भारत का ऐसा गांव जिसे यूट्यूबर गांव बोलते हैं, 85 साल की दादी भी YouTuber



इस गांव के लोग गवर्नमेंट जॉब छोड़ कर वीडियो बना रहे

खबरिस्तान नेटवर्क: आज के समय में सोशल मीडिया इतना ज्यादा पूरी दुनिया में फ़ैल गया है कि उसकी पहुंच छोटे छोटे गाँवों तक है। ऐसे ही अगर हम सिर्फ यूट्यूब की बात करें तो उससे तो लोग बहुत लाभ भी उठा रहे हैं। यूट्यूब सिर्फ इंटरटेनमेंट या एजुकेशन हासिल करने का जरिया ही नहीं है। बल्कि अब यूट्यूब इससे काफी आगे बढ़ चुका है और ये लोगों के लिए आय का एक सोर्स बन चुका है। आज के टाइम में लोग यूट्यूब के जरिए मोटी कमाई कर रहे हैं। यही वजह है कि बहुत से लोग अपनी बेहतरीन नौकरियों को छोड़कर यूट्यूबर के तौर पर अपना करियर बनने में लगे हुए हैं। ऐसे में आइए आपको भारत के एक ऐसे गांव के बारे में बताते हैं, जो यूट्यूबर्स का हब बन चुका है। इस गांव में रहने वाले लोग ऑनलाइन वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूटब के लिए हर रोज वीडियो बनाते हैं।

गांव ऐसा जहाँ हर रोज बनती है विडियो


बता दें छत्तीसगढ़ में एक गांव ऐसा है जहाँ सिर्फ विडियो बनती हैं और उस गांव का नाम तुलसी गांव है। इस गांव की 30 फीसदी आबादी यूट्यूबर्स की है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि गांव की आबादी ही कुल 3000 है। ऐसे में गांव के 1000 लोगों का यूट्यूबर्स के तौर पर लिया जाता है। इसका मतलब है कि हर तीन में से एक आदमी यूट्यूब पर अपना करियर बना रहा है। यहां लोग यूट्यूब पर सिर्फ करियर ही नहीं बना रहे हैं, बल्कि मोटी कमाई भी कर रहे हैं। यूट्यूब का क्रेज ऐसा है कि लोगों ने सरकारी नौकरियां तक छोड़ दी हैं।

सरकारी नौकरी छोड़र बने यूट्यूबर्स

आपको बता दें ज्ञानेंद्र शुक्ला और जय वर्मा इस गांव में रहने वाले दो दोस्त हैं, जो बाकी के लोगों की तरह ही यूट्यूब पर वीडियो बनाते हैं। यहां हैरानी की बात ये है कि दोनों ने यूट्यूब पर अपना करियर बनाने के लिए अपनी नौकरियां छोड़ दीं। ज्ञानेंद्र शुक्ला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नेटवर्क इंजीनियर के तौर पर काम करते थे। वह एसबीआई में काम करते हुए यूट्यूब वीडियो देखा करते थे। एक दिन उन्होंने तय किया कि अब वह अपना खुद का यूट्यूब चैनल बनाएंगे। अब तक उन्होंने यूट्यूब पर 250 से ज्यादा वीडियो बनाए हैं और उनके 1.15 लाख सब्सक्राइबर्स भी हैं। वहीँ जय वर्मा ने केमेस्ट्री में एमएससी किया हुआ है और वह एक प्राइवेट कोचिंग सेंटर में पार्ट-टाइम टीचर के तौर पर काम करते हैं। यहां से उनकी महीने की 12 से 15 हजार रुपये की कमाई होती थी। लेकिन अब यूट्यूब पर करियर बनाने के बाद उनकी हर महीने की कमाई 30 से 35 हजार रुपये हो चुकी है। इन दोनों लोगों के नक्शेकदम पर चलते हुए अन्य लोगों ने भी वीडियो बनाना शुरू कर दिया है। अब लोग यहां पर शो, शॉर्ट फिल्म और अन्य वीडियो कंटेट बना रहे हैं और उन्हें यूट्यूब पर अपलोड किया जाता है।

85 साल की दादी भी यूट्यूबर है

महिला आर्टिस्ट और यूट्यूबर पिंकी साहू ने कहा कि यूट्यूब पर वीडियो बनाने वाले इन ग्रुप्स ने गांव की महिलाओं को सशक्त करने का काम किया है। पिंकी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, ‘मुझे यूट्यूब पर वीडियो बनाते 1.5 साल हो गया है। हमारे 40 यूट्यूब चैनल हैं। यहां पर हर कोई वीडियो का हिस्सा बनता है। यहां की महिलाओं को आमतौर पर घरों से बाहर निकलने की इजाजत नहीं होती है। लेकिन अपने यूट्यूब चैनल के जरिए हमने उन्हें काफी जानकारी दी है कि लड़कियां भी कुछ कर सकती हैं।’ इस गांव में सबसे बूढ़ी एक्टर 85 साल की महिला हैं। जो वैसे तो दादी की उम्र हैं, लेकिन अब यूट्यूब पर करियर बना रही हैं।

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