श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पहले प्रकाश पर्व पर विशेष : पढ़िए इस पवित्र ग्रंथ के बारे में वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं



श्री गुरु ग्रंथ साहिब में छह गुरु साहिबान के साथ भगतों, भट्टों और महापुरुषों की बाणी शामिल है

वेब ख़बरिस्तान। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में छह गुरु साहिबान के साथ भगतों, भट्टों और महापुरुषों की बाणी शामिल है। सम्वत 1660 (1603 ईसवी) को गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब के स्थान पर संपादन का काम गुरु अर्जुन देव जी ने आरंभ करवाया था। उन्होंने लेखन की सेवा का मान भाई गुरदास जी को बख्शा। सम्वत 1661 (1604 ईसवी) को ये काम संपूर्ण हुआ और इसी साल भादों सुदी एकम को सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब श्री अमृतसर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश किया गया।

बाबा बुड्ढा जी थे पहले मुख्य ग्रंथी

गुरु साहिब ने बाबा बुड्ढा जी को पहला मुख्य ग्रंथी की जिम्मेदारी सौंपी। दसवें पातशाह गुरु गोबिंद सिंह जी ने तलवंडी साबो में नौवे पातशाह गुरु तेग बहादुर साहिब की बाणी शामिल करके श्री गुरु ग्रंथ साहिब की संपूरणता की और अंतिम समय श्री गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु गद्दी के सिखों को शबद गुरु के साथ अमली रूप से जोड़ा।


श्री गुरु ग्रंथ साहिब में छह गुरु साहिबान के अलावा 15 भगतों, 4 गुरसिखों और 11 भट्ट साहिबान की बाणी 31 रागों में दर्ज है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब 1469 से लेकर 1708 तक सिख गुरुओं के समय में रची और एकत्र की बाणी का 1430 अंगों वाला एक विस्तारमई ग्रंथ है।

इस पवित्र ग्रंथ की लिखावट गुरमुखी लिपि में

श्री गुरु ग्रंथ साहिब की लिखावट गुरमुखी लिपी में है। सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी ने 1604 में आज ही के दिन दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था। 1430 अंग (पन्ने) वाले इस ग्रंथ के पहले प्रकाश पर संगत ने कीर्तन दीवान सजाए और बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की। पहली पातशाही से छठी पातशाही तक अपना जीवन सिख धर्म की सेवा को समर्पित करने वाले बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने। आगे चलकर इसी के संबंध में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हुक्म जारी किया "सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।'

 गुरु अर्जुन देव बोलते गए, भाई गुरदास लिखते गए

1603 में 5वें गुरु अर्जुन देव ने भाई गुरदास से गुरु ग्रंथ साहिब को लिखवाना शुरू करवाया, जो 1604 में संपन्न हुआ। नाम दिया आदि ग्रंथ1705 में गुरु गोबिंद सिंह ने दमदमा साहिब में गुरु तेग बहादुर के 116 शबद जोड़कर इन्हें पूर्ण किया। 1708 में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हजूर साहिब में फरमान जारी किया था, “सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।

Related Links