण में करना बहुत आवश्यक होता है। हाइपरथायरायिडज्म के लेवल? एक रोगी को हाइपरथायरायडिज्म होने के लिए उनके पास उच्च थायराइड हार्मोन का स्तर होना चाहिए। कभी-कभी सभी अलग-अलग थायराइड हार्मोन उच्च नहीं होते हैं और विभिन्न थायराइड हार्मोन में से केवल एक या दो उच्च होते हैं। बता दें कि शरीर में हाइपरथायरायडिज्म में पिट्यूटरी द्वारा उत्पादित थायराइड-उत्तेजक हार्मोन कम हो जाएगा। इस प्रकार हाइपरथायरायडिज्म का निदान लगभग हमेशा कम टीएसएच स्तर से जुड़ा होता है। यदि टीएसएच का स्तर कम नहीं है, तो अन्य परीक्षण चलाने होंगे। थायराइड हार्मोन स्वयं (टी 3, टी 4) में वृद्धि होगी। थायराइड हार्मोन खुद (टी 3, टी 4) बढ़ाए जाएंगे। हाइपरथायिडज्म के लक्ष्ण -गले में सूजन महसूस होना।-भूख बहुत अधिक लगना।-मांसपेशियाँ कमजोर होना।-जोड़ों में दर्द होना।-मासिक धर्म की अनियमतिता।-बाल झड़ना।-अत्यधिक तनाव होना।-दिल की धडकन तेज़ होना। -त्वचा का सेंसटिव होना-अचानक से अधिक सर्दी या अधिक गर्मी लगना।-त्वचा में अत्यधिक रूखापन आना।-वजन का बहुत तेज़ी से कम होना।-आपकी आवाज में परिवर्तन आना।-नींद की कमी।-रक्त शर्करा में वृद्धि होना।-मतली और उल्टी आना। हाइपरथायिडज्म की जड़ -शरीर में आयोडीन की मात्रा ज्यादा हो जाना।-थायरायड गांठों का अत्यधिक रूप से कार्य करना।-अंडाशय में ट्यूमर।-थायरायड ग्रंथि में ट्यूमर। हाइपरथायिडज्म डाइट -आप खाने में हरी सब्जियां जरूर खाते रहें।-अखरोट का सेवन करें।-मछली एवं अंडे का सेवन बहुत महत्वपूर्ण है।-फूल गोभी, ब्रोकली एवं पत्ता गोभी को कच्चा खाने की बजाए अच्छे से पका कर खाएं।-ड्राई फ्रूट का सेवन भी करें। हाइपरथायिडज्म डाइट प्लान हर सुबह की शुरुआत गुनगुने पानी के साथ ही करें।नाश्ता में पोहा, दलिया, ओट्स और फल खाएं।दोपहर को भोजन में 2 रोटी, हरी सब्जी, दाल, सलाद और छाछ लें।शाम के समय आप चाय के साथ बिस्कुट या फिर सूप ले सकते हैं।रात को खाने में 1 से 2 रोटी, सब्जी और दाल लें।सोते समय आपको गर्म दूध लेना है। इनसे करना होगा परहेज अतिरिक्त आयोडीन मछली दूध और डेयरी पनीर अंडे की जर्दी आयोडीन युक्त नमक आयोडीन युक्त पानी

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