साहसी गीता – 11 साल की गीता के पैर में पंजे नहीं, पानी पीने वाला गिलास लगाकर चलती है



उसने पानी पीने के काम में आने वाले स्टील के गिलास पैर में फँसा लिए

वेब खबरिस्तान, रायपुर। गरियाबंद जिले छुरा की रहने वाली 11 साल की गीता के पैरों के पंजे नहीं है। लेकिन उसने अपनी इस मुश्किल से हार नहीं मानी बल्कि मुश्किल को हराने की ठानी। उसने पानी पीने के काम में आने वाले स्टील के गिलास पैर में फँसा लिए और इस से ही चलना शुरू किया। गीता की खबर सुनकर सरकार मदद के लिए आगे आई। राज्य सरकार गीता के परिवार को घर देने, बच्ची को इलेक्ट्रिक साइकिल देने और पैरों का इलाज करवाने का जिम्मा लेने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश, इलाज का खर्चा सरकार उठाएगी  


सांसद विवेक के तंखा और उच्च न्यायालय के अधिवक्ता और प्रदेश कांग्रेस विधि के अध्यक्ष संदीप दुबे के आग्रह पर मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने कदम उठाया। उन्होंने गरियाबंद कलेक्टर को निर्देश दिए हैं। अब गीता को तुरंत इलेक्ट्रॉनिक साईकल और प्रधानमंत्री आवास से उसके माता- पिता को आवास उपलब्ध करवाया जाएगा। स्वास्थ विभाग की टीम तुरंत गीता की आवश्यक मेडिकल जांच के लिए उसके गांव जाएगी। ये जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री के दफ्तर भेजी जाएगी। ताकि गीता के पैरों का इलाज हो सके और वो खुद अपने पैरों पर खड़ी हो सके। गीता के इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी।

बेटी का इलाज करवाने में गरीबी थी रोड़ा

गीता के बचपन से ही दोनों पैरों के पंजे नहीं हैं। बिना पंजों के चलने की वजह से कई बार कंकड़ चुभ जाया करते थे जिस कारण पैरों से कई बार खून निकल आता था। माता-पिता की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं कि वो बेटी का इलाज करवा सकें। इसलिए गीता ने जुगाड़ ढूंढा और अपने पैरों में गिलास लगाकर चलने लगी। गीता के पिता देवीराम गोंड और उसकी मां दोनों सुबह से ही मजदूरी करने चले जाते हैं। गीता रोज चुपचाप गिलास में पैर डालकर चलने की प्रैक्टिस करती थी। एक दिन जब शाम को माता-पिता घर आए, तो वह दौड़कर अपने पिता के गले लग गई। उसके पिता की भी आंखें भर आई।

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