नवजोत सिद्धू बोले- मेरी चमड़ी मोटी, मुझे फर्क नहीं पड़ता, क्रिकेट शॉट मरने का एक्शन किया



पंजाब कांग्रेस भवन में एक बार फिर नवजोत सिद्धू के तेवर देखने को मिले

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस भवन में एक बार फिर नवजोत सिद्धू के तेवर देखने को मिले। भाषण देने के लिए खड़े हुए तो सबसे पहले उन्होंने भगवान को याद किया और इसके बाद क्रिकेट शॉट मारने का एक्शन किया। अपने दाईं ओर बैठे कैप्टन अमरिंदर सिंह और हरीश रावत को इग्नोर करते हुए वे आगे बढ़े। पूर्व मुख्यमंत्री रजिंदर कौर भट्‌ठल और लाल सिंह के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद डाईस पर आकर कहा- मेरा दिल चिड़े के दिल जैसा नहीं है। जो मेरा विरोध करेंगे, वो मुझे और मजबूत बनाएंगे। मेरी चमड़ी मोटी है। मुझे किसी के कहने-सुनने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

पंजाब मॉडल को आगे ले जा दिल्ली मॉडल फेल करना है

नवजोत सिद्धू ने अपने भाषण में कहा- परखने से कोई अपना नहीं रहता, किसी भी आइने में ज्यादा देर चेहरा नहीं रहता। उन्होंने कहा कि आज सारे कांग्रेस कार्यकर्ता प्रधान बन गए चूंकि कार्यकर्ताओं के सहयोग के बिना कोई पार्टी राजनीति में टिक नहीं सकती। भाजपा को घेरते हुआ कहा कि जिनके मत से बनती हैं सरकारें, आज दर बदर सड़कों पर भटक रहे बेचारे। उन्होंने यह बात किसानों को लेकर थी। 15 अगस्त से सिद्धू का बिस्तरा कांग्रेस भवन में लगेगा। मंत्रियों से अपील है कि वे मुझसे मिलने आएं, पंजाब मॉडल को आगे ले जाकर दिल्ली मॉडल को फेल करना है।

मैं सभी के बीच जाकर बात करूँगा


उन्होंने कहा कि इस समय सबसे बड़ा मसला दिल्ली में बैठे हमारे किसान हैं। मैं किसानों से मिलना चाहता हूं। इसके अलावा बेअदबी का मसला है। ईटीटी टीचर सड़कों पर हैं। डॉक्टर हड़ताल पर हैं। कंडक्टर, ड्राइवर धरने पर हैं। इन सभी के मसले हमें हल करने हैं। मैं सभी के बीच जाऊंगा, बात करुंगा और उन्हें हर संभव तरीके से अपने साथ लेकर आऊंगा।

जब से सिद्धू पैदा हुए तब से उनके परिवार को जानता हूँ

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने समारोह में सुनील जाखड़ की तारीफों के पुल बांधे। उन्होंने कहा कि जाखड़ ने पंजाब कांग्रेस के लिए बहुत कुछ किया है। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। सिद्धू और अपने कनेक्शन पर कहा कि जब सिद्धू पैदा हुए थे तबसे उनके परिवार को जानता हूं। नवजोत सिद्धू का जन्म 1963 में हुआ था। यही समय था जब मैं चीन के बॉर्डर पर शिफ्ट हुआ था। मेरी माता जी ने और सिद्धू के पिता ने भी साथ काम किया| सिद्धू के पिता तब पटियाला के प्रधान हुआ करते थे। इसके बाद मेरी माता जी 1967 में लोकसभा में आ गईं।

माता जी ने कहा सिद्धू के पिता सब सिखा देंगे

जब मैं 1970 में सेना छोड़ के आया तब माता जी ने राजनीति में आने को कहा। लेकिन मैं बिलकुल भी राजनीति नहीं जानता था। तब माता जी ने कहा- सिद्धू के पिता सरदार भगवंत सिंह सब सिखा देंगे। इसके बाद फिर सिद्धू के पिता के साथ मेरी कई बैठकें हुईं। वे पटियाला कांग्रेस के प्रधान रहे। इसके बाद एक समय में सरदार भगवंत सिंह मेरे कदम सियासत में ले ही आए। कैप्टन ने सिद्धू को लेकर आगे कहा कि जब मैं इनके घर जाया करता था तो सिद्धू अब तो बड़े लगते हैं लेकिन तब सिद्धू की उम्र 6 साल हुआ करती थी और ये इधर-उधर भागते फिरते थे।

सोनिया जी ने मुझसे कहा कि अब नवजोत पंजाब के अध्यक्ष होंगे और आप दोनों को मिलकर काम करना होगा तो मैंने कह दिया था कि आपका जो भी फैसला होगा, वो हमें मंजूर होगा।

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