संगरूर का एक ऐसा स्कूल जहां बच्चे अकेले नहीं उनके परिजन भी हाथों में लाठियां डंडे लेकर स्कूल आते हैं वजह है स्कूल में बंदरों का आतंक...



संगरूर के लहरागागा के गांव आलमपुर की जहां इन दिनों कुछ ऐसी ही तस्वीर देखने को मिल रही है स्कूल में इतने बच्चे नहीं जितनी उनके साथ उनके परिजन हाथों में लाठियां डंडे लेकर बच्चों के स्कूल पहुंच रहे हैं ग

खबरिस्तान नेटवर्क | आज हम आपको एक ऐसी खबर दिखाने जा रहे हैं जो शायद पहले आपने ना कभी देखी होगी ना कभी पढ़ी होगी ! बच्चे स्कूल जाते हैं यह देश के हर स्कूल की तस्वीर होती है लेकिन क्या बच्चों के साथ उनके परिजन अपने हाथों में लाठी-डंडे लेकर स्कूल जाते हैं यह तस्वीर आपने कभी नहीं देखी होगी यह खबर हैं संगरूर के लहरागागा के गांव आलमपुर की जहां इन दिनों कुछ ऐसी ही तस्वीर देखने को मिल रही है स्कूल में इतने बच्चे नहीं जितनी उनके साथ उनके परिजन हाथों में लाठियां डंडे लेकर बच्चों के स्कूल पहुंच रहे हैं गांव में ऐसा माहौल देखकर दहशत का माहौल है आखिरकार स्कूल में ऐसा माहौल क्यों बढ़ रहा है क्यों स्कूल में अकेले बच्चे स्कूल के अंदर एंटर नहीं करते अकेला स्कूल का स्टाफ दैनिक अध्यापक भी अंदर नहीं जाते जितनी देर गांव वाले लाठियां डंडे लेकर नहीं आते आइए बताते हैं इसकी पूरी कहानी

 

 

जो तस्वीर संगरूर के आलमपुर गांव की है जहां पूरे गांव में ही बंदरों का आतंक है स्कूल पर तो बंदर यह समझ लो कि टूट ही पढ़ते हैं अगर पहले कोई अकेला अध्यापक आ गया तो उसकी हिम्मत नहीं पड़ती कि वह स्कूल में जाए क्योंकि बंदर काटने को आते हैं हमला कर देते हैं और छोटे बच्चे वह भी केले स्कूल नहीं जाते इसीलिए स्कूल में गांव के लोग इकट्ठा होकर अपने बच्चों को लाठी-डंडे लेकर को छोड़ने आते हैं स्कूल के बाहर पहरा देते हैं ताजो बंदर स्कूल में बच्चों पर अटैक ना करें अध्यापक परेशान है क्योंकि जब तक क्लास में बच्चे अंदर पढ़ाई कर रहे होते तो ठीक है कई बार तो क्लास के अंदर तक बंदर आ जाते हैं कोई बच्चा अकेला बाहर घूमने नहीं निकल सकता ना अध्यापक डर रहता है कि कहीं किसी पेड़ से छलांग लगाकर बंदर हमला ना डालें क्योंकि बंदरों का अंतर ऐसा है कि उसने बच्चों को गांव वालों को अध्यापकों को अपने हमले से घायल कर दिया है बच्चों के अध्यापकों के ऊपर बंदरों के किए हुए हमले की तस्वीरें आप साफ़ देख सकते हैं अभी हाल ही में 1 दिन पहले स्कूल के एक अध्यापक के ऊपर हमला कर दिया स्कूल के अध्यापकों का कहना है और इस समस्या से वह कोई आज के नहीं पिछले लंबे समय से जूझ रहे हैं इसका कोई हल नहीं हो रहा हम अकेले बच्चों को बाहर वॉशरूम तक पानी पीने तक नहीं भेज सकते लाठी-डंडे लेकर खड़े होना पड़ता है बच्चे कह रहे हैं जब स्कूल में बाहर बंदर आ जाते हैं तो अध्यापक हमें पढ़ाना छोड़ कर उनको भगाने में लग जाते हैं हमारी पढ़ाई डिस्टर्ब हो रही है गांव वाले कह रहे हैं हम अकेले बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे तो बंदर हमला करते हैं हमें भी उनके साथ जहां पर लाठी-डंडे लेकर आना पड़ता है और गांव की महिलाएं बोल रही है कि जब हम स्कूल में आ जाते हैं तो घरों में बंदर हो जाते तो उनके घरों का सामान इधर-उधर कर देते हैं गांव के बुजुर्ग बोलते हैं किस बंदरों के आतंक के साथ हमारे गांव में कोई अपनी लड़की की शादी करवाने के लिए तैयार नहीं होता तो यह समस्या बहुत बड़ी है इसी को लेकर खबर दिखाना लाजमी है कि इन बंदरों का वन विभाग की ओर से कोई हल निकाला जाए पूरे गांव में स्कूल के आसपास के इलाके में 200 से ज्यादा बंदर है स्कूल के बच्चों गांव वालों और अध्यापकों को अपना शिकार बना रहे हैं हमला कर रहे हैं और वह इस पूरे मामले की जब हमने आवाज लहरागागा के एसडीएम के पास उठाई तो उन्होंने कहा कि हम जल्द ही वन विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत कर इस मसले का हल निकालेंगे अब देखना होगा कि गांव के लोगों को कब इन बंदरों से और स्कूल के बच्चों को स्कूल में पढ़ाई करते समय पैदा हुए डर से निजात मिलती है

 


गीता रानी स्कूल की मुख्य अध्यापक बताती है कि बंदरों दशरथ इतनी है कि जब हम सुबह स्कूल आते हैं हम उतनी देर स्कूल के अंदर नहीं जाते जब तक बच्चों के साथ उनके कुछ परिजन नहीं आते जब गांव के लोग आते हैं फिर हम उनके साथ स्कूल के अंदर एंटर करते हैं क्योंकि स्कूल में उतने बच्चे नहीं हैं जितने बंदर हैं हमारे स्कूल में डेढ़ सौ के करीब बच्चा है और बंदर 300 है और पिछले 1 महीने के अंदर अंदर इन बंदरों ने हमारे 6 बच्चों को 2 अध्यापकों को दो मिड डे मील वर्करों को काट लिया अभी कल की बात है कल एक बच्चे पर बंदर हमला कर रहा था जब अध्यापक ने उसको बचाना चाहता उसने अध्यापक के ऊपर ही हमला कर दिया हम इतने परेशान हैं कि स्कूल में अकेले आना डर लगता है ग्रामीण कह रहे हैं कि हम अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजेंगे अगर आप यह जिम्मेवारी लेंगे कि बंदर हमला नहीं करेंगे तो जय जय मारी हम नहीं ले सकते वह हमारे ऊपर भी हमला करते हैं वह हमारे स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरा खोल कर ले जाते हैं अगर बाहर बच्चों को पढ़ा रहे होते हैं तो हमारा सामान उठाकर ले जाते हैं कुछ दिन पहले हम ग्लोब की मॉडल पर बच्चों को पढ़ा रहे थे तभी बंदरों ने हमला किया तो बच्चे और अध्यापक साइड पर चले गए बंदर ग्लोब को लेकर पेड़ पर चढ़ गया अगर किसी बच्चे ने बॉस रुक जाना है तो एक डंडा लेकर अध्यापक उनके साथ जाता है हम 1 मिनट भी किसी क्लास को खाली नहीं छोड़ सकते क्योंकि वहां पर हमला होने का डर रहता है हम चाहते हैं हमारी समस्या का हल निकाला जाए 

 

स्कूल अध्यापक वीरेंद्र पाल ने बताया कि स्कूल में बंदरों का आतंक ईतना ज्यादा है स्कूल के अंदर आने से डर लगता है आज सुबह की बात है एक बंदर ने बच्चे के ऊपर हमला किया तो मैं बचाने के लिए आगे गया तो उसने मेरे ऊपर हमला कर दिया जब हम सुबह स्कूल आते हैं तो स्कूल के दोनों गेटो के ऊपर बड़ी गिनती में बंदर बैठे होते तभी हम इंतजार करते हैं कभी गांव वाले लोग आएंगे तो फिर हम उनके साथ अंदर जाते हैं हमे इनकी  बहुत परेशानी है।

 

स्कूल पढ़ने वाले बच्चे बताते हैं कि जब भी स्कूल आते हैं तो हमारे घर वाले हमारे साथ आते हैं उनके हाथ में डंडा होता है क्योंकि बंदर हमारे ऊपर हमला करते हैं जब हम क्लास में होते हैं तब भी बंदर आते हैं तभी अध्यापक और को बढ़ाने के लिए जाते हैं हमारी पढ़ाई खराब हो रही है हम अकेले बाहर नहीं निकल सकते

 

गांव के लोगों ने तो यहां तक कहा कि बंदरों का आतंक इतना ज्यादा है हमारे गांव में कोई अपनी बेटी की शादी तक नहीं करता कोई रिश्तेदार हमारे घर नहीं आता क्योंकि रास्ते में ही बंदर उनका सामान छीन लेते हैं घरों में तोड़फोड़ कर देते हैं घरों के अंदर चले जाते हैं और फ्रिज में पड़ा समान तक ले जाते हैं सरकार को इनका कोई हल निकालना चाहिए

 

 

गांव के मुखिया ने बताया कि हमारे गांव में बंदरों की समस्या पिछले लंबे समय से हमारे हाथ खड़े हो चुके हैं हमारी पंचायत के हम इसका कोई हल नहीं निकाल सके हम सरकार से अपील करते हैं हमें इनके आतंक से छुटकारा दिलाया जाए हम यह नहीं चाहते जेबी जानवर हैं इनको कोई नुकसान पहुंचाया जाए हमारे पास जमीन पड़ी है पंचायत की और वहां पर प्रशासन इन बंदरों को छोड़ें तीन चार एकड़ में उसके आसपास एक जाल लगाया जाए तो वहां से बाहर ना आए आमिर के खाने पीने का सामान वहां अंदर इनको देखकर आएंगे वह हमारी जिम्मेदारी होगी लेकिन हम बहुत परेशान हैं हमारे बच्चे परेशान हैं बच्चों को छोड़ने तक स्कूल आना पड़ता है लाठी-डंडे लेकर फिर घर लेकर जाना पड़ता है

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