Copenhagen Metro में ले जा सकते हैं साइकिल, जानें किस तरह

metro के अन्दर लेके जाते हैं साइकिल

metro के अन्दर लेके जाते हैं साइकिल



कोच्ची में साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए इस प्रोजेक्ट की शुरुआत

खबरिस्तान नेटवर्क: बता दें कि डेनमार्क (Denmark) की राजधानी कोपेनहेगेन (Copenhagen) शहर पूरी दुनिया में अपने साफ़ सफाई के लिए काफी फेमस है। यहां के लोग रोजमर्रा के काम में ज्यादा से ज्यादा साइकिल (Cycle)का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए ज्यादा हेल्दी रहते हैं। बता दें कि कोपेनहेगेन की मेट्रो ट्रेन में सफर करने वाले अपने साथ साइकिल (Copenhagen Metro allows Cycle) लेके जा सकते हैं। भारत में भी इस तरह के चलन की शुरुआत धीरे-धीरे हो रही है। तो चलो आपको ब्तातेह अं कि डेनमार्क की मेट्रो ट्रेन में साइकिल ले जाने की शुरुआत कैसे हुई।

कोरोना काल के बाद हुई इसकी शुरुआत

Corona काल में दुनिया के बहुत से देशों के लोगों ने खुद को सेहतमंद रखने के लिए साइकिल की सवारी करना शुरू कर दिया। इससे न सिर्फ पैसे की बचत होती है बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट (Public transport) का सहारा भी नहीं लेना पड़ता। वहीं डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन की बात करें तो कोपेनहेगेन मेट्रो () में काफी समय से मेट्रो ट्रेन को साथ ले जाने की इजाजत है। मेट्रो के साथ साइकिल को मंजूरी देने के फैसले की वजह खुद डेनमार्क की सरकार और वहां के शहरों के प्रशासनिक अधिकारी बताते हैं।

क्या कहते हैं इस शहर के प्रशासनिक अधिकारी


डेनमार्क के प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक ऐसा करने से एक तो देश में प्रदूषण काफी हद तक कंट्रोल में रहता है तो दूसरी ओर लोग फिजिकली फिट भी रहते हैं। कोपेनहेगेन के स्थानीय लोगों की बात करें तो वो भी इस चेंज से काफी खुश हैं और सरकार की राय में पूरी तरह से शामिल हैं। कोरोना काल की बंदिशे खत्म होने के बाद डेनमार्क समेत दुनियाभर के देशों में मेट्रो और लोकल ट्रेन सर्विस के फेरों को बढ़ाया गया है। ऐसे में यहां के लोग अपनी शान की सवारी यानी साइकिल (Cycle) के साथ मेट्रो ट्रेन के अंदर बड़े गर्व के साथ दाखिल होते हैं।

मेट्रो में चड़ने के लिए कोई हड़बड़ी नही

यहां के लोग बड़े अनुशासन के साथ ट्रेन में चढ़ने और उतरने के लिए किसी तरह की हड़बड़ी और जल्दबाजी नहीं करते हैं। लोग ट्रेन के अंदर बड़े सलीके से एक साइकिल स्टैंड की तरह अपनी साइकिल खड़ी करते हैं और अपना स्टेशन आने पर उतर जाते हैं। ऐसा करते समय वो ध्यान रखते हैं कि उनकी वजह से किसी को किसी भी तरह की तकलीफ तो नहीं हो रही।

हर स्टेशन पर मिल जाती है साइकिल

कोपेनहेगेन मेट्रो के लगभग हर स्टेशन पर साइकिलें आसानी से मिल जाती हैं। यहां रेंट पर साइकिल मिलने का काफी चलन है। वहां के मेट्रो स्टेशनों के बाहर भी बहुत से लोग अपनी साइकिल पार्क करके जाते हैं। वहीं ये लोग शाम को लौटते समय अपनी साइकिल निकालकर उसे चलाते हुए घर जाते हैं।

शहर में साइकिलिंग को बढ़ावा देना है

कोच्चि मेट्रो की बात करें तो इस फैसले से यात्रियों को मेट्रो में सफर के बाद यहां-वहां जाने में काफी आसानी हो सकती है। इसका मकसद शहर में साइकिलिंग को बढ़ावा देना भी है। सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्‍ट की शुरुआत में सिर्फ 6 स्‍टेशनों से यात्रियों को साइकिल की एंट्री कराने की मंजूरी दी मिलेगी। इनमें छंगमपूजा पार्क, पलारिवट्टम, टाउन हॉल, अर्नाकुलम साउथ, माहराजा कॉलेज और एलमकुलम मेट्रो स्‍टेशन शामिल हैं। इन्‍हीं स्‍टेशनों से साइकिल के साथ यात्रियों की एंट्री और एग्जिट होगा।

 

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