जानिए कैसे इस शख्स ने जुगाड़ लगाकर आधा कर दिया पेट्रोल का खर्च



फ्यूल इंजेक्शन तकनीक में नए वैरियंट को ईजाद कर माइलेज को दोगुना कर दिया

वेब ख़बरिस्तान, प्रयागराज। संगमनगरी के धूमनगंज के रहने वाले अंकुश कुमार को अब पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि इन्होंने एक ऐसा जुगाड़ ढूंढ़ निकाला है जिससे उनके पेट्रोल की खपत आधी हो गई है। दरअसल, उनकी स्कूटी छह महीने पहले तक एक लीटर पेट्रोल में 40 से 45 किलोमीटर की माइलेज देती थी। मगर अब 75 से 80 किलोमीटर चल रही है। कुछ ऐसी ही बात चौफटका निवासी संतोष कुमार के साथ है। उनकी बाइक अब एक लीटर पेट्रोल में 100 किलोमीटर तक चलती है, जबकि कुछ महीने पहले तक 50 किलोमीटर ही चलती थी। यह संभव हुआ है कौशांबी निवासी विवेक पटेल की जुगाड़ तकनीक से इजाद कार्बोरेटर जेट की बदौलत। फ्यूल इंजेक्शन तकनीक पर आधारित जेट को लगाने के बाद दुपहिया का एवरेज दोगुना हो गया। ऐसे में पेट्रोल का खर्च आधा रह गया है। यह अलग बात है कि इस तकनीक की प्रमाणिकता को ऑटोमोबाइल सेक्टर के विशेषज्ञों की मुहर का इंतजार है। इसके पेंटेंट के लिए आवेदन किया हुआ है।

कौन हैं विवेक पटेल


फ्यूल इंजेक्शन तकनीक में कार्बोरेटर जेट को ईजाद करने वाले कौशांबी के गांव पिपरी पहाड़पुर निवासी 40 वर्षीय विवेक पटेल 12वीं पास हैं। वह दोपहिया वाहन की माइलेज बढ़ाने के प्रयास दो दशक से कर रहे थे, लेकिन कामयाबी हाल के वर्षो में मिली है। परिवार के भरण पोषण के लिए विवेक घरों में शटरिंग का काम करते हैं, लेकिन इसके बीच वह जुगाड़ तकनीक पर काम करते रहते हैं।

करीब 500 वाहनों पर लगा चुके हैं नई तकनीक

2016 में उनको माइलेज बढ़ाने के मामले में शुरुआती सफलता मिली थी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इसके लिए उन्हें 25 हजार रुपये का ईनाम भी दिया गया था। यह पुरस्कार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 अक्टूबर, 2018 को दिया था। पुरस्कार मिलने से उनका हौसला बढ़ा। वह करीब साल भर में माइलेज बढ़ाने वाले अपने यंत्र कार्बोरेटर जेट को पांच सौ दुपहिया वाहनों में फिट कर चुके हैं। दुपहिया वाहन चालकों का कहना भी है कि उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती।

यह है तकनीक

ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े लोग जानते हैं कि फ्यूल इंजेक्शन तकनीक से ही दोपहिया वाहन के इंजन में पेट्रोल जाता है। उसके वाष्पीकरण से इंजन चलता है। विवेक कहते हैं कि जो कार्बोरेटर जेट इनमें लगे होते हैं, उसके सबसे निचले हिस्से में करीब दो मिलीमीटर व्यास वाला सुराख होता है। उससे आधा पेट्रोल बर्बाद हो जाता है। उन्होंने इसी बर्बादी को रोकने के लिए कार्बोरेटर जेट में बदलाव किया है। वह निचले हिस्से के सुराख को बंद कर कुछ ऊपर आधे से एक मिलीमीटर व्यास के दो छोटे सुराख कर देते हैं। इसके बाद पूरे पेट्रोल का इस्तेमाल होने लगता है।

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