तंदरुस्ताये नमः

प्याज़ की गर्म तासीर होने के कारण और इसके अधिक सेवन से शरीर को नुक्सान होते हैं जानें  

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प्याज में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। अगर ये तत्व बॉडी में अधिक मात्रा में हो जाये तो उससे आपकी शुगर की मात्रा बढ़ सकती है

मोबाइल दे रही मायोपिया जैसी बीमारी को दस्तक क्या कहा एक्सपर्ट ने जानें

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मायोपिया का सबसे ज्यादा असर बच्चों में देखने को मिल रहा है


International Nurse Day 2022: आखिर कौन थी फ्लोरेंस नाइटिंगेल

International Nurse Day 2022: आखिर कौन थी फ्लोरेंस नाइटिंगेल

ख़बरिस्तान नेटवर्क। किसी भी तरह की बीमारी होने पर आप और हम इलाज के लिए हॉस्पिटल जाते हैं और डॉक्टर को दिखाते हैं। अगर कोई गंभीर बीमारी हो तो डॉक्टर हमें एडमिट कर लेता है और एडमिट होने के बाद हमारी जिम्मेदारी एक नर्स के कंधों पर आ जाती है। लेकिन क्या आपने कभी उस नर्स के बारे में सोचा है जो दिन रात एक कर आपकी सेवा में जुटी होती है।उनके इस योगदान को याद करने और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए इंटरनेशनल नर्सेस डे (International Nurse Day) 12 मई यानि आज मनाया जा रहा है। कब हुई थी इस दिन को मनाने की शुरुआत <iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/usNyuQRyRhk" title="YouTube video player" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe> बता दें इस दिन को मनाने की शुरूआत 1974 में हुई थी। मार्डन नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल (Florence Nightingale) के जन्मदिन को पूरी दुनिया इंटरनेशनल नर्सेस डे के रूप में मनाती है। मरीजों के प्रति उनकी सेवा, साहस और उनके सराहनीय कार्यों के लिए यह दिन हर साल 12 मई को सेलिब्रेट किया जाता है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स बांटती है किट इस दिन इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स द्वारा नर्सेस को किट बांटी जाती है जिमसें उनके काम से संबंधित कई चीजें शामिल होती है। यह दिन नर्सों के प्रति अपना आभार जताने का माना जाता है। वहीँ इनके सहयोग और सेवा के बिना स्वास्थ्य सेवाएं अधूरी रहती हैं। इसे भी पढ़ें...https://webkhabristan.com/tandrustai-namah/know-what-to-do-at-home-to-take-care-of-a-premature-baby-8175 इंटरनेशनल नर्सेस डे थीम ये दिन हर साल एक थीम पर आधारित होता है। इस साल कि थीम रखी गयी है कि नर्सिंग में निवेश करें और वैश्विक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के अधिकारों का सम्मान करें। तो अबकी बार अगर आप हॉस्पिटल जाएँ तो डॉक्टर के साथ साथ नर्स का भी सम्मान करें।

https://webkhabristan.com/tandrustai-namah/international-nurse-day-2022-8593
गर्मी मे खाने की चीजों से भी मूड पर इफेक्ट पड़ता है, लेकिन कैसे, जानते हैं

गर्मी मे खाने की चीजों से भी मूड पर इफेक्ट पड़ता है, लेकिन कैसे, जानते हैं

वेब ख़बरिस्तान। गर्मी और हमारा मूड ,इन दोनों का आपस में गहरा नाता है। जैसे-जैसे इस मौसम में टेम्परेचर बढ़ता है वैसे-वैसे हमारा मूड भी उसी के according काम करना शुरू कर देता है। ऐसे में कुछ खाने की चीजें हैं जो हमारे मूड पर असर डालती हैं। बता दें कि अमेरिका में एरिजोना रिसर्च सेंटर की एक स्टडी में पाया गया है कि हाई टेम्परेचर की वजह से लोगों को ज्यादा गुस्सा आता है और वहीँ लोग रोड पर कार चलाते टाइम ज्यादा हॉर्न बजाते हैं। इतना ही नहीं वही लोग दूसरे व्यक्ति से झगड़ा करने का कारण भी बनते हैं। गर्मी में क्यों होता है मूड में ट्रांसफॉर्मेशन बता दें कि गर्मी में इंसानों के शरीर का स्ट्रेस हॉर्मोन धीरे धीरे बढ़ने लगता है। स्ट्रेस हॉर्मोन को कॉर्टिसोल भी कहते हैं। ठंड में कॉर्टिसोल का लेवल कम रहता है, लेकिन जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे कॉर्टिसोल का लेवल भी शरीर में बढ़ जाता है। इससे शरीर को नुकसान पहुंचता है। कहने का मतलब है कि ज्यादा टेम्परेचर का असर सीधा दिमाग पर पड़ता है। द‍िमाग को जब पर्याप्‍त ऑक्‍सीजन और हाइड्रेशन नहीं मिल पाता है, तो वो र‍िएक्‍ट करना शुरू हो जाता है। जिसका नतीजा हमें ड‍िप्रेशन, तनाव, गुस्‍से के रूप में देखने को मिलता है। वहीँ अगर हम आयुर्वेद कि माने तो न्यूट्रिशन और खाने की चीजों से आपके मूड पर इफेक्ट पड़ता है। ऐसे में आपको इस मौसम में कौन सी चीजों से दूर रहना चाहिये, जान लेते हैं। <iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/t3OOljwCzpY" title="YouTube video player" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe> कॉफी वर्कआउट करने और थकान दूर करने के लिए अक्सर लोग कॉफी पीते हैं। कॉफी पीने से आप एनर्जेटिक महसूस करते हैं। इसमें कैफीन होता है। ऐसे में एनर्जी हाई होने की वजह से ये दिमाग को एक ट्रिगर करता है और गुस्से को बढ़ा सकता है। इसलिए ज्यादा कॉफी न पीएं। टमाटर- आयुर्वेद की मानें तो टमाटर की तासीर गर्म होती है। इस वजह से ये गुस्से का कारण बन सकता है।मसालेदार खाना इससे शरीर में गर्मी बढ़ती है। अगर आपके शरीर में पहले से गर्मी है तो मसालेदार और हैवी खाना न खाएं। गेहूं और मिल्क प्रोडक्ट गेहूं और मिल्क प्रोडक्ट में कैसीन पाया जाता है, जो गुस्सा बढ़ाता है। इसलिए कम मात्रा में ही गेहूं और डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करें। ये भी पढ़ें: https://webkhabristan.com/tandrustai-namah/there-are-many-health-benefits-of-eating-stale-roti-know-how-7739 इस खबर में दी गयी जानकारी आपको जागरूकता मात्र के लिए गयी है। वहीँ अगर आप पहले से ही किसी भी बीमारी से ग्रस्त हैं तो ऊपर बताई हुई जानकरी को अमल में लाने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से कंसल्ट जरुर कर लें।

https://webkhabristan.com/tandrustai-namah/summer-food-affects-mood--8555
अस्थमा और जिम का आपस में क्या है नाता, जानें

अस्थमा और जिम का आपस में क्या है नाता, जानें

वेब ख़बरिस्तान। आप में से बहुत से लोग होंगे, जो रेगुलर जिम जाने के शौक़ीन होंगे। ऐसे में जिम जाने से आपके बहुत से हेल्थ प्रॉब्लम में निजात भी मिली होगी। ऐसी ही एक प्रॉब्लम है अस्थमा, जिसमे व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है और अगर ये ज्यादा बड जाये तो इंसान को inhaler लेने की भी जरुरत पड़ती है। लेकिन क्या आप जानते है कि अगर आप रेगुलर जिम में जाकर एक्सरसाइजेज करते हैं तो ये अस्थमा जैसी प्रॉब्लम को भी खत्म कर देता है। यहां मेरा कहने का मतलब है कि जिम और अस्थमा का आपस में गहरा सम्बन्ध है। इसी के बारे में जानने के लिए हमारी टीम पहुंची जालंधर शहर के जाने माने B-FIT जिम में। यहां के सीनियर इंस्ट्रक्टर अमरदीप ने अस्थमा और जिम से जुडी बहुत सी बातों के बारे में बताया। अगर आप भी इन सभी बातों को जानना चाहते हैं तो नीचे दी गयी विडियो पर क्लिक करें। <iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/RUFpwmAD-qI" title="YouTube video player" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe>

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डायबिटिक पेशेंट का इस मौसम में आम खाना सही या गलत, जानें

डायबिटिक पेशेंट का इस मौसम में आम खाना सही या गलत, जानें

खब्रिस्तान नेटवर्क: मीठा किसे पसंद नहीं होता और वो भी अगर इस मौसम में आम हो। इसे खाने के लिए तो हर कोई उतावला रहता है। लेकिन बहुत से लोगों के मन में डर रहता है कि आम खाने से कहीं मोटे न हो जाएँ। वहीं जो डायबिटीज पेशेंट है वो आम खाने से परहेज ही रखते हैं। लेकिन क्या सच में डायबिटीज पेशेंट को आम खाना सही नही है। तो चलिए जानते है। ब्लड शुगर पर आम का कितना असर आम में 90% से ज्यादा की कैलोरी इसकी मिठास से आती है। यही कारण है कि यह डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर को बढ़ावा देता है। हालांकि, आम में फाइबर और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते है, जो ब्लड शुगर पर इसके असर को कम में कारगर साबित होते हैं। बता दें आम में पाया जाने वाला फाइबर खून से शुगर अवशोषित करने की दर को धीमा करता है, वहीं इसके एंटीऑक्सीडेंट ब्लड शुगर से जुड़े तनाव को कम करने में मदद करते हैं। ये शरीर के अंदर कार्ब्स बनाने और ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने को आसान बनाते हैं। आम का ग्लाइसेमिक इंडेक्स(GI) किसी भी फूड का ब्लड शुगर पर असर ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) रैंक के जरिए पता चलता है। इसे 0-100 के स्केल पर measure किया जाता है। 55 से कम रैंक के किसी भी फूड को इस स्केल में कम शुगर का मान लिया जाता है और फिर इन फूड को डायबिटीज के मरीजों के लिए उपयुक्त माना जाता है। आम का GI रैंक 51 है यानी डायबिटीज के मरीज भी आसनी से खा सकते हैं। सावधानी जरूर बरतें बता दें कि हरेक इंसान की बॉडी हर तरह के फूड पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया देती है। आम में हेल्दी कार्ब होने के कारण ये ध्यान रखना चाहिए इसे कितनी मात्रा में खाना है। वहीँ अगर आपको डायबिटीज है और आप आम खाना चाहते हैं तो आपको बहुत सावधानी से इसे अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

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प्रीमैच्‍योर बेबी की देखभाल के लिए घर पर क्या करें, जानें

प्रीमैच्‍योर बेबी की देखभाल के लिए घर पर क्या करें, जानें

खबरिस्तान नेटवर्क। यूं तो शिशु नौ महीने तक मां के गर्भ में रहता है और फिर पुरे होने पर इस दुनिया में जन्म लेता है। इन नौ महीनों के दौरान शिशु का मां के गर्भ में शरीर के सभी अंगों का विकास होता है और वह बाहर आने के लिए तैयार होता है। लेकिन कुछ बच्‍चे ऐसे होते हैं जो नौ महीने पूरे होने से पहले ही इस्दुनिया में आ जाते हैं। कहने का मतलब है कि नौ महीने से पहले जन्‍म लेने वाले बच्‍चों को प्रीमैच्‍योर बेबी कहा जाता है। इन शिशुओं का पूरा विकास होने से पहले ही जन्‍म हो जाता है। इस वजह से इनकी इम्‍यूनिटी फुल टर्म यानि नौ महीने के बाद पैदा होने वाले बच्‍चों की तुलना में काफी कमजोर होती है। इस कारण इन बच्चों को ज्‍यादा देखभाल की जरूरत पड़ती है। वहीँ अगर प्रीमैच्‍योर बेबी जब जन्‍म लेता है तो अस्‍पताल में उसे स्पेशल केयर में रखा जाता है। अस्‍पताल में डॉक्‍टर और नर्स की देखरेख में शिशु की सेहत और सुरक्षा को लेकर पैरेंट्स को ज्‍यादा चिंता नहीं होती है, लेकिन जब उन्‍हें अपने प्रीमैच्‍योर बेबी को अस्‍पताल से घर ले जाना होता है, तो उनकी परेशानी थोड़ी बड जाती है। कई बार पैरेंट्स को समझ नहीं आ पाता है कि उन्‍हें घर पर किस तरह अपने प्रीमैच्‍योर बेबी की देखभाल करनी है। तो आज हम आपको यही बताने वाले हैं कि घर पर कसी केयर करें। ​समय समय पर बॉडी टेंपरेचर देखे प्रीमैच्‍योर बेबी है तो उसका समय समय पर बॉडी टेंपरेचर चेक करते रहें। इसका सबसे अच्‍छा तरीका है कि जरूरत पड़ने पर उसे कपड़ों से ढक दिया जाए और जब जरूरत न हो तो इन कपड़ों को हटा दिया जाए। वहीँ शिशु को हर समय बेड पर मोटा कंबल ओढ़ाकर न बिलकुल न रखें। हो सके तो डिजीटल थर्मोमीटर खरीद कर रखें और बेबी का टेंपरेचर 36.5 से 37.3 सेल्सियस तक होना चाहिए। कमरे का तापमान 20 से 23 सेल्सियस रखने की जरुरत होती है। बच्चे को स्किन-टू-स्किन कॉन्‍टैक्‍ट में रखें घर पर हर समय गर्म कमरे में बेबी को सिर्फ डायपर पहनाकर रखें और हो सके तो उसे अपनी छाती से ज्यादा से ज्यादा लगाकर रखें। बेबी के साथ मां का स्किन-टू-स्किन कॉन्‍टैक्‍ट भी जरूरी है। इसे आप कंगारू केयर भी बोल सकते हैं। इसके वजह से प्रीटर्म बेबी का अपने पैरेंट्स के साथ बॉन्‍ड बनता है, ब्रेस्‍टफीडिंग बेहतर हो पाती है और हार्ट एवं सांस की गति ठीक रहती है, बॉडी टेंपरेचर कण्ट्रोल में रहता है। ​प्रीमैच्‍योर बेबी को घर से बाहर जरुरत पड़ने पर ही लेके जाएँ बता दें कि प्रीमैच्‍योर बेबी की इम्‍यूनिटी काफी कमजोर होती है इस कारण इन्‍हें आसानी से इंफेक्‍शन पकड़ लेता है। बेहतर रहेगा कि आप अपने बच्चे को भीड़भाड़ वाली जगहों पर न लेकर जाएं और घर पर ही रहें। वहीँ अगर बाहर से कोई बेबी से मिलने आता है, तो पहले उसे हाथ धोने के लिए कहें। तभी बच्चे को हाथ लगाने दें। ​सुलाने का तरीका सही रखें गर्मी के मौसम में कमरे को थोड़ा ठंडा रखें और रोशनी हलकी रखें। कमरे में ज्यादा शोर न हो, शनि होनी चाहिए। प्रीमैच्‍योर बेबी को रात में ज्‍यादा बार दूध पीने की जरूरत पड़ती है। तो अच्छे से फीड करवाएं। नहलाते टाइम ध्यान रखें बेबी को नहलाने के लिए गर्म नहीं बल्कि गुनगुना पानी का इस्तेमाल करें। साथ शिशु के बालों को सिर्फ सादे पानी से धोएं। शिशु के 2.5 किलो के होने तक उसे बस स्‍पंज बाथ दें। बेबी के एक महीने के होने तक कोई लोशन या तेल बिलकुल न लगाएं। ये जानकारी आपको जागरूकता मात्रा के लिए दी गयी है, अगर आपका बच्चा प्रीमैच्‍योर पैदा हुआ है तो ऊपर बताई हुई बातों को फॉलो करें और अगर आपको लगता है की बच्चा घर पर ठीक महसूस नहीं कर रहा है तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाये.

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NHS हास्पिटल में डा. संदीप गोयल ने किया खबरिस्तान के वीडियो हेल्थ सेक्शन तंदरुस्ताय नमः का शुभारंभ

NHS हास्पिटल में डा. संदीप गोयल ने किया खबरिस्तान के वीडियो हेल्थ सेक्शन तंदरुस्ताय नमः का शुभारंभ

ख़बरिस्तान नेटवर्क। लोगों को हेल्थ से जुड़ी सही जानकारियां एक्सपर्ट के जरिए मुहैया करवाने के लिए जालंधर से ख़बरिस्तान नेटवर्क ने अपने वीडियो हेल्थ सेक्शन तंदरुस्ताय नमः की शुरुआत की है। NHS हॉस्पिटल में जांलधर के सीनियर डॉक्टर संदीप गोयल ने नये प्लेटफार्म का रस्मी शुभारंभ किया। डॉक्टर संदीप गोयल ने ख़बरिस्तान की टीम को बधाई देते हुए कहा कि ये बहुत अच्छी शुरुआत है। इस प्लेटफार्म के जरिये लोगों तक रोगों और इलाज की सही जानकारी पहुँच सकेगी। उन्होंने ख़बरिस्तान नेटवर्क के डायरेक्टर रमन मीर और सीनियर जर्नलिस्ट गगन वालिया को इसके लिए शुभकामनाएं दीं। मिलेगी हेल्थ से जुड़ी नॉलेज ख़बरिस्तान नेटवर्क के तंदरुस्ताय नमः पर हेल्थ से जुडी जानकारी के साथ साथ जालंधर के एक्सपर्ट डाक्टरों की मदद से लोगों को सेहत से जुड़ी सही जानकारियां दी जाएंगी। बिमारियों के साथ-साथ लोगों को सेहत संभाल के लिए जागरूक करना खबरिस्तान का मकसद है। साथ ही यहां आपको वो रामबाण घरेलु नुस्खों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी, जिसके जरिये घर बैठे ही अपनी देखभाल की जा सकती है। समय-सयम पर फिटनेस, योगा और मैडिटेशन से जुड़े एक्सपर्ट्स आपको इन्हें सही तरीके से करने के तरीके बताएंगे। ताकि जो कमजोर हैं वो तंदरुस्त बन सकें और जो मोटे हैं वो फिट हो सकें। इसके अलावा महिलाओं की सेहत से जुड़े हरेक पहलू पर विस्तार से बात होगी और एक्सपर्ट्स से उनका हल ढूंढने की हमारी कोशिश रहेगी। ब्यूटी और स्किन से जुड़े टिप्स भी शेयर किए जाएंगे। हमारी ये उम्मीद है कि तंदरुस्ताए नमः के हेल्थ अपडेट आपको तंदरुस्त रहने में मददगार साबित होंगे। खबरिस्तान लोगों का नेटवर्कखबरिस्तान नेटवर्क उत्तर भारत का तेजी से बढ़ता डिजीटल मीडिया ग्रुप है। नेटवर्क की हिंदी और पंजाबी की अलग-अलग वेबसाइट हैं। इसी महीने खबरिस्तान नेटवर्क ने हिमचाल प्रदेश से भी शुरुआत की है। इसके अलावा यू ट्यूब चैनल,टीवी खबरिस्तान पर लोगों को देश दुनिया की खबरों से रू-ब-रू करवाया जा रहा है। पंजाब नाऊ के टाइटल से पालीटिकल वीकली मैग्जीन लोगों में खासा लोकप्रिय है।

https://webkhabristan.com/tandrustai-namah/khabaristans-video-health-section-inaugurates-by--dr-sandeep-goyal--8137
बासी रोटी खाने के होते हैं सेहत पर बहुत से फायदें, जानें कैसे

बासी रोटी खाने के होते हैं सेहत पर बहुत से फायदें, जानें कैसे

खब्रिस्तान नेटवर्क। क्या आपके घर में अक्सर ऐसा होता है कि रात की बची हुई बासी रोटी कोई नही खाता और फिर आपको उसे या तो फैकना पड़ता है या फिर आप उसे किसी जानवर को डाल देते हैं। वैसे तो हमें बची हुई रोटी को फैकना नहीं चाहिए लेकिन अगर रोटी बच जाती है तो ऐसा क्या करें कि उसका फायदा हमें मिल सके। तो चलिए आज यही जानते हैं। बासी खाने से मतलब बासी रोटी <iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/ERFa0u7QKjo" title="YouTube video player" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe> अक्सर कहा जाता है कि बचा हुआ खाना, खाना सेहत को नुक्सान देता है। लेकिन आपको बता दें कि खाने में बची हुई हर बासी चीज नुक्सान नहीं देती। बहुत बार बासी खाना खाना हमें एक्टिव रखता है। अब आप सोच रहे होंगे कि मै ऐसा क्यों बोल रही हूँ। तो चलिए आपको बताती हूँ। यहाँ मेरा बासी खाना से मतलब है बासी रोटी। जी हाँ आप बिलकुल सही सुन रहे हैं। पुरानी रोटी या बासी रोटी में कई तरह के पोषक गुण पाए जाते हैं। इसमें विटामिन B 1, B 2 और B 6 होता है। साथ ही ये आयरन, कैल्शियम, फोस्फोरस, MAGNISIUM और POTASIUM जैसे पोषक तत्वों से भी भरपूर है। बासी रोटी घुलनशील फाइबर से भरपूर है। जोकि कोलेस्ट्रोल कम करने में हेल्प करता है और दिल को हेल्दी रखता है। देता है भरपूर प्रोटीन और एनर्जी बासी रोटी प्रोटीन से भरपूर है। सुबह नाश्ते में प्रोटीन लेना बहुत ही फायदेमंद होता है। जिससे सारा दिन ENERGETIC रहता है और जल्दी भूख भी नहीं लगई जिस वजह से वेट लोस करने में हेल्प मिलती है। शुगर पेशेंट के लिए है लाभदायक डायबिटीज के मरीजों के लिए बासी रोटी खाना काफी फायदेमंद होता है। डायबिटीक लोगों को ज्यादा समय तक भूखा नहीं रहना चाहिए। ऐसे में वह सुबह के समय ठंडे फीके दूध के साथ बासी रोटी खा सकते हैं। इससे शरीर में ब्लड ग्लूकोज का लेवल सही रहता है। एसिडिटी में मिलता है राहत एसिडिटी या पेट से जुड़ी प्रॉब्लम में बासी रोटी अपना कमाल दिखाती है। आप सुबह के समय दूध और रोटी का नाश्ता कर सकते हैं जो आपको एसिडिटी, पेट में जलन के साथ पेट से जुड़ी कई प्रॉब्लम में राहत देगी। इतना ही नहीं गेहूं से बनी बासी रोटी में फाइबर होता है जो भोजन को डाइजेस्ट करने में काफी मदद करता है जिस कारण digestive सिस्टम यानि कि पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है और वेट लोस भी होता है। जिम लवर जरूर खाएं बासी रोटी आज कल बहुत से लोग वर्कआउट या फिर जिम लवर होते हैं, उन्हें तो अपने खाने में बासी रोटी को जरुर ADD करना चाहिए, क्यों की इससे मसल्स में मजबूती आती है और शरीर को ज्यादा एनर्जी मिलती है। इसे भी पढ़ें...https://webkhabristan.com/tandrustai-namah/home-remedies-to-be-adopted-in-case-of-loose-motion-7736 कुछ बातों का रखें ख्याल हालांकि बासी रोटी खाने से पहले भी आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए जैसे आप रात की बची हुई रोटी को सुबह या सुबह की बची हुई रोटी को रात में खा सकते हैं लेकिन इससे ज्यादा पुरानी रोटी हो तो उसे नहीं खाना चाहिए। ये जानकारी आपको जागरूकता मात्र के लिए दी गई है, खब्रिस्तान नेटवर्क इसकी कोई पुष्टि नहीं करता है। अगर आप किसी तरह की बीमारी से ग्रस्त हैं और ऊपर बताई हुई जानकारी को अमल में लाना चाहते हैं तो एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरुर कर लें।

https://webkhabristan.com/tandrustai-namah/there-are-many-health-benefits-of-eating-stale-roti-know-how-7739
लूज मोशन होने पर अपनाए घरेलू उपाय, मिलेगा तेजी से आराम

लूज मोशन होने पर अपनाए घरेलू उपाय, मिलेगा तेजी से आराम

खब्रिस्तान नेटवर्क। अप्रैल का महिना चल रह है। ऐसे में गर्मी भी बड रही है। इस गर्मी के कारण डायरिया होने का खतरा बना रहता है, इसलिए इस समस्या से बचने के लिए जरुरी है की प्रयाप्त मात्रा में पानी पीते रहे। इसके इलावा नींबू पानी और ओआरएस का घोल भी पी सकते हैं। वहीँ शरीर में पानी की कमी को पूरा करने और दस्त से छुटकारा पाने के लिए ये जानना भी जरुरी है की दस्त लगने पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं। आईये जान लेते हैं केले से मिल सकता है आराम यूं तो केला सबका मनपसन्द फल माना जाता है। इसमें मौजूद पेक्टिन पेट को बांधने का काम करता है। केले में पोटै‍शियम की मात्रा अधिक होने के कारन ये शरीर के लिए फायदेमंद होता है। वहीँ डायरिया से राहत पाने के लिए आप काले नमक के साथ केले का सेवन कर सकते हैं। नारियल पानी पीना भी लाभदायक दस्त के घरेलू उपाय में नारियल पानी के फायदे देखे गऐ हैं। दरअसल, दस्त के कारण शरीर में ग्लूकोज और पानी की कमी हो जाती है और नारियल पानी इस कमी को पूरा करने का काम बहुत ही बेहतर तरीके से करता है। नारियल पानी को ग्लूकोज इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यृशन के रूप में हल्के दस्त को दूर करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। मेथी के दाने देता है फायदा इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है, जो पेट में संक्रमण फैलाने वाले और दस्त का कारण बनने वाले एस्चेरिचिया कोलाई नामक बैक्टीरिया से लड़ने का काम करता हैं। बता दें कि दस्त का और दस्त के दौरान होने वाले पेट दर्द का इलाज करने के लिए मेथी के बीजों का सहारा लिया जा सकता है। छोटी इलाइची का पानी चार छोटी इलायची चार कप पानी में डाल कर पकाए। पानी जब तीन कप रह जाए तब इसे ठंडा होने के लिए रख दे। दिन में हर चार घंटे के बाद एक कप पानी पिए। छोटी इलायची लूज मोशन का इलाज करने में काफी फायदेमंद है। जीरा और सौंफ का सेवन है लाभदायक पांच ग्राम जीरा और पांच ग्राम सौंफ लेकर बारीक पीस ले और इसका चूर्ण बना ले। 1 गिलास पानी के साथ 1 चम्मच चूर्ण ले। इस घरेलू नुस्खे से लूज मोशन से जल्दी निजात मिलती है। इस खबर में दी गयी जानकारी आपको जागरूकता मात्रा के लिए दी गयी है। अगर आप पहले से ही किसी बीमारी से ग्रस्त हैं और ऊपर बताई हुई जानकारी को अमल में लाना चाहते हैं तो एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

https://webkhabristan.com/tandrustai-namah/home-remedies-to-be-adopted-in-case-of-loose-motion-7736