हवा में हुआ था कनिष्क विमान में विस्फोट, समंदर में समा गया था जहाज

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।



131 यात्रियों के ही शव समुंदर से बरामद हो सके थे, बाकी के शव फिर कभी किसी को नहीं मिले, विमान में सवार चालक दल सदस्यों (22 सभी भारतीय) समेत सभी 329 लोग मारे गए थे

खबरिस्तान नेटवर्क। मांट्रियाल से नई दिल्ली की उड़ान भर रहे एअर इंडिया विमान कनिष्क -182 की फ्लाइट 1985 में 23 जून की सुबह समंदर में समा गई थी। जब विमान में बम फटा तब हवाई जहाज आयरिश हवाई क्षेत्र में 9,400 मीटर (करीब 31 हजार फुट) की ऊंचाई पर उड़ रहा था। विमान को लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर स्टे कराने के सभी इंतजाम हो चुके थे। महज 45 मिनट बाद ही कनिष्क हवाई जहाज को हीथ्रो हवाई अड्डे पर लैंड करना था। उस वक्त कनिष्क के साथ हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतरने वाले दो और विमान (कुल तीन विमानों की एक साथ लैंडिंग होनी थी) तीन विमान एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम के रडार पर दिखाई दे रहे थे। अचानक कनिष्क विमान रडार से गायब हो गया।

रडार से कनिष्क के गायब हो जाने और विमान चालक दल की ओर से कोई जवाब न मिलने के चलते,  हीथ्रो हवाई अड्डे पर मौजूद एअर कंट्रोल रूम में हड़कंप मच गया। थोड़ी ही देर में साफ हो गया कि एअर इंडिया के प्लेन कनिष्क को बम से उड़ाया जा चुका है। जिसका मलबा अटलांटिक महासागर में कुछ घंटे बाद ही एक माल वाहक पानी के जहाज ने तैरते हुए मिला। विमान कागज की तरह फट चुका था। लाइफ सेविंग जैकेट्स के सहारे तमाम लाशें समुंदर की डरावनी धारों में इधर से उधर उतराती दिखाई दे रही थीं।

विमान में सवार चालक दल सदस्यों (22 सभी भारतीय) के सभी 329 लोग मारे जा चुके थे। मरने वालों में अधिकांश भारतीय मूल के कैनेडा के नागरिक थे। उसी दिन करीब एक घंटे के ही भीतर जापान की राजधानी टोक्यो के नरिता हवाई अड्डे पर भी एयर इंडिया के एक अन्य विमान में विस्फोट कर डाला गया था। जिसमें जापान हवाई सेवा के दो लोडर (माल लादने वाले कर्मचारी) मारे गए थे।

सूटकेस में रखे गए थे बम


शुरुआती जांच में ही साबित हो चुका था कि जहाज में बम को सूटकेस के अंदर बंद करके,  कॉकपिट के बिलकुल करीब रखा था। आसमान में जब हवाई जहाज में विस्फोट हुआ तो सबसे ज्यादा नुकसान कॉकपिट वाली साईड में ही हुआ।ब्लैक बॉक्स भी तकरीबन नष्ट ही हो चुका था। कॉकपिट की तरफ या आसपास बैठे अधिकांश लोग धमाके के साथ आसमान में ही जान गंवा चुके थे। कॉकपिट से दूर बैठे लोग ऊंचाई से समंदर में हवाई जहाज के समाने के चलते जिंदा ही दफन हो चुके थे। मामले में सिख चरमपंथी और बब्बर खालसा इंटरनेशनल कुख्यात आतंकवादी इंदरजीत सिंह रेयात को दोषी ठहराया गया। जिसे कनाडा कानून के मुताबिक कुछ साल की सजा हुई।

अपनों की ही ली थी जान

विमान का मलबा और लाशें आयरलैंड के तटवर्ती इलाके में बिखरे मिले थे। बम वैंकुवर के खालिस्तानी चरमपंथियों ने, जून 1984 में स्वर्ण मंदिर में अंजाम दिए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेने के लिए रखे थे। जिस कनिष्क विमान हादसे में जो 329 लोग मारे गए उनमें सिख कौम के भी यात्री बड़ी संख्या में बैठे हुए थे। वे सब भी मारे गए। हादसे में मरने वाले 329 लोगों में 86 तो बच्चे ही शामिल थे। जबकि 30 सिख परिवारों के सदस्य भी शामिल रहे थे। जो कनाडा से भारत के लिए (नई दिल्ली) पहुंचने के लिए कनिष्क विमान में सवार हुए थे।

मसलन, बाद में खालिस्तानी आतंकवादी इंदरजीत रेयात ने टोक्यो (नारिटा हवाई अड्डा जापान) में सूटकेस में बम रखने का जुर्म कबूला था। कनाडा के कानून के मुताबिक तब उसे 1991 में 10 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। उसके बाद उसे फिर 5 साल अतिरिक्त जेल की सजा दी गई। सजा कनिष्क विमान में लगाए गए बम को बनाने में भूमिका निभाने के लिए दी गई थी। वह साल 2008 में जेल से बाहर आ गया। कनाडा सरकार ने उसे अपने यहां रहने की अनुमति नहीं दी। उसके पास तब तक कनाडा और जर्मनी दोनो देशों की नागरिकता थी।

131 ही शव मिले

131 यात्रियों के ही शव समुंदर से बरामद हो सके। बाकी शव फिर कभी किसी को नहीं मिले। शवों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला था कि, अधिकांश यात्रियों की मौत बम विस्फोट से तबाह हुए विमान में फंसने के चलते आसमान में ही हो गई थी। जबकि बाकी यात्री जो विमान के ब्लैक बॉक्स, कॉकपिट वाले हिस्से से दूर बैठे थे। वे सब के सब समुंदर के अथाह गहरे पानी की डरावनी लहरों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके थे।

कनाडाई एजेंसियों और सीबीआई की संयुक्त जांच में ही बाद में यह निकल कर सामने आया था कि, दोनो ही हवाई जहाजों के भीतर सूटकेसों में बम छिपाकर रखने वाला एक ही शख्स था। जिसने बम वाले सूटकेस तो हवाई जहाजों में लोड करवा दिए थे। खुद वह हवाई जहाज में यात्रा के लिए जान-बूझकर नहीं चढ़ा था। हालांकि उस अनजान शख्स ने वैंकूवर (कनाडा) टोक्यो (जापान) और वैंकूवर (कनाडा) से नई दिल्ली वाया लंदन (कनिष्क विमान-182) की उड़ान का टिकट खरीदा था। मगर वह दोनो में से किसी भी फ्लाइट में खुद नहीं चढ़ा था।

 

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