International Men's Day: अधिकतर पुरुष होते हैं इन पांच बीमारियों के शिकार



19 नवंबर को मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस

खबरिस्तान नेटवर्क। पुरुष होना समाज में विशेषाधि‍कार की श्रेणी में आ जाता है। लेकिन दूसरी तरफ पुरुष अपने लैंगिक असमानता के जोख‍िमों से भी मुंह नहीं मोड़ सकता। स्त्र‍ियों की तुलना में पुरुषों को कुछ शारीरिक समस्याएं ज्यादा घेरती हैं। वहीं कुछ बीमारियां ऐसी भी हैं जिसका श‍िकार सिर्फ पुरुष ही आसानी से बन जाते हैं। आम चलन में पुरुष समाज में स्त्री से ज्यादा ताकतवर प्राणी के तौर पर स्थापित है। लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि कुछ गंभीर बीमारियों की जद में भी पुरुष ज्यादा आते हैं। आज अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस पर आइए कुछ ऐसी ही बीमारियों के बारे में जानते हैं जिनका खतरा महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में होता है।

कार्ड‍ियोवस्कुलर डिजीज

ऐसा देखा गया है कि स्त्री-पुरुष दोनों जेंडर में सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर अलग अलग होता है। युवा महिलाओं की तुलना में युवा पुरुषों में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है। पुरुषों में  हाई ब्लड प्रेशर की सबसे बड़ी वजह सिस्टोलिक हाई बीपी ही है। यही हाइपरटेंशन का कारण बनता है। इस तरह पुरुषों की रक्त वाहिन‍िकाओं में प्रेशर ज्यादा हो सकता है।

हाइपरटेंशन


हाइपरटेंशन पुरुषों का सबसे बड़ा शत्रु होता है। इससे हृदय रोग और स्ट्रोक पुरुषों में मृत्यु के पहले और दूसरे सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) की मात्रा प्राकृतिक रूप से अधिक होती है। महिलाओं में फीमेल हार्मोन एस्ट्रोजन भी हृदय रोगों के लिए रक्षा कवच का काम करता है।

प्रोस्टेट कैंसर

प्रोस्टेट पुरुषों के प्रजनन तंत्र की एग्जोक्राइन ग्लैंड है। ये ग्लैंड ब्लैडर के ठीक नीचे और रेक्टम के ठीक सामने स्थित होती है। प्रोस्टेट कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जो केवल पुरुषों को प्रभावित करती है। इसमें कैंसर कोशिकाएं प्रोस्टेट में विकसित होती हैं। शुरुआती दिनों में प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे कैंसर विकसित होने पर इसके गंभीर लक्षण नजर आते हैं। यह बीमारी 45 से 50 साल के पुरुषों में देखने को मिलती है। यह समस्या बढ़ते मोटापे और गलत लाइफस्टाइल के कारण हो सकती है।

फेफड़ों की बीमारी

फेफड़ों की बीमारी में भी पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है। एक आकलन के अनुसार कैंसर से मरने वाले पुरुषों में सबसे अधिक फेफड़ों के कैंसर से मरते हैं। इसमें फेफड़ों की कोशिकाएं विकसित होकर टय़ूमर बना लेती हैं। फेफड़ों के कैंसर में धूम्रपान एक मुख्य वजह है, जिसमें भले ही महिलाएं भी बड़ी संख्या में हैं लेकिन नंबर एक पर अभी भी पुरुष ही हैं। वहीं बदलते पर्यावरणीय माहौल में भी वर्क‍िंग महिलाओं से ज्यादा संख्या पुरुषों की है। पुरुष महिलाओं से ज्यादा प्रदूषण के दुष्प्रभावों को झेलते हैं। इसका मुख्य कारण है कि पुरुष को घर से कमाने के लिए बाहर निकलता है तो ऐसे में उसके शरीर पर प्रदूषण की मार ज्यादा पड़ती है।

पुरुषों में स्क‍िन कैंसर का खतरा ज्यादा

ऐसा देखा गया है कि 50 की उम्र से ज्यादा उम्र वाले पुरुषों में स्क‍िन कैंसर का खतरा महिलाओं से ज्यादा होता है। पुरुषों में इस कैंसर के होने की खास वजहों में उनका सनलाइट से ज्यादा एक्सपोजर और किसी तरह की सावधानी बरतने में चूकना हो सकती है। इसीलिए इस बीमारी से मृत्यु की संभावना भी उन्हें महिलाओं से ज्यादा होती है। पुरुषों में स्किन कैंसर खोपड़ी और कान के आस-पास होता है क्योंकि ये दो स्थान अधिक खुले रहते हैं।

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