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शादी के कार्ड पर की msp गारंटी कानून की मांग दूल्हे ने छपवाए ऐसे 1500 कार्ड

शादी के कार्ड पर की MSP गारंटी कानून की मांग, दूल्हे ने छपवाए ऐसे 1500 कार्ड

शादी के कार्ड के माध्यम से प्रदीप ने यह सन्देश दिया है कि किसान आंदोलन की जीत अभी पूरी तरह से नहीं हुई है

दुबई के यूट्यूबर ने 12 दिन बंद ग्लास बॉक्स से की लाइव स्ट्रीमिंग जुटाए 82 करोड़ रुपये

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अबोफ्लाह के इस इवेंट के जरिए जुटाए गए दान की राशि से क्षेत्र के 1,10,000 से अधिक शरणार्थी परिवारों की मदद की जाएगी


डूब रही महिला सहित दो टूरिस्ट को वॉटर पुलिस ने इस तरह से निकाला,देखें

डूब रही महिला सहित दो टूरिस्ट को वॉटर पुलिस ने इस तरह से निकाला,देखें

वेब ख़बरिस्तान, मुंबई। समुद्र में डूब रही एक महिला और पुरुष को यलो गेट पुलिस स्टेशन की एक टीम ने बचाया। वे दोनों पर्यटक थे और 'गेटवे आफ इंडिया' के पास समुद्र में डूब रहे थे। पुलिस ने बताया कि विकास साल्वी और निकिता दमानिया नाम के टूरिस्ट की नाव तेज बहाव के कारण दूसरी नाव से टकरा गई थी। इसके बाद दोनों गहरे समुद्र में गिर गए थे। महिला को तैरना नहीं आता था, इसलिए वह डूबने लगी। दोनों को हॉस्पिटल लेकर गए उनके गिरने की जानकारी मिलते ही दक्षिण क्षेत्र के पुलिस नियंत्रण कक्ष से एक नाव रेस्क्यू के लिए भेजी गई। ​​​​​कोस्टल पुलिस की नाव ने तेजी से मौके पर पहुंचकर ट्यूब के जरिए महिला और उसके पुरुष मित्र की जान बचाई। दोनों को प्राथमिक जांच के लिया नजदीक के हॉस्पिटल लेकर गए और बाद में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में एएसआई वसिकर, एएसआई मनोज पाटिल, एएसआई जार्वेकर और पुलिस कांस्टेबल बूंदिले शामिल थे। पालघर में भी हुआ था ऐसा ही हादसा पालघर के वसई कस्बे में रणगांव बीच पर नाव के पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि नाव पर सवार अन्य पांच लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था। पुलिस अधिकारी के अनुसार, छह लोगों ने मौज मस्ती के लिए अवैध रूप से एक नाव को किराये पर लिया और रणगांव बीच पर समुद्र में चले गए, लेकिन वहां नाव पलट गई जिससे उसमें सवार गिरिज के रहने वाले स्टीवन काउटिन्हो (38) की मौत हो गई।

https://webkhabristan.com/special-news/two-tourists-including-a-drowning-woman-were-pulled-out-by-the-water-police-in-t-5508
मॉडल कोड आफ कंडक्ट क्‍या होता है? 5 राज्‍यों में आज से लागू ये सारे नियम 

मॉडल कोड आफ कंडक्ट क्‍या होता है? 5 राज्‍यों में आज से लागू ये सारे नियम 

वेब ख़बरिस्तान। पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। भारत निर्वाचन आयोग के घोषणा करते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब से सरकार बनने तक सरकारी मशीनरी एक तरह से चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहेगी। मतदान और मतगणना के बाद नतीजों की आधिकारिक घोषणा के साथ ही आचार संहिता हट जाती है। आदर्श चुनाव आचार संहिता क्‍या है और इसके क्‍या नियम हैं, आईए सभी सवालों के जवाब जानते हैं। 1. आदर्श आचार संहिता क्‍या है? देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग कुछ नियम बनाता है। चुनाव आयोग के इन्हीं नियमों को आचार संहिता कहते हैं। लोकसभा/विधानसभा चुनाव के दौरान इन नियमों का पालन करना सरकार, नेता और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी होती है। 2. आचार संहिता कब से लागू होती है? आचार संहिता चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही लागू हो जाती है। देश में लोकसभा के चुनाव हर पांच साल पर होते हैं। अलग-अलग राज्यों की विधानसभा के चुनाव अलग-अलग समय पर होते रहते हैं। चुनाव आयोग के चुनाव कार्यक्रमों का एलान करते ही आचार संहिता लागू हो जाती है। 3. आचार संहिता कब तक लगी रहेगी? आचार संहिता चुनाव प्रक्रिया के संपन्न होने तक लागू रहती है। चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही आचार संहिता देश में लगती है और वोटों की गिनती होने तक जारी रहती है। आचार संहिता के मुख्‍य नियम क्‍या हैं? 1. चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद कई नियम भी लागू हो जाते हैं। इनकी अवहेलना कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता नहीं कर सकता।2. सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी विशेष राजनीतिक दल या नेता को फायदा पहुंचाने वाले काम के लिए नहीं होगा।3. सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जाएगा।4. किसी भी तरह की सरकारी घोषणा, लोकार्पण और शिलान्यास आदि नहीं होगा।5. किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी, राजनेता या समर्थकों को रैली करने से पहले पुलिस से अनुमति लेनी होगी।6. किसी भी चुनावी रैली में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जाएंगे। आदर्श आचार संहिता की मुख्‍य विशेषताएं क्‍या हैं? आदर्श आचार संहिता की मुख्‍य विशेषताएं निर्धारित करती हैं कि राजनीतिक दलों, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यथियों और सत्ताधारी दलों को निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान कैसा व्‍यवहार करना चाहिए अर्थात् निर्वाचन प्रक्रिया, बैठकें आयोजित करने, शोभायात्राओं, मतदान दिवस गतिविधियों तथा सत्ताधारी दल के कामकाज इत्‍यादि के दौरान उनका सामान्‍य आचरण कैसा होगा। क्‍या मंत्री अपने आधिकारिक दौरे को निर्वाचन प्रचार के साथ मिला सकते हैं?नहीं।क्‍या सरकारी वाहन को निर्वाचन प्रचार संबंधी कार्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है?विमान, वाहनों इत्‍यादि सहित कोई भी सरकारी वाहन किसी दल या अभ्‍यर्थी के हितों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रयोग नहीं किया जाएगा। क्‍या सरकार निर्वाचन कार्य से संबंधित पदाधिकारियों का स्‍थानांतरण और तैनाती कर सकती है?निर्वाचन के आयोजन से प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से जुड़े हुए सभी अधिकारियों/पदाधिकारियों के स्‍थानांतरण और तैनाती पर संपूर्ण प्रतिबंध होगा। यदि किसी अधिकारी का स्‍थानांतरण या तैनाती आवश्‍यक मानी जाती है तो आयोग की पूर्व-अनुमति ली जाएगी। यदि निर्वाचन कार्य से संबंधित किसी अधिकारी का आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार द्वारा स्‍थानांतरण कर दिया जाता है और उसने नए स्‍थान पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है तो क्‍या ऐसा अधिकारी आचार संहिता की घोषणा के बाद नए स्‍थान पर कार्यभार ग्रहण कर सकता है? नहीं। यथापूर्णस्थिति बनाए रखी जाएगी। क्‍या कोई केंद्रीय मंत्री या राज्‍य सरकार का मंत्री निर्वाचनों की अवधि के दौरान किसी आधिकारिक चर्चा के लिए किसी राज्‍य या निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन संबंधी अधिकारी को बुला सकता है? कोई भी केंद्रीय या राज्‍य सरकार का मंत्री कहीं भी किसी आधिकारिक चर्चा हेतु राज्‍य या निर्वाचन क्षेत्र के किसी निर्वाचन संबंधी अधिकारी को नहीं बुला सकता है।इसका एकमात्र अपवाद तभी होगा जब कोई मंत्री संबंधित विभाग के प्रभारी होने के नाते या कोई मुख्‍यमंत्री कानून एवं व्‍यवस्‍था के असफल हो जाने या प्राकृतिक आपदा या किसी आपातकाल में ऐसे किसी निर्वाचन क्षेत्र का आधिकारिक दौरा करते हैं जिसमें अधीक्षण, मदद, राहत और इसी प्रकार के विशेष प्रयोजनार्थ ऐसे मंत्री/मुख्‍यमंत्री की व्‍यक्तिगत उपस्थिति अपेक्षित होती है।यदि कोई केंद्रीय मंत्री पूर्णत: आधिकारिक कार्य से दिल्‍ली से बाहर दौरा कर रहे हैं, जिसे लोकहित मे टाला नहीं जा सकता है तो उस मंत्रालय/ विभाग के संबंधित सचिव से इस आशय को प्रमाणित करने वाला एक पत्र संबंधित राज्‍य के मुख्‍य सचिव को भेजने के साथ उसकी एक प्रति निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी। क्‍या कोई पदाधिकारी मंत्री से उनके निजी दौरे के दौरान उस निर्वाचन क्षेत्र में मिल सकते हैं जहां निर्वाचन हो रहे हैं।कोई पदाधिकारी जो मंत्री से निर्वाचन क्षेत्र में उनके निजी दौरे के दौरान मिलते हैं, संगत सेवा नियमों के अधीन कदाचार के दोषी होंगे और यदि वह लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 129(1) में उल्लिखित पदाधिकारी हैं तो उन्‍हें उस धारा के सांविधिक उपबंधों का उल्‍लंघन करने का अतिरिक्‍त दोषी माना जाएगा और वे उसके अधीन उपबंधित दांडिक कार्रवाई के भागी होंगे। क्‍या निर्वाचनों के दौरान मंत्री आधिकारिक वाहन के हकदार होंगे?मंत्रियों को अपना आधिकारिक वाहन केवल अपने आधिकारिक निवास से अपने कार्यालय तक शासकीय कार्यों के लिए ही मिलेगा बशर्ते इस प्रकार के सफर को किसी निर्वाचन प्रचार कार्य या राजनीतिक गतिविधि से न जोड़ा जाए। क्‍या मंत्री या कोई अन्‍य राजनीतिक कार्यकर्ता सायरन सहित बीकन प्रकाश वाली पायलट कार का प्रयोग कर सकते हैं?मंत्री या किसी अन्‍य राजनीतिक कार्यकर्ता को निर्वाचन अवधि के दौरान निजी या आधिकारिक दौरे पर किसी पायलट कार या किसी रंग की बीकन लाइट अथवा किसी भी प्रकार के सायरन सहित कार का प्रयोग करने की अनुमति नहीं होगी भले ही राज्‍य प्रशासन ने उसे सुरक्षा कवर दिया हो जिसमें ऐसे दौरों पर उसके साथ सशस्‍त्र अंगरक्षकों के उपस्थित रहने की आवश्‍यकता हो। यह निषेध सरकारी व निजी स्‍वामित्‍व वाले दोनों प्रकार के वाहनों पर लागू होगा। क्‍या राजनीतिक कार्यकर्ताओं के निवास स्‍थान पर "इफ्तार पार्टी" या ऐसी ही कोई अन्‍य पार्टी आयोजित की जा सकती है जिसका खर्चा सरकारी कोष से किया जाएगा।नहीं। तथापि, कोई भी व्‍यक्ति अपनी निजी क्षमता और अपने निजी निवास स्‍थान पर ऐसी पार्टी का आयोजन करने के लिए स्‍वतंत्र है। क्‍या सत्ताधारी पार्टी की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए उपलब्धियों के संबंध में सरकारी कोष की लागत पर विज्ञापन जारी करने पर कोई प्रतिबंध है ?हां। निर्वाचन अवधि के दौरान प्रिंट और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया में सरकारी कोष की लागत पर पार्टी की उपलब्धियों के संबंध में विज्ञापन और सरकारी जन-सम्‍पर्क मीडिया के दुरूपयोग पर निषेध है। क्‍या केंद्र में सत्ताधारी पार्टी/राज्‍य सरकार की उपब्धियों को प्रदर्शित करने वाले होर्डिंग/विज्ञापनों को राजकोष की लागत पर जारी रखा जा सकता है?नहीं। प्रदर्शित किए गए इस प्रकार के सभी होर्डिंग, विज्ञापन इत्‍यादि संबंधित प्राधिकारियों द्वारा तुरन्‍त हटा दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्‍त, अखबारों और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया सहित अन्‍य मीडिया पर सरकारी राजकोष के खर्चें पर कोई विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। मान लीजिए किसी योजना या कार्यक्रम के संबंध में कार्य आदेश जारी किया गया है। क्‍या इसे निर्वाचन के बाद शुरू किया जा सकता है ?निर्वाचनों की घोषणा से पूर्व जारी कार्य आदेश के संबंध में यदि क्षेत्र में वास्‍तविक रूप से कार्य शुरू नहीं किया गया है तो उसे शुरू नहीं किया जाएगा। परंतु यदि काम वास्‍तव में शुरू कर दिया गया है तो उसे जारी रखा जा सकता है। सरकार आपातकालिक स्थिति या अप्रत्‍य‍ाशित आपदाओं से निपटने के लिए क्‍या करती है जबकि कल्‍याणकारी उपायों की घोषणा पर प्रतिबंध लगा होता है ?आपातकालिक स्थिति या अप्रत्‍य‍ाशित आपदाओं यथा सूखे, बाढ़, महामारी, अन्‍य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने अथवा वृद्धजनों तथा निशक्‍त इत्‍यादि हेतु कल्‍याणकारी उपाय करने के लिए सरकार आयोग का पूर्व अनुमोदन ले सकती है तथा सरकार को आडंबरपूर्ण समारोहों से पूरी तरह से बचना चाहिए और सरकार को ऐसी कोई भी परिस्थिति उत्‍पन्‍न करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए कि सरकार द्वारा ऐसे कल्‍याणकारी उपाय या सहायता या पुनर्वास कार्य किसी अंतर्निहित उद्देश्‍य से किए जा रहे हैं। क्‍या शराब के ठेकों, तेंदु की पत्तियों और ऐसे अन्‍य मामलों के संबंध में निविदा नीलामी इत्‍यादि कार्रवाई की जा सकती है ?जी नहीं, संबंधित क्षेत्र में निर्वाचन प्रक्रिया के पूर्ण होने तक ऐसे मामलों पर कार्रवाई को आस्‍थगित किया जा सकता है और सरकार वहां अंतरिम व्‍यवस्‍था कर सकती है जहां यह अपरिहार्य रूप से आवश्‍यक हो। क्‍या सरकारी स्‍वामित्‍व वाली बसों की बस टिकट के पिछली ओर राजनीतिक विज्ञापन प्रकाशि‍त किया जा सकता है।जी नहीं। क्‍या गेहूं और अन्‍य कृषि-संबंधी उत्‍पादों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य निर्धारित किया जा सकता है ?इस संबंध में निर्वाचन आयोग से परामर्श लिया जा सकता है। क्‍या राज्‍य सरकार निर्वाचन आयोग से प्रत्‍यक्ष रूप में किसी प्रस्‍ताव के संबंध में कोई स्‍पष्‍टीकरण/अनापत्ति/अनुमोदन मांग सकती है?जी नहीं। निर्वाचन आयोग से स्‍पष्‍टीकरण/अनापत्ति/अनुमोदन मांगने हेतु राज्‍य सरकार का कोई भी प्रस्‍ताव केवल मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी के माध्‍यम से ही भेजा जाना चाहिए जो संबंधित मामले में अपनी सिफारिशें देंगे अथवा अन्‍यथा टिप्‍पणी प्रस्‍तुत करेंगे। निर्वाचन प्रचार करते समय राजनीतिक दलों/अभ्‍यर्थियों के लिए प्रमुख दिशा-निर्देश क्‍या हैं?निर्वाचन प्रचार के दौरान कोई भी अभ्‍यर्थी या दल ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा जिससे मौजूदा मतभेद बढ़ जाए या जिनसे परस्‍पर द्वेष पैदा हो अथवा भिन्‍न-भिन्‍न जातियों और समुदायों, धर्मों या भाषा-भाषी लोगों में तनाव बढ़ जाए। इसके अतिरिक्‍त अन्‍य राजनीतिक दलों की आलोचना करते समय यह केवल उनकी नीतियों और कार्यक्रमों, पिछले रिकॉर्ड और कार्यों तक ही सीमित होनी चाहिए। दलों और अभ्‍यर्थियों का निजी जीवन के सभी पहलुओं की आलोचना करने से बचना चाहिए, जो अन्‍य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं की सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़े न हों। दूसरे दलों या उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना निराधार आरोपों या तथ्‍यों को तोड़-मरोड़कर नहीं की जानी चाहिए। क्‍या निर्वाचन प्रचार के लिए धार्मिक स्‍थानों का प्रयोग करने पर कोई प्रतिबंध है?जी हां। धार्मिक स्‍थान यथा मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारा या पूजा के अन्‍य स्‍थानों का निर्वाचन प्रचार के मंच के रूप में प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्‍त, मत प्राप्‍त करने के लिए जाति या सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर कोई अपील नहीं की जाएगी। क्‍या कोई अभ्‍यर्थी जुलस के साथ अपना नाम-निर्देशन पत्र भरने के लिए रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय जा सकता है ?जी नहीं। रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय की परिधि में आने वालो वाहनों की अधिकतम संख्‍या को तीन तक सीमित रखा गया है और रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय में जाने वाले व्‍यक्तियों की अधिकतम संख्‍या को पांच (अभ्‍यर्थी सहित) तक सीमित रखा गया है। क्‍या निर्वाचकीय प्रयोजनों हेतु वाहनों के चलाने पर कोई प्रतिबंध है ?निर्वाचन प्रचार के प्रयोजनार्थ अभ्‍यर्थी कितने भी वाहन (टू व्‍हीलर सहित सभी यांत्रिकीय और मोटरयुक्‍त वाहन) चला सकता है पंरतु उसे ऐसे वाहन चलाने के लिए रिटर्निंग अधिकारी का पूर्व अनुमोदन लेना होता है और उसे रिटर्निंग अधिकारी द्वारा जारी परमिट की मूल प्रति (फोटोकापी नहीं) को वाहन की विंड स्‍क्रीन पर प्रमुखता से प्रदर्शित करना चाहिए। परमिट पर वाहन की परमिट संख्‍या और उस अभ्‍यर्थी का नाम, जिसके पक्ष में वाहन जारी किया गया है, का उल्‍लेख होना चाहिए। क्‍या किसी वाहन, जिसके लिए अभ्‍यर्थी के नाम पर निर्वाचन प्रचार हेतु अनुमति ली गई है, को दूसरे अभ्‍यर्थी द्वारा निर्वाचन प्रचार हेतु प्रयोग किया जा सकता है ?जी नहीं। अन्‍य अभ्‍यर्थी द्वारा निर्वाचन प्रचार हेतु ऐसे वाहन के प्रयोग हेतु भारतीय दंड संहिता की धारा 171ज के अधीन कार्रवाई की जाएगी। क्‍या राजनीतिक प्रचार अभियान तथा रैलियों के लिए शैक्षणिक संस्‍थानों और उनके मैदानों (भले ही सरकारी सहायता प्राप्‍त, निजी या सरकारी) के प्रयोग पर प्रतिबंध है?आयोग ने राजनीतिक प्रयोग हेतु स्‍कूलों और कॉलेज के मैदानों (पंजाब और हरियाणा राज्‍य को छोड़कर जहां पंजाब और हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय से विशेष निषेध है) के प्रयोग की अनुमति नहीं दी है बशर्तें कि: किसी भी परिस्थिति में स्‍क्‍ूल और कालेज के शैक्षिक कैलेण्‍डर को वितरित न किया जाए।स्‍कूल/ कॉलेज प्रबंधन को इस प्रयोजनार्थ कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए और ऐसे प्रचार अभियान के लिए स्‍कूल/कॉलेज प्रबंधन तथा साथ ही सब डिवीज़नल अधिकारी से अनुमति ली जाए।ऐसी अनुमति 'पहले आओ पहले पाओ' आधार पर दी जाती है और किसी भी राजनीतिक दल को इन मैदानों के प्रयोग पर एकाधिकार करने की अनुमति नहीं है।किसी भी न्‍यायालय का ऐसा कोई आदेश/निदेश नहीं है जो ऐसे परिसर/मैदान के प्रयोग पर रोक लगाता है।राजनैतिक बैठकों के लिए स्‍कूल/कॉलेज के मैदानों के आबंटन में किसी भी उल्‍लंघन को आयोग द्वारा गंभीरता से लिया जाएगा। इस संबंध में जिम्‍मेवारी सब-डिवीज़नल अधिकारी की है, औरराजनीतिक दल और अभ्‍यर्थी तथा निर्वाचन प्रचार करने वाले इस बात का पूरा ध्‍यान रखेंगे कि उपर्युक्‍त मानदंडों का उल्‍लंघन न हो। यदि ऐसे मैदानों को निर्वाचन प्रचार के प्रयोजनार्थ प्रयोग किया जा रहा है तो प्रयोग के बाद इन्‍हें बिना किसी नुकसान के या की गई क्षति, यदि कोई हुई है, हेतु अपेक्षित क्षतिपूर्ति के साथ संबंधित प्राधिकारी को लौटाना चाहिए। कोई भी राजनीतिक दल जो संबंधित स्‍कूल/ कॉलेज प्राधिकारी को प्रचार अभियान वापस करते समय ऐसी क्षतिपूर्ति, यदि कोई हुई है, का भुगतान करने के जिम्‍मेवार होंगे। राजनीतिक दलों/ अभ्‍यर्थियों द्वारा सरकारी एयरक्रॉफ्ट/हेलीकॉप्‍टरों (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों सहित) को लेने के लिए कोई नियम है ? जी हां। राजनीतिक दलों/अभ्‍यर्थियों के लिए सरकारी विमान/हेलीकॉप्‍टर या प्राइवेट कंपनियों के एयरक्रॉफ्ट/हेलीकॉप्‍टर को किराए पर लेने की अनुमति देते हुए निम्‍नलिखित शर्तों का अनुसरण किया जाना चाहिए। सत्ताधारी दल और अन्‍य दल तथा निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थी के बीच कोई भेद नहीं होना चाहिए।इसका भुगतान राजनीतिक दलों या निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यर्थियों द्वारा किया जाएगा और इसका उचित रिकॉर्ड रखा जाएगा।सभी के लिए दरें और निबंधन व शर्तें एक समान होंगी।वास्‍तविक आबंटन 'पहले आओ पहले पाओ' आधार पर होना चाहिए। इस प्रयोजनार्थ आवेदन की तारीख व समय को आवेदन प्राप्‍त करने वाले प्राधिकृत प्राधिकारी द्वारा नोट कर लेना चाहिए।ऐसे मामलों में जब कभी दो या उससे अधिक आवेदनों की तारीख व समय एक होगा तो आबंटन का निर्णय ड्रॉ द्वारा होगा।किसी भी व्‍यक्ति, फर्म, पार्टी या अभ्‍यर्थी को एक ही समय पर तीन दिन से अधिक के लिए एयरक्रॉफ्ट/हेलीकॉप्‍टर किराए पर लेने की अनुमति नहीं होगी।क्या पैम्‍फलेट, पोस्टर आदि की छपाई पर कोई प्रतिबंध है? अभ्यर्थी किसी ऐसे निर्वाचन पैम्पलेट अथवा पोस्टर का मुद्रण अथवा प्रकाशन नहीं करेगा अथवा उसका मुद्रण अथवा प्रकाशन नहीं करवाएगा, जिस पर उसका चेहरा, नाम अथवा पते मुद्रित अथवा प्रकाशित नहीं होते हों। क्या सिनेमैटोग्राफ, टेलीविजन या इसी तरह के अन्य उपकरणों के माध्यम से जनता को किसी भी निर्वाचन सामग्री का प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध है?अभ्यर्थी निर्वाचन के समापन के लिए तय किए गए समय के साथ समाप्त होने वाले 48 घंटे की अवधि के दौरान, सिनेमैटोग्राफ, टेलीविजन या अन्य इसी तरह के उपकरण के माध्यम से जनता को किसी भी निर्वाचन सामग्री अथवा प्रचार को प्रदर्शित नहीं कर सकते हैं। क्या पार्टी या अभ्यर्थी द्वारा अस्थायी कार्यालयों की स्थापना और संचालन के लिए शर्तें/दिशानिर्देश हैं?ऐसे कार्यालय किसी भी अतिक्रमण के माध्यम से सार्वजनिक या निजी संपत्ति/किसी भी धार्मिक स्थानों पर, अथवा ऐसे धार्मिक स्थानों के परिसर/किसी भी शैक्षणिक संस्थान/अस्पताल के समीप, किसी मौजूदा मतदान केंद्र के 200 मीटर के भीतर नहीं खोले जा सकते हैं। इसके अलावा, ऐसे कार्यालय पार्टी का केवल एक झण्डा और बैनर को पार्टी प्रतीक/तस्वीरों के साथ प्रदर्शित कर सकते हैं, और ऐसे कार्यालयों में उपयोग किए जाने वाले बैनर का आकार इस अतिरिक्‍त शर्त के अध्‍यधीन 4 फीट X 8 फीट से अधिक नहीं होना चाहिए कि यदि स्‍थानीय विधियों द्वारा बैनर/होर्डिंग इत्‍यादि के लिए अधिक छोटे आकार का निर्धारण किया जाएगा तो स्‍थानीय विधि द्वारा निर्धारित छोटे आकार का इस्‍तेमाल किया जाएगा। क्या जनसभा आयोजित करने या जुलूस निकालने पर कोई प्रतिबंध है?किसी भी सार्वजनिक या निजी स्थान पर सभा आयोजित करने और जुलूस निकालने के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों से पूर्व लिखित अनुमति लेनी चाहिए। क्या लाउडस्पीकर का इस्‍तेमाल करने के लिए कोई समय-सीमा है?रात 10.00 बजे से प्रात: 6.00 बजे के बीच लाउडस्पीकर का इस्‍तेमाल नहीं किया जा सकता है। वह कौन सी अंतिम समय-सीमा है जिसके बाद कोई जनसभा और जुलूस नहीं निकाला जा सकता है?जन सभाएं सुबह 6.00 बजे से पहले और शाम 10 बजे के बाद आयोजित नहीं की जा सकती हैं। इसके अतिरिक्‍त, अभ्यर्थी मतदान के समापन के लिए निर्धारित समय के साथ समाप्‍त होने वाले 48 घंटे की अवधि के दौरान जनसभाएं और जुलूस नहीं निकाल सकते। मान लीजिए, मतदान का दिन 15 जुलाई है और मतदान का समय सुबह 8 बजे से शाम 5.00 बजे तक है, तो जन सभा और जुलूस 13 जुलाई को शाम 5.00 बजे से बंद हो जाएंगे। क्या ओपिनियन पोल या एक्जिट पोल किसी भी समय आयोजित, प्रकाशित, प्रचारित या प्रसारित किए जा सकते हैं?किसी भी तरह से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, या किसी अन्य मीडिया द्वारा किसी भी जनमत सर्वेक्षण या एक्जिट पोल के परिणाम को प्रकाशित, प्रचारित या प्रसारित नहीं किया जाएगा, जो निम्नलिखित अवधि के लिए मान्य होंगे: एक ही चरण में आयोजित निर्वाचन में मतदान समापन के निर्धारित घंटे के साथ समाप्त हो रही 48 घंटों की अवधि के दौरान; तथाएक बहु स्तरीय निर्वाचन में, और विभिन्न राज्यों में एक साथ निर्वाचनों की घोषणा के मामले में, निर्वाचन के प्रथम चरण के मतदान के लिए निर्धारित अवधि के आरंभ होने से 48 घंटे आरंभ होने की अवधि के दौरान और सभी राज्यों में सभी चरणों के मतदान समाप्त हो जाने तक। क्या मतदान केंद्र में या उसके आस-पास प्रचार पर कोई प्रतिबंध है?मतदान के दिन मतदान केंद्र के एक सौ मीटर की दूरी के भीतर वोटों के लिए प्रचार करना निषिद्ध है। क्या मतदान केंद्र या उसके पास सशस्त्र जाने पर कोई प्रतिबंध है?मतदान के दिन मतदान केंद्र के आस-पास शस्त्र अधिनियम 1959 में परिभाषित किए गए किसी भी तरह के हथियारों से लैस किसी भी व्यक्ति को हथियार ले जाने की अनुमति नहीं है। मतदान के दिन एक अभ्यर्थी कितने वाहनों के लिए हकदार है?राज्य विधान सभा के निर्वाचन के लिए, अभ्यर्थी हकदार होगा: अभ्यर्थी के स्वयं के उपयोग के लिए एक वाहनअभ्यर्थी के निर्वाचन अभिकर्ता के उपयोग के लिए एक वाहनअभ्यर्थी के कार्यकर्ताओं या पार्टी कार्यकर्ताओं के उपयोग के लिए एक वाहन।

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दो समलैंगिक लड़कियों ने रिंग पहनाकर की

दो समलैंगिक लड़कियों ने रिंग पहनाकर की 'कमिटमेंट सेरेमनी', पढ़िए उनकी कहानी

वेब ख़बरिस्तान,नागपुर। 'समलैंगिकता' को अब समाज में लोग खुले दिल से अपनाने लगे हैं। नागपुर में ऐसा ही एक उदाहरण देखने को मिला। पूरे परिवार की सहमति के बाद दो लड़कियों ने बड़े धूमधाम से आपस में सगाई की। अब वे गोवा में शादी करने जा रहीं हैं। उन दोनों के माता-पिता उनके इस रिश्ते से बहुत खुश हैं और रिंग सेरेमनी के दौरान सभी ने जमकर एन्जॉय किया है। सुरभि पेशे से डॉक्टर है उन्होंने इस सगाई को कमिटमेंट रिंग सेरेमनी नाम दिया है। उनका नाम सुरभि मित्रा और पारोमिता मुखर्जी है। सुरभि नागपुर की रहने वाली हैं और पेशे से डॉक्टर हैं। सुरभि और पारोमिता गोवा में डेस्टिनेशन वेडिंग करेंगी। दोनों ने अपनी वेडिंग को सिविल यूनियन का नाम दिया है। दोनों अपनी शादी को लेकर बहुत उत्साहित हैं और शादी की तैयारियों में जुटी हैं। साल 2013 से दोनों के परिवार को है जानकारी पारोमिता मुखर्जी ने बताया कि उनके पिता को साल 2013 में पता चला कि वह होमोसेक्सुअल हैं। पिता उनके साथ सामान्य व्यवहार करते थे। वह पिता से सहज थीं, इसलिए उन्हें यह बता दिया था। जबकि मां को उन्होंने कुछ दिन पहले ही अपने सेक्सुअल ओरिएंटेशन के बारे में बताया। जब मां को यह पता चला तो वह पहले नाराज हो गईं, लेकिन पारोमिता ने उन्हें समझाया तो वह मान गईं। उन्होंने सुरभि के साथ उनके कमिटमेंट को भी स्वीकार कर लिया है। परिवार खुश हुआ कि बेटी ने कुछ छिपाया नहीं डॉ. सुरभि मित्रा ने बताया कि उनके माता-पिता को उन्होंने शुरू में ही अपने होमोसेक्सुअल होने के बारे में बता दिया था। परिवार ने कभी भी उनके सेक्सुअल ओरिएंटेशन का विरोध नहीं किया। जब उनके माता-पिता को पता चला तो वह खुश हुए कि उनकी बेटी ने कुछ छिपाया नहीं। सुरभि ने कहा कि मैं एक मनोचिकित्सक हूं और कई लोग मुझसे दोहरी जिंदगी जीने की बात करते हैं, क्योंकि वे अपने लिए स्टैंड नहीं ले सकते। लेकिन मैं स्टैंड ले सकती हैं, इसलिए खुलकर अपने रिश्ते को स्वीकार किया है। वह चाहती हैं कि दूसरे भी इससे प्रेरणा लें और दोहरी जिंदगी न जिएं।

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तेज रफ्तार लोकल ट्रेन देख पटरियों पर सिर रखकर लेट गया शख्स, फिर पढ़िए क्या हुआ

तेज रफ्तार लोकल ट्रेन देख पटरियों पर सिर रखकर लेट गया शख्स, फिर पढ़िए क्या हुआ

वेब ख़बरिस्तान, मुंबई। शिवड़ी रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरे में एक ऐसी घटना कैद हुई है, जो आपको हैरान कर देगी। रेल मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर की है। इसमें तेज रफ्तार लोकल ट्रेन के सामने एक शख्स जान देने के लिए रेलवे ट्रैक पर लेटता दिख रहा है, मगर लोकल ट्रेन के मोटरमैन ने अपनी सतर्कता के कारण मौत को उस शख्स से महज कुछ मीटर पहले रोक उसकी जान बचा ली। यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है। लोग मोटरमैन के काम की जमकर तारीफ कर रहे हैं। रेलवे द्वारा उसे सम्मानित करने की बात भी कही जा रही है। व्यक्ति अचानक रेल पटरियों पर लेट जाता है रेल मंत्रालय की ओर से शेयर किए गए वीडियो की शुरुआत में रेलवे ट्रैक पर एक व्यक्ति लापरवाही से टहलता दिखाई दे रहा है। जैसे ही लोकल ट्रेन तेज रफ्तार से उसके करीब आती है, वह व्यक्ति अचानक पटरियों पर लेट जाता है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि लेटते समय उस शख्स ने अपनी गर्दन को पटरी के ऊपर रखा और बाकी हिस्सा दो पटरियों के बीच कर लिया। मगर लोको पायलट ने उस आदमी को पटरी पर लेटे देख लिया और आपातकालीन ब्रेक लगा दी। इससे ट्रेन तुरंत पटरियों पर रुक गई और जानलेवा हादसा होते-होते रह गया। शख्स को ट्रैक पर लेटे देख तीन आरपीएफ कर्मी दौड़ते हुए भी नजर आ रहे हैं। रेल मंत्रालय का ट्वीट - रेल मंत्रालय ने कैप्शन में लिखा, 'मोटरमैन द्वारा किया गया सराहनीय कार्य : मुंबई के शिवड़ी स्टेशन पर मोटरमैन ने देखा कि एक व्यक्ति ट्रैक पर लेटा है उन्होंने तत्परता एवं सूझबूझ से इमरजेंसी ब्रेक लगाकर व्यक्ति की जान बचाई। आपकी जान कीमती है, घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है।' भयानक हादसा होने से बच गया वीडियो को एक लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है और 6 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया, जबकि करीब 900 लोगों ने री-ट्वीट किया। एक यूजर ने लिखा, 'ये वाकई भयानक होने से बच गया। इमरजेंसी ब्रेक भी गाड़ी को एकदम से नहीं थामते, उसके लिए भी डिस्टेंस मायने रखता है। धन्य हैं मोटरमैन महोदय जिन्होंने बहुत सूझबूझ का परिचय बिल्कुल सही समय पर दिया।'

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कभी देखा है गाय को बेडरूम में सोते हुए ? पढ़िए इस परिवार ने कैसे अपने सदस्य की तरह रखा है

कभी देखा है गाय को बेडरूम में सोते हुए ? पढ़िए इस परिवार ने कैसे अपने सदस्य की तरह रखा है

वेब ख़बरिस्तान,जोधपुर। क्या आपने कभी गाय को घर के बेडरूम में सोते हुए देखा है? जी हाँ, जोधपुर के एक घर में गाय बेडरूम में सोती है। बैल घर में पालतू कुत्ते की तरह घुमता है। परिवार गाय और बैल को सदस्य की तरह पालता है। उनके घर में परिवार के सदस्य के अलावा गाय के परिवार के तीन सदस्य भी रहते हैं। इसमें गाय, बैल और उसका बछड़ा है। गाय के परिवार के लिए एक रूम है,जिसमें पलंग भी रखा है। मखमली कंबल भी है। गौ प्रेम के कारण किया पाल रोड सुभाष नगर में रहने वाले प्रेम सिंह कच्छवाह और उनकी पत्नी संजू कंवर ने यह सब गौ प्रेम के कारण किया है। उस क्षेत्र में इनका घर काऊ घर के नाम से प्रसिद्ध है। उनका परिवार सोशल मीडिया पर भी काफी मशहूर है। इंस्टाग्राम पर इस परिवार का एक पेज भी है। बछड़े की उम्र 1 साल है और इसका नाम उन्होंने पृथु रखा है। संजू कंवर ने बताया कि सुबह वे अपने बछड़े को चारा खिलाकर स्नान करा देती हैं। इसके बाद जैसे ही वह सूखता है, सीधा कमरे में जाकर पलंग पर चढ़ जाता है। वहां पर करीब 2 घंटे आराम करता है। बैल और बछड़े को दी ट्रेनिंग संजू ने गाय, बैल और बछड़े को ट्रेनिंग दे रखी है कि वे गोबर करने एक निर्धारित जगह ही जाते हैं। ऐसे में उनका टॉयलेट अलग ही बना रखा है। वे घर में रहते हैं, बिस्तर पर सोते हैं, लेकिन गंदगी नहीं करते। गाय दूध देती है, इसलिए लोग गाय को पालते हैं। बैल को आवारा छोड़ देते है। संजू ने बैल पृथु का ध्यान भी रखा। उन्होंने कहा कि बैल को लोग घर से निकाल देते हैं। वह कत्लखाने तक पहुंच जाते हैं। इसी डर के चलते उन्होंने अपने पृथु को घर से बाहर नहीं निकाला। नगर निगम की टीम भी घर पहुंची साल भर पहले संजू कंवर के घर पर नगर निगम की टीम पहुंची थी। उन्होंने उनकी गायों को सीज कर लिया। उन्होंने गायों को घर में ही पालना शुरू कर दिया।

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कुत्ते के काटने पर मां ने कहा इसे घर से भगा दो, बेटे ने कुत्ते को गोद में लिया और लगा ली फांसी

कुत्ते के काटने पर मां ने कहा इसे घर से भगा दो, बेटे ने कुत्ते को गोद में लिया और लगा ली फांसी

वेब ख़बरिस्तान,छतरपुर। पालतू जानवरों से प्यार होना अच्छा है लेकिन एक मामला सामने आया है जिसमें ये प्यार घातक साबित हुआ। एक युवक की मां ने उससे कहा कि कुत्ते को घर से बाहर निकाल दो, मगर युवक ने कुत्ते को बाहर निकालने के बजाय अपनी जान देना बेहतर समझा। युवक ने अपने कुत्ते के साथ फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। लेकिन कुत्ता तो बच गया, लेकिन उसका मालिक मर गया। फंदा भी डॉगी की जंजीर से ही बनाया। मां को बेटे की खुदकुशी की जानकारी तब मिली जब डॉगी जोर-जोर से भौंकने लगा। कुत्ते ने युवक की मां को काट लिया था, इसलिए वह उसे घर में रखना नहीं चाहती थी। डॉगी ने मां के हाथ में काट लिया था विश्वनाथ कॉलोनी के 38 वर्षीय कमलेश का शव फंदे से लटका मिला। घर में उसके साथ 65 साल की मां शांति मसीही और उनका डॉगी रहता था। डॉगी ने जब मां के हाथ में काट लिया तो उन्होंने बेटे से कहा कि अब यह कुत्ता हमें ही काटने लगा है, इसलिए उसे घर से भगा दो। इस पर बेटे ने कहा कि मां खुद मर जाऊंगा पर डॉगी को न मारूंगा और न ही भगाऊंगा। जब मां ने भला-बुरा कहा तो बेटा गुस्से में बाहर चला गया। बेटा लड़ाई के बाद बाहर चला गया मां शांति ने बताया कि बेटा लड़ाई के बाद बाहर चला गया। इसके बाद कुत्ते की भौंकने की आवाजें आने लगीं। जब बाहर गई तो बेटा फंदे पर लटका था। लोगों ने कहा कि कमलेश ने फंदे से डॉगी की जंजीर को भी बांध दिया था। डॉगी कमलेश की गोद में था। भाई सुनील मसीही ने बताया कि कमलेश किसी भी सूरत में डॉगी को भगाने को तैयार नहीं था। हम लोगों ने उसकी बात को नजरंदाज कर दिया, यही हमारी सबसे बड़ी गलती रही। 9 साल पहले शादी हुई थी मगर पत्नी छोड़ कर चली गई कमलेश ने 19 साल पहले बारासिवनी की एक लड़की से शादी की थी। दोनों को एक बेटा भी था। नौ साल पहले बीवी इसे छोड़ कर चली गई और साथ में वह अपने बेटे को भी ले गई थी। कमलेश मैकेनिक का काम करता था। उसे अपने कुत्ते से बहुत प्यार था। वो उसे हमेशा अपने साथ ही रखता था। पड़ोस में ही उसके सगे भाई पक्के मकान में रहते हैं।

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प्यार का बंधन - पति की मौत के 20 मिनट बाद पत्नी ने भी तोड़ा दम

प्यार का बंधन - पति की मौत के 20 मिनट बाद पत्नी ने भी तोड़ा दम

वेब ख़बरिस्तान,चौमूं। चौमूं उपखण्ड के देवथला गांव में बुजुर्ग दंपती की 20 मिनट के अंतराल पर मौत हो गई। दोनों 60 साल शादी के अटूट बंधन में थे। उन दोनों की अर्थियां एक साथ उठी और एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। 85 वर्षीय सीताराम शर्मा ब्राह्मण मोहल्ले में रहते थे। रविवार सुबह उनकी तबीयत खराब हो गई जिसके बाद उनकी मौत हो गई। 20 मिनट बाद ही 83 वर्षीय उनकी पत्नी भंवरी देवी की भी सदमे से मौत हो गई। दोनों की मौत होने के बाद परिवार के लोगों के साथ ही गांव में भी गमगीन माहौल हो गया। दोनों एक दूसरे का ध्यान रखते थे गांव के लोगों ने बताया कि सीताराम शर्मा पहले टाटानगर में काम करते थे। वृद्धवस्था होने के बाद से गांव में ही रहने लगे थे। पति-पत्नी के प्रेम की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों ही एक दूसरे का खूब ध्यान रखते थे। दंपती का स्वभाव भी मिलनसार था। देवथला गांव के सीताराम शर्मा का विवाह ईटावा भोपजी स्थित गोठवालों की ढाणी निवासी भंवरी देवी शर्मा के साथ करीब 60 साल पहले हुआ था। सीताराम शर्मा और भंवरी देवी के चार बेटे और दो बेटियां है, जिनमें दो बेटे अविवाहित हैं।

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एक शख्स ने ठेले के ऊपर बनाया कुत्तों के लिए शानदार ‘घर’

एक शख्स ने ठेले के ऊपर बनाया कुत्तों के लिए शानदार ‘घर’

वेब ख़बरिस्तान। सोशल मीडिया परर आये दिन कोई तदवीर या विडियो वायरल होती ही रहती है। ऐसी ही एक तस्वीर सामने आई है जिसमे एक ठेले के ऊपर कुत्तों के लिए घर बनाया गया है। आपको बता दें आमतौर पर लोग अपने पालतू कुत्तों के रहने के लिए एक छोटा सा घर बनवाते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके पास तो खुद के रहने के लिए भी घर नहीं होता, लेकिन उनकी दरियादिली ऐसी होती है कि वे किसी को भी अपने दिल रूपी घर में रख लेने की ताकत रखते हैं। एक गरीब ने अपने ही ठेले के ऊपर बनाया कुत्तों के लिए घर दरअसल, एक शख्स ने अपने ही ठेले के ऊपर कुत्तों के रहने के लिए घर बना दिया है। कुत्तों के इस घर की खास बात यह है कि कुत्तों के घर को शख्स ने बेहद ही शानदार तरीके से सजाया हुआ है, उसमें लाइट भी लगी हुई है और दोनों कुत्ते आराम से बैठे हुए हैं। यह वायरल तस्वीर दयालुता की पराकाष्ठा है, क्योंकि ऐसी दयालुता बहुत मुश्किल से ही देखने को मिलती है। आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने शेयर की तस्वीर इस शानदार तस्वीर को आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है और कैप्शन देते हुए लिखा है,कुछ लोग इतने गरीब होते हैं कि उनके पास देने के लिए सिर्फ पैसे होते हैं और कुछ दिल के इतने अमीर होते हैं। यह तस्वीर लोगों को बहुत पसंद आ रही है। इसपर लोग तरह-तरह के कमेंट्स भी दे रहे हैं। आपको बता दें एक यूजर ने लिखा है, दिल और कलेजा होना चाहिए, अमीरी के लिए पैसे की जरूरत नहीं है, दिल से अमीर इंसान हर किसी के लिए दया और उपकार करने वाला होता है, तो वहीं एक अन्य यूजर ने मजाक में लिखा है, बल्ले बल्ले सेकेंड फ्लोर पर फ्लैट लिया है इन्होंने। इसी तरह और भी कई लोगों ने तस्वीर देख शानदार कमेंट किये हैं।

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