सिमरनजीत सिंह मान ने जेल से लड़ा था लोकसभा चुनाव, आज तक नहीं टूटा रिकॉर्ड

सिमरनजीत सिंह मान

सिमरनजीत सिंह मान



1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में सिख विरोधी दंगों के विरोध में उन्होंने नौकरी से त्याग पत्र दे दिया था

खबरिस्तान नेटवर्क। संगरूर लोकसभा उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को टक्कर देने वाले अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान का सियासी सफर काफी उतार चढ़ाव वाला रहा है। 1989 में मान ने तरनतारन से लोकसभा चुनाव लड़कर इतिहास बनाया था। हालांकि 25 साल बाद इसी हलके से चुनाव के दौरान उनकी जमानत जब्त हुई थी। मान आइपीएस अधिकारी थे। 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में सिख विरोधी दंगों के विरोध में उन्होंने नौकरी से त्याग पत्र दे दिया था ।

भारत-नेपाल सीमा पर मान को तीन अन्य साथियों समेत गिरफ्तार किया गया था। मान पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश में शामिल होने से लेकर देशद्रोह के कई केस दर्ज हुआ। पांच साल भागलपुर की जेल में नजरबंद रहे। 

जेल से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते


मान ने 1989 के लोकसभा चुनाव में तरनतारन हलके से नामांकन भरा और 5,27,707 वोट लेकर रिकार्ड जीत दर्ज की। उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में अजीत सिंह मान (जिला अमृतसर कांग्रेस अध्यक्ष) ने चुनाव लड़ा था। चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अजीत सिंह मान की जमानत जब्त हो गई थी। तरनतारन से लोकसभा सदस्य बनने पर उनको रिहा कर दिया गया था। 

संसद में श्री साहिब ले जाने पर अड़े थे

1989 में तरनतारन हलके से रिकार्ड तोड़ जीत के बाद मान देश की संसद में नहीं पहुंच सके। उन्होंने संसद में श्री साहिब (कृपान) हाथ में लेकर जाने की बात की थी। फिर 2014 के लोकसभा चुनाव में सिमरनजीत सिंह मान ने हलका खडूर साहिब (पहले तरनतारन) से अकाली दल अमृतसर की ओर से नामांकन भरा। इस चुनाव में कुल 17 प्रत्याशी मैदान में थे। सिमरनजीत सिंह मान को इस बार 13,990 वोट ही नसीब हुए। वह चुनाव नतीजे में चौथे नंबर पर तो आए, साथ ही मान की जमानत जब्त हो गई। 1999 में मान ने लोकसभा हलका संगरूर से दूसरी बार सांसद का चुनाव जीता।

एक रिकार्ड जो अभी तक नहीं टूटा

1989 लोकसभा चुनाव में 93.92 फीसदी  वोट हासिल करने वाले ने मान का रिकार्ड 30 साल बाद भी कोई नहीं तोड़ सका है। मान ने तरनतारन से जीत हासिल की थी। फिरोजपुर में मान द्वारा समर्थित आजाद कैंडिडेट ने भी कामयाबी हासिल की थी। इसके बाद मान और उनकी पार्टी हाशिए पर चली गई। 

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